बस्तर की महिलाएं सबसे ज्यादा जागरूक:अस्पतालों में प्रसव के मामले में बस्तर जिला प्रदेशभर में अव्वल, अकेले शहर के महारानी और प्राइवेट अस्पतालों में 2060 प्रसव हुए

जगदलपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
शिवराम गर्भवती को 10 किमी से पीएचसी लाए तो 400 रुपए मिले। - Dainik Bhaskar
शिवराम गर्भवती को 10 किमी से पीएचसी लाए तो 400 रुपए मिले।
  • बस्तर जिले में अप्रैल से अब तक 72 फीसदी महिलाओं ने हॉस्पिटल में कराई डिलीवरी,

जिले में होने वाले घरेलू प्रसव को छोड़कर अब महिलाएं सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में डिलीवरी कराने के लिए पहुंच रही हैं। इससे जहां जच्चा और बच्चा दोनों की जान बच रही है तो वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग का संस्थागत प्रसव को बढ़ाने की कोशिश सफल हो रही है। इस कोशिश का परिणाम है कि कभी नक्सल तो कभी सड़क और अन्य समस्याओं के चलते पीछे रहने वाला बस्तर जिला अब प्रदेश के 27 जिलों को पीछे छोड़ते हुए संस्थागत प्रसव के मामले में पहले नंबर पर है।

पिछले दो सालों से बस्तर जिले के नंबर वन पर रहने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बस्तर जिले में इस समय संस्थागत प्रसव करीब 99.83 फीसदी है। जबकि अन्य जिलों में यह काफी कम है। अधिकारियों का कहना है कि संस्थागत प्रसव के मामले में बस्तर जिले ने राष्ट्रीय और प्रदेश के औसत को पीछे छोड़ दिया है। नक्सल समस्या, सड़कों का अभाव, जंगल-पहाड़, नदी-नालों, साक्षरता की कमी के बावजूद राष्ट्रीय औसत से आगे निकलना बड़ी उपलब्धि है। सीएमएचओ डॉ. डी राजन ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन द्वारा हाल ही में जारी स्वास्थ्य सूचकांक के अनुसार बस्तर जिले में अप्रैल से लेकर जून तक 72 फीसदी महिलाओं ने संस्थागत प्रसव करवाया है। जबकि केवल तीन फीसदी महिलाओं ने घरेलू प्रसव में करवाया है। इसके साथ प्रदेश के अन्य जिलों में यह 30 से लेकर 66 फीसदी है। इसके साथ ही पिछले साल बस्तर जिले में लक्ष्य का 108 फीसदी प्रसव संस्थागत हुआ था। 5 साल पहले बस्तर में संस्थागत प्रसव का औसत 60 फीसदी था।

घरेलू प्रसव दर में भी आई कमी: राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वे-चार के अनुसार तीन साल पहले घरों में होने वाले प्रसव दर करीब 12 फीसदी थी। वर्तमान में यह दर 5 फीसदी से कम है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि घरों में प्रसव कई मायने में जोखिम भरा होता है। प्रसव के समय किसी भी आपात स्थिति से निपटने की सुविधाओं की कमी के कारण प्रसूता की जान भी चली जाती है। प्रसव के समय मां व शिशु की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। घरों में प्रसव कई मायने में जोखिम भरा होता है। प्रसव के समय किसी भी आपात स्थिति से निपटने की सुविधाओं की कमी के कारण प्रसूता की जान भी चली जाती है। इसलिए महिलाओं को हॉस्पिटल में प्रसव के लिए कहा जाता है। ज्ञात हो कि इस समय बस्तर जिले में मेकॉज सहित, 7 सीएचसी और 37 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक सिविल हॉस्पिटल और 242 उपस्वास्थ्य केंद्र है।

मांझी योजना का मिला लाभ
जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना के सफल क्रियान्वयन के साथ जिला प्रशासन द्वारा हाल ही में शुरू की गई मांझी योजना का लाभ संस्थागत प्रसव को बढ़ाने में मिल रहा है। इस योजना के तहत गर्भवती माताओं की उचित देखभाल तो हो ही रही है। महिला को हॉस्पिटल तक लाने वाले व्यक्ति या संस्था को दूरी के हिसाब से पैसे भी दिए जा रहे हैं। जिसके कारण अब लोग महिलाओं को अपने वाहनों में हॉस्पिटल तक पहुंचा रहे हैं। सीएमएचओ ने कहा कि कि संस्थागत प्रसव में मिल रही उपलब्धियों की वजह महिलाओं में जागरूकता है।

खबरें और भी हैं...