नक्सलगढ़ में दौड़ेगी 'बीजापुर एक्सप्रेस':5 बसें शुरू, पहले दिन विधायक, कलेक्टर, SP ने किया सफर; नक्सल प्रभावित 2 दर्जन गांवों से गुजरेंगी

जगदलपुर2 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में अब "बीजापुर एक्सप्रेस" दौड़ेगी। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में अब "बीजापुर एक्सप्रेस" दौड़ेगी।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में पैदल सफर करने वाले ग्रामीणों को राहत मिली है। जिला प्रशासन ने 5 बसों को बीजापुर की सड़कों पर उतारा है। इन बसों का नाम 'बीजापुर एक्सप्रेस' रखा गया है। मंगलवार को कलेक्टर रितेश अग्रवाल, SP कमलोचन कश्यप व विधायक विक्रमशाह मंडावी ने हरी झंडी दिखा कर बसों को रवाना किया है। बुधवार से यह सिटी बसें आमजन के लिए अलग-अलग रूट पर दौड़ेंगी। इसका फायदा दो दर्जन से ज्यादा गांवों को मिलेगा।

पहले दिन अधिकारी व जनप्रतिनिधियों ने खुद इस बस में बैठ कर कई किमी की दूरी तय की।
पहले दिन अधिकारी व जनप्रतिनिधियों ने खुद इस बस में बैठ कर कई किमी की दूरी तय की।

पहले दिन अधिकारी व जनप्रतिनिधियों ने खुद इस बस में बैठ कर कई किमी की दूरी तय की। हालांकि इन बसों में किराया कितना लिया जाएगा यह अभी स्पष्ट नहीं है। केवल इतना बताया जा रहा है कि, बाकी प्राइवेट बसों की तुलना में इसमें किराया थोड़ा कम होगा। कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने कहा कि, इन बसों के अलग-अलग रूट पर चलने से जिले के अंदरुनी इलाकों के ग्रामीणों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। साथ ही पास भी बनाए जाएंगे।

कलेक्टर रितेश अग्रवाल, SP कमलोचन कश्यप व विधायक विक्रमशाह मंडावी ने हरी झंडी दिखा कर बसों को रवाना किया है।
कलेक्टर रितेश अग्रवाल, SP कमलोचन कश्यप व विधायक विक्रमशाह मंडावी ने हरी झंडी दिखा कर बसों को रवाना किया है।

इस रूट में चलेगी बस
बीजापुर जिले के धुर नक्सल प्रभावित इलाके सिलगेर, आवापल्ली, बेचापाल, मिरतुर, भैरमगढ़, नैमेड़, तारलागुड़ा व भोपालपटनम रूट पर बसें दौड़ेंगी। इनमें से कई इलाके ऐसे हैं जहां नक्सल दहशत की वजह से कोई भी सवारी वाहन नहीं चलते हैं। ऐसे में प्रशासन ने जिन 5 बसों को इन सड़कों पर उतारा है उसका बड़ा फायदा इलाके के ग्रामीणों को मिलेगा। ग्रामीण अब ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक सीधे जुड़ पाएंगे।

कई किमी का पैदल सफर तय करते हैं ग्रामीण
क्षेत्रफल की दृष्टि से बीजापुर जिला काफी बड़ा है। साथ ही कई ऐसे इलाके हैं जो आज भी नक्सलियों के कब्जे में हैं। कई गांवों तक पहुंचने पक्की सड़क भी नहीं हैं। जिन इलाकों में सड़क बनी है तो वहां नक्सली दहशत की वजह से कोई भी प्राइवेट बसें नहीं चलती है। ऐसे में जिले के अंदरुनी गांव के ग्रामीणों को कई किमी का पैदल सफर तय ब्लॉक व जिला मुख्यालय आना पड़ता है।

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