सिलगेर आंदोलन के 7 महीने:न्यायिक जांच की मांग को लेकर बैठे हैं सैकड़ों ग्रामीणों; अमित जोगी बोले-जलियावाला हत्याकांड की तरह हुई थी घटना

जगदलपुर7 महीने पहले
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सिलगेर में आंदोलन में बैठे ग्रामीणों से मुलाकात करने के लिए अमित जोगी पहुंचे। - Dainik Bhaskar
सिलगेर में आंदोलन में बैठे ग्रामीणों से मुलाकात करने के लिए अमित जोगी पहुंचे।

छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिले की सीमा में बसे सिलगेर में ग्रामीणों का आंदोलन अब भी जारी है। ग्रामीणों के आंदोलन को 7 महीने पूरे हो चुके हैं, लेकिन फिर भी ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं हुई है। इधर, सोमवार को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी आंदोलन कर रहे ग्रामीणों से मुलाकात करने पहुंचे। मुलाकात के बाद अमित जोगी ने सिलगेर की घटना को जलियावाला बाग हत्याकांड की तरह बताया। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि जब तक मांग पूरी नहीं होती है हम आंदोलन में डटे रहेंगे। ग्रामीणों ने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की है।

इस दौरान अमित जोगी ने कहा कि, सिलगेर में निहत्थे आदिवासी आंदोलन स्थल से पीछे हट रहे थे। उनके ऊपर न तो टियर गैंस का उपयोग किया गया, न ही पानी के फौवारे मारे गए और न ही रबर बुलेट का उपयोग किया गया। बल्कि सीधे बंदूक तानी और गोलियां चला दी। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री को समय नहीं है कि वे यहां आएं और इनसे मुलाकात कर इनके दुख को सुने। यहां आने के लिए नेता प्रतिपक्ष के पास भी समय नहीं है।

सिलेगर में ग्रामीणों का आंदोलन अब भी जारी है।
सिलेगर में ग्रामीणों का आंदोलन अब भी जारी है।

लोकसभा और विधानसभा में उठाएंगे मुद्दा
अमित जोगी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि वे चिंता ना करें, उनकी जो भी मांग है वह हम विधानसभा और लोकसभा में उठाएंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार को एक-एक मांग मनाने के लिए हम बाध्य करेंगे। साथ ही दिल्ली में जो हमारे सहयोगी दल हैं वो लोकसभा में भारत के प्रधानमंत्री से भी मांग करेंगे कि सिलगेर के ग्रामीणों की बात मानी जाए। साथ ही इन गांव में पेसा कानून का पालन हो।

ये है मांग

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की मांग है कि इस घटना की न्यायिक जांच हो। मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ और घायलों को 50-50 लाख का मुआवजा दे सरकार। इसके अलावा लोगों की मांग है कि सिलगेर में मारे गए लोगों के मृतक स्तंभ बनाए गए हैं उन्हें न तोड़ा जाए। वहीं पुलिस कैंप को हटाने भी मांग ग्रामीणों ने की है।

यह था सिलगेर का मामला
दरअसल, मई में नक्सल प्रभावित इलाके सुकमा और बीजापुर जिले की सरहद सिलगेर में नवीन पुलिस कैंप खोला गया था। यहां कैंप खुलने के दूसरे दिन ही इलाके के हजारों ग्रामीण आंदोलन में बैठ गए थे। इस बीच सुरक्षा बलों के साथ ग्रामीणों की झड़प हुई थी। ऐसे में जवानों ने फायरिंग भी खोल दी थी। जिससे गोली लगने से 3 लोगों की और भगदड़ में एक महिला की जान गई थी। पुलिस का कहना था कि, इस भीड़ में नक्सली भी मौजेद थे। जबकि ग्रामीणों ने मारे गए लोगों को निर्दोष आदिवासी बताया था।