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ये कैसी योजना:6.82 करोड़ की नल-जल योजना ठप, 6 साल में 26 में से 6 गांव में ही बिछी पाइप

जगदलपुर9 दिन पहले
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कोड़ेनार के खालेपारा में पेड़ के तने को गाड़कर पानी निकाल रहे लोग। - Dainik Bhaskar
कोड़ेनार के खालेपारा में पेड़ के तने को गाड़कर पानी निकाल रहे लोग।
  • 26 गांवों के 15 हजार से ज्यादा घरों तक 2 साल के अंदर पहुंचाना था साफ पानी
  • 2015 में मिली स्वीकृति के बाद 2 साल में करना था काम लेकिन अब तक अधूरा

6 साल पहले बस्तर जिले के 26 गांव के घर-घर तक नल-जल पहुंचाने के लिए शुरू किया गया 26 नल-जल योजना धरातल पर आने से पहले ही दम तोड़ दिया है। हालत ये हैं कि 6 साल गुजर जाने के बाद अब तक मात्र 6 गांव तक ही नल पहुंचाए गए हैं। यानी 20 गांवों के लोग अब भी पीने के साफ पानी के लिए तरस रहे है।

ऐसा इसलिए कि इन गांवों इस योजना पर कोई काम हुआ ही नहीं है, जहां शुरू भी हुआ हुआ है तो वे भी अधूरा पड़ा हुआ है। 6.82 करोड़ रुपए की लागत से अलग-अलग 26 गांवों में पानी पहुंचाने और योजना को पूरा करने की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दी गई थी, लेकिन यहां न विभाग योजना पूरा करने में दिलचस्पी दिखा रहा है औार ठेकेदार काम को पूरा करने में। अब इसका खामियाजा गांव के लोग गंदा पानी पीकर उठा रहे है।

कई गांवों में पाइप तक नहीं पहुंच सके

पंचायतों के 15 हजार से ज्यादा घरों तक पानी की पहुंचाया जाना था, लेकिन ये योजना ठप पड़ गई है। अब तक 5.84 करोड़ रुपए के काम शुरू ही नहीं हो पाए हैं, जिसके कारण ग्रामीणों के सामने कई किमी जाकर व्यवस्था करने की मजबूरी है।

जिले में योजना की जमीनी हकीहत ये है कि यहां पाइपलाइन विस्तार के लिए पाइप ही नहीं पहुंच सके हैं। केंद्र सरकार के ई-जलशक्ति पोर्टल में दर्ज जानकारी के मुताबिक बस्तर में नल-जल योजना की स्थिति काफी खराब है। विभाग भी इसमें जरूरी कार्रवाई नहीं कर रहा है।

6 साल बाद भी ग्रामीणों को पानी के लिए परेशानी

2015 में बकावंड के पलवा में ओवरहैड टैंक बना, पाइपलाइन का काम भी हो चुका है पर पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई। 2017 में साड़गुड़, कोरपाल, भाटागुड़ा, भाटपाल, उलनार-भाटागुड़ा, पीठापुर, दुगनपाल में मंजूरी दी गई। 3 साल से नेतानार, कुरंदी, पाईकपाल, नलपावंड, लेंड्रा-टिकरापाल में काम जारी होने की बात कही जा रही है। कुम्हली, सरगीपाल, बालीकोंटा, बिलौरी, तुरेनार में काम शुरू नहीं हुआ है तो छोटे देवड़ा और मोंगरापाल में निविदा ही नहीं मंगाई है।

कोड़ेनार में झरिया में पेड़ का तना गाड़ पी रहे पानी

कोड़ेनार में 49.75 लाख से मंजूर योजना के तहत टैंक का काम फरसगुड़ा के आशीष कंस्ट्रक्शन को दिया गया, वहीं पाइपलाइन का काम साईकृपा बोरवेल्स को 2015 में दिया था। इसमें टैंक के लिए 2016 और पाइपलाइन के लिए 2017 में कार्यादेश जारी हुआ। गांव के सुकटा, मासा, हेमला, सुकली, दसरी ने बताया अंदरूनी मोहल्ले पटेलपारा, पुजारीपारा में तो ग्रामीणों ने झरिए का पानी जमा करने लकड़ी के खोखले तने को जमीन में गाड़ दिया है।

तीन गांव में काम पूरा, पानी अब तक नहीं

एक योजना में दो ठेकेदारों को काम दिया गया है, जिसमें एक को पाइपलाइन विस्तार तो दूसरे को टैंक का काम दिया गया है। इनमें सोनपुर के दोनों काम पूरे कर लिए गए हैं, लेकिन अब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। पलवा में पाइपलाइन का काम खत्म हो चुका है। इधर बड़े बोदेनार में पाइपलाइन और मिचनार में पाइपलाइन और टैंक, दोनों काम पूरे हो गए हैं।

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