बच्चों पर कुपोषण के साथ मलेरिया का अटैक:बस्तर व बकावंड ब्लॉक में 6881 बच्चे कुपोषित तो सांसद के गृह क्षेत्र लोहंडीगुड़ा में 93 बच्चे मिले मलेरिया पॉजिटिव

जगदलपुर7 महीने पहले
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दरभा में मलेरिया जांच करने गए कर्मचारियों ने बताए मच्छरदानी के लाभ। - Dainik Bhaskar
दरभा में मलेरिया जांच करने गए कर्मचारियों ने बताए मच्छरदानी के लाभ।
  • मलेरियामुक्त बस्तर अभियान के चौथे चरण में 16 जून से जांच शुरू
  • 30 जून तक बस्तर जिले में 483 केस, लोहंडीगुड़ा में सबसे ज्यादा 170
  • इधर बस्तर ब्लॉक में 3713 बच्चे तो बकावंड में 3174 बच्चे कुपोषित

बस्तर जिले में मलेरिया और कुपोषण पर नियंत्रण की कोशिशें कारगर नहीं हो पा रही है। बस्तर और बकावंड ब्लॉक दोनों में मिलाकर 6881 बच्चे कुपोषित हैं। इधर जिले में 16 जून से 31 जुलाई तक मलेरियामुक्त बस्तर अभियान का चौथा चरण चलाया जा रहा है। शुरुआती 3 दिन में ही सांसद दीपक बैज के गृह क्षेत्र लोहंडीगुड़ा ब्लॉक में सबसे ज्यादा 91 लोग मलेरिया से पीड़ित पाए गए हैं। चौथे चरण में 30 जून तक बस्तर जिले में मलेरिया के कुल 483 मरीज मिले हैं। इसमें भी लोहंडीगुड़ा ब्लॉक में सबसे ज्यादा 170 मिले, इनमें 93 बच्चे हैं। इनमें 5-8 साल के 44, 9-14 साल के 30 और 4 साल तक के 19 बच्चे हैं। बास्तानार ब्लॉक में 30 जून तक 106 मलेरिया पीड़ितों में 60 बच्चे, तोकापाल ब्लॉक में 12 में 6 बच्चे, दरभा ब्लॉक में 113 पीड़ितों में 54 बच्चे, नानगुर में 59 मरीजों में 27 बच्चे और बस्तर ब्लॉक में मलेरिया के सिर्फ 23 मरीज मिले जिनमें 9 बच्चे हैं।

लोहंडीगुड़ा में गर्भवतियों को भी सबसे ज्यादा मलेरिया

बच्चों के बाद मलेरिया की चपेट में आने वाली गर्भवती माताओं की संख्या में लोहंडीगुड़ा ब्लॉक भी पहले नंबर पर है। जिलेभर के सात ब्लाकों में 304 महिलाओं की जांच में जहां लोहंडीगुड़ा ब्लॉक में 4 गर्भवती महिलाएं मलेरिया से पीड़ित पाई गई हैं, वहीं बस्तर ब्लॉक में एक भी मलेरिया पीड़ित गर्भवती महिला नहीं मिली है। अन्य सभी ब्लाकों में 1-1 गर्भवती महिलाएं मलेरिया पॉजिटिव मिली हैं।

लोहंडीगुड़ा में बिना लक्षण वाला मलेरिया भी सर्वाधिक

चौथे चरण में 15 दिनों में 285 बिना लक्षण वाले मलेरिया से पीड़ित मिले हैं। इसमें भी सबसे अधिक 104 मरीज लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के हैं। दूसरे नंबर पर 86 मरीजों के साथ दरभा ब्लॉक हैं। जिला मलेरिया अधिकारी एसएस टीकाम ने कहा कि लोहंडीगुड़ा ब्लॉक में जिन गांव में मलेरिया मरीज पाए जा रहे हैं वे गांव नारायणपुर और बीजापुर की सीमा से लगे हैं। इन दोनों जिले में मलेरिया के मरीज ज्यादा मिलते हैं। कई महीनों से ग्रामीण जांच नहीं करवा रहे थे।

बस्तर जिले के सभी ब्लॉक में 16 से 30 जून तक इतने लोग मिले मलेरिया से पीड़ित
ब्लॉक बिना लक्षण गर्भवती बच्चों की संख्या महिला पुरुष
बड़ेकिलेपाल 60 01 60 17 29
तोकापाल 09 01 06 02 04
लोहंडीगुड़ा 104 04 93 46 31
दरभा 86 01 54 33 26
नानगुर 19 01 27 18 14
बस्तर 07 00 09 10 04

संभाग के जिलों में मलेरिया के इतने मरीज (22 जून तक)

जिला कुल जांच कुल मरीज महिला पुरुष बच्चे (1-14 वर्ष तक)
बस्तर 22927 316 90 60 166
बीजापुर 46158 389 107 93 188
दंतेवाड़ा 53803 325 114 86 125
कांकेर 11985 120 31 20 69
कोंडागांव 30156 195 56 39 100
सुकमा 78713 537 132 129 276
नारायणपुर 19187 414 83 82 247

इधर कुपोषण पर भी कंट्रोल नहीं, बस्तर ब्लॉक टॉप पर, दूसरे नंबर पर बकावंड

बस्तर जिले में कुपोषण को दूर करने के लिए हर साल 10 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जाते है, इसके बावजूद नियंत्रण नहीं हो पाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बच्चों में कुपोषण के मामले में बस्तर ब्लॉक सबसे ऊपर है। यहां 3713 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। जबकि बकावंड इलाके में 3100 से ज्यादा बच्चे कुपोषित मिले हैं। बस्तर के बीएमओ पीएन शांडिल्य के मुताबिक कुपोषण पीड़ित बच्चों की संख्या ज्यादा होने का सबसे बड़ा कारण इस ब्लॉक के लोगों का पौष्टिक भोजन नहीं खाना है। उन्होंने कहा कि बस्तर ब्लॉक सब्जी और धान उत्पादन में सबसे आगे हैं। लेकिन लोग सब्जियों को बाजार में बेच देते हैं और केवल चावल नमक और चटनी खाकर गुजारा कर रहे हैं। बच्चों को पौष्टिक भोजन नहीं मिलने से वे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।

ब्लॉक कुपोषित बच्चों की संख्या
बस्तर 3713
बकावंड (1) 1481
बकावंड (2) 1687
जगदलपुर (ग्रामीण) 1601
जगदलपुर (शहरी) 422
तोकापाल 1424
लोहंडीगुड़ा 1845
दरभा 1487
बास्तानार 1005

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