नक्सली इलाके में 'मां' की जिम्मेदारी निभातीं रजबती:आंगनबाड़ी के 30 बच्चों के लिए सिर पर पोषाहार रख पैदल चलती है 24 किलोमीटर; नदी, पहाड़ पार कर 13 सालों से दे रहीं सेवा

जगदलपुर/कोंडागांव4 महीने पहले
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कोंडागांव जिले के चिकपाल की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजबती ने 7 कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का बीड़ा उठाया है। - Dainik Bhaskar
कोंडागांव जिले के चिकपाल की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजबती ने 7 कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का बीड़ा उठाया है।

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के चिकपाल की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजबती ने 7 कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए वह जान जोखिम में डाल कर नक्सल इलाके में घने जंगल, पथरीले पहाड़ी रास्तों भरा रोज 24 किलोमीटर का सफर पैदल तय करती हैं। मर्दापाल से बच्चों के लिए सिर पर रखकर पोषण आहार लाती हैं। इन चुनौतियों के बाद भी रजबती अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटी। रजबती के कार्य की सराहना कलेक्टर और IG ने भी की है।

चिकपाल गांव में 2009 से रजबती बघेल यहां अपनी सेवा दे रही हैं।
चिकपाल गांव में 2009 से रजबती बघेल यहां अपनी सेवा दे रही हैं।

कोंडागांव जिले के कड़ेनार ग्राम पंचायत के चिकपाल गांव में 2009 में आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित किया गया था। तब से रजबती बघेल यहां अपनी सेवा दे रही हैं। यह इलाका पूरी तरह से नक्सल प्रभावित है। इस गांव में पहुंचने के लिए पक्की सड़क भी नहीं है। एक गांव से दूसरे गांव की दूरी तय करने के लिए भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद पिछले 13 साल से रजबती अपनी सेवा दे रही हैं। रजबती ने बताया कि इस गांव के लोगों से मुझे बहुत प्यार मिलता है। आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए मां बन जिम्मेदारी निभाती हूं।

आंगनबाड़ी केंद्र में हैं 30 बच्चे, 7 हैं कुपोषित
चिकपाल के आंगनबाड़ी केंद्र में वर्तमान में कुल 30 बच्चे पंजीकृत हैं। जिनमें से 7 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इन्हीं सातों बच्चों को सुपोषित करने की जिम्मेदारी रजबती ने अपने कंधों पर ली है। इन बच्चों के लिए अंडा सहित अन्य पोषण आहार लाने के लिए रजबती जंगल, पथरीले पहाड़ी रास्तों को पार कर क्लस्टर केंद्र मर्दापाल गांव जाती हैं। यहां से अंडों का कैरट सिर में रख कर फिर इन्हीं रास्तों से होते हुए वापस चिकपाल गांव आती हैं। इस बीच रजबती को 24 किमी का पैदल सफर तय करना पड़ता है। बच्चों को सुपोषित करने की जिम्मेदारी भी है, इस लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के कदम कभी रुकते नहीं हैं।

42 अंडों का कैरट सिर पर रख कर फिर इन्हीं रास्तों से होते हुए वापस चिकपाल गांव आती हैं।
42 अंडों का कैरट सिर पर रख कर फिर इन्हीं रास्तों से होते हुए वापस चिकपाल गांव आती हैं।

कोरोना की दोनों लहरों में किया काम
कोरोना की दोनों लहर के दौरान बच्चों में सुपोषण स्तर बनाए रखने के लिए सूखे राशन का वितरण करती थीं। वहीं लगातार चकमक एवं सजग कार्यक्रम के क्रियान्वयन के द्वारा बच्चों को पढ़ाई से भी जोड़े रखने का प्रयास की है। इसके साथ ही जिले में सुपोषण अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे नंगत पिला कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए रजबती बघेल घर-घर जाकर बच्चों के वजन एवं ऊंचाई का मापन कर कुपोषण की जांच का कार्य पूरा करती हैं।

कलेक्टर और IG ने भी की है सराहना
नक्सल प्रभावित इलाके में जान जोखिम में डाल कर रजबती बघेल पिछले 13 सालों से अपनी ड्यूटी कर रही हैं। इसकी जानकारी जब कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा व बस्तर IG सुंदराज पी को मिली तो इन दोनों अफसरों ने रजबती की जमकर सराहना की थी।

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