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एक साल बाद खुला लिंगेश्वरी माता का मंदिर:पहले दिन ही लगा भक्तों का तांता, MP और ओडिशा से मुराद लेकर पहुंचे श्रद्धालु; माता की दहलीज पर मन्नतों की कतार

जगदलपुर/केशकाल2 दिन पहले
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कोंडागांव जिले के फरसगांव इलाके में आलोर की पहाड़ियों में स्थित लिंगेश्वरी माता मंदिर का पट पूरे एक साल बाद बुधवार को खोला गया है। - Dainik Bhaskar
कोंडागांव जिले के फरसगांव इलाके में आलोर की पहाड़ियों में स्थित लिंगेश्वरी माता मंदिर का पट पूरे एक साल बाद बुधवार को खोला गया है।

कोंडागांव जिले के फरसगांव इलाके में आलोर की पहाड़ियों में स्थित लिंगेश्वरी माता मंदिर का पट पूरे एक साल बाद बुधवार को खोला गया है। पहले दिन माता के दर्शन करने भक्तों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। लेकिन कोरोना के चलते मंदिर में किसी भी भक्तों को प्रवेश करने नहीं दिया गया। मध्य प्रदेश व ओडिशा से भी कई भक्त माता के दर्शन करने पहुंचे थे।

पुजारियों की माने तो साल भर बाद जब मंदिर का पट खोला गया तो उस समय रेत में शेर के पंजे के निशान मिले। यहां मंदिर बंद करते समय उसकी जमीन पर रेत बिछा दिया जाता है। रेत बिछाने की परंपरा यहां काफी पुरानी है। लोगों की मान्यता है कि, जिस ओर पंजे के निशान मिले हैं वहां थोड़ा कष्ट आएगा, और पीछे की तरफ वाले इलाकों में खुशहाली आएगी। हालांकि निशान को मिटा कर फिर रेत बिछाई जाएगी। जिसके बाद पट बंद किया जाएगा।

माता के दर्शन करने भक्तों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी।
माता के दर्शन करने भक्तों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी।

बुधवार की सुबह लगभग 10 बजे मंदिर के पट खोले गए थे। जिसके बाद सबसे पहले मंदिर के 5 पुजारी मंदिर के अंदर प्रवेश किए। साथ ही डेढ़ घंटे तक माता की पूरे विधि - विधान से पूजा अर्चना की गई। लेकिन भक्तों को मंदिर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी गई थी, इस लिए भक्तों का ध्यान रखते हुए पुजारी माता के छत्र को बाहर लेकर आए।

संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर जबलपुर से पहुंचे दंपती
मां लिंगेश्वरी देवी के मान्यताओं की जानकारी मिलने पर एक दिन पहले मंगलवार को ही मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी तरुण पटेल व उनकी पत्नी कुंजल पटेल भी पहली बार मन्नत मांगने पहुंचे। इस दंपती ने कहा कि हमारी शादी को लगभग 4 साल हो गए हैं। लेकिन संतान नहीं है। सुना था कि मां सबकी मुरादे पूरी करती हैं, इस लिए हम भी दर्शन करने आए हैं। कोरोना के चलते हम मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सके। केवल बाहर से ही माता के छत्र का दर्शन कर मन्नत मांगी है।

भक्तों की आस्था का ख्याल रख कर माता के छत्र को बाहर लाया गया था।
भक्तों की आस्था का ख्याल रख कर माता के छत्र को बाहर लाया गया था।

रायपुर के दंपती की मन्नत हुई पूरी, तो दर्शन करने पहुंचे
इधर, रायपुर के मोवा में रहने वाले चैतन्य सिन्हा व उनकी पत्नी त्रेता सिन्हा भी अपने 2 साल के बच्चे को लेकर माता के दर्शन करने पहुंचे थे। त्रेता सिन्हा ने बताया कि, परिजनों ने कुछ साल पहले मंदिर के बारे में जानकारी दी थी। जानकारी मिलने के बाद आज से लगभग 3 साल पहले दोनों दंपती माता से संतान प्राप्ति की मुराद लेकर आए थे। माता ने उनकी मनोकामना पूरी की। इसलिए दर्शन करने पहुंचे हैं।

खीरा चढ़ाने की है मान्यता
जानकारों की माने तो माता को खीरा का प्रसाद चढ़ता है। मान्यता है की मंदिर में चढ़ाए गए प्रसाद को यहीं बैठकर खाया भी जाता है। मंदिर के बाहर ग्रामीणों ने खीरा की दुकान भी लगाई थी। एक खीरा 10 रुपए में भी बेचा गया। हालांकि कई लोग खीरा अपने साथ लेकर आए थे।

SDOP मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि भी श्रद्धालु काफी संख्या में पहुंचे थे। आलोर मार्ग से ही लोगों को ये जानकारी देकर लौटाया गया कि कोरोना के चलते प्रवेश नहीं मिलेगा। किंतु उसके बाद भी कई लोग 3 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचे। वहीं मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकालू राम नेताम ने बताया कि भक्तों की आस्था का ख्याल रख कर माता के छत्र को बाहर लाया गया था। भक्तों ने दर्शन किए हैं।

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