बस्तर दशहरा:मावली मंदिर की परिक्रमा के बाद 6 सौ ग्रामीणों ने चुराया विजय रथ, राज्यपाल और जनप्रतिनिधि भी हुए शामिल

जगदलपुर3 महीने पहले
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शाम को मावली मंदिर की परिक्रमा से पहले रथ को तैयार किया गया। - Dainik Bhaskar
शाम को मावली मंदिर की परिक्रमा से पहले रथ को तैयार किया गया।

बस्तर दशहरा में भीतर रैनी विधान के तहत शुक्रवार को 8 पहियों वाला विजय रथ खींचा गया। देर शाम रथ संचालन शुरू हुआ। यह रथ सिरहासार चौक से निकाला गया और मावली मंदिर की परिक्रमा कर रात को दंतेश्वरी मंदिर पहुंचा। वहां से रथ को कोड़ेनार-किलेपाल क्षेत्र के 15 गांवों के 600 से अधिक ग्रामीण खींचकर शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर कुम्हड़ाकोट के जंगल ले गए। सालों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए हजारों लोग रथ परिक्रमा मार्ग पर सड़क किनारे डटे रहे।

टेंपल कमेटी और बस्तर दशहरा समिति के सदस्यों ने बताया कि 8 पहियों वाले विजय रथ खींचा गया और इस विधान को शहर मध्य चलाने के कारण भीतर रैनी कहा जाता है। इससे पहले शुक्रवार की शाम को मां दंतेश्वरी का छत्र मावली मंदिर पहुंचा। देवी की आराधना के बाद माईजी के छत्र को रथारूढ़ कराया गया। इस मौके पर जिला पुलिस बल के जवानों ने हर्ष फायर कर मां दंतेश्वरी को सलामी दी।

सालों से चली आ रही इस परंपरा को पूरा करने के लिए किलेपाल, गड़िया और करेकोट सहित 15 से अधिक गांवों के 600 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। अब शनिवार को राज परिवार के सदस्य ग्रामीणों को रथ लौटाने के लिए मनाएंगे। भीतर रैनी विधान में राज्यपाल अनुसुइया उइके के साथ ही कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए।

इस विधान को कोड़ेनार के ग्रामीण कर रहे हैं पूरा
बस्तर दशहरा विधान के तहत होने वाले भीतर रैनी के पूजा विधान को सालों से कोड़ेनेार के ग्रामीणों की ओर से किया जाता है। समिति के सदस्यों ने कहा कि बस्तर में यह माना जाता है कि कोड़ेनार बास्तानार क्षेत्र के माड़िया आदिवासी ह्ष्ट-पुष्ट हैं और वे ही इस विशाल रथ को खींच सकते हैं। इसलिए उन्हें ही रथ खींचने जगदलपुर बुलाया गया था। पुजारियों ने कहा कि यह व्यवस्था बस्तर महाराजा दलपतदेव द्वारा जगदलपुर को राजधानी बनाने के बाद की गई है।

शनिवार को मनाएंगे नवाखानी उत्सव
शनिवार को बाहर रैनी विधान के तहत कुम्हड़ाकोट में बनाई गई झोपड़ी में राजपरिवार के सदस्य मां दंतेश्वरी और मावली के सानिध्य में बस्तर का पहला नवाखानी उत्सव मनाएंगे। विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों और रथ खींचने वालों को प्रसाद वितरित किया जाएगा। विजय रथ की सात परिक्रमा होगी।

रथ ले जाते समय रास्तेभर साथ रहे सैकड़ों देवी-देवता
रथ चोरी कर ले जाने के दौरान रास्तेभर उनके साथ आंगादेव सहित सैकड़ों देवी-देवता भी साथ रहे। फूल रथ की परिक्रमा के दो दिनों के विराम के बाद भीतर रैनी (विजय दशमी) को 8 चक्के वाले दोमंजिला लकड़ी रथ की परिक्रमा दंतेश्वरी मंदिर, सिरासार, जयस्तंभ, गुरुनानक चौक से दंतेश्वरी मंदिर तक पूरी की गई। रथ का परिचालन किलेपाल परगना के माड़िया आदिवासियों ने किया। इससे पहले सोमवार की रात को मावली परघाव की रस्म पूरी की गई है।

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