नक्सलियों के चंगुल से भाग कर आई 3 नाबालिग बालिकाएं:सभी ने कहा - हमें हाथों में हथियार नहीं शिक्षा के लिए कलम पकड़नी है, नक्सली जबरन करवाते थे संगठन के लिए काम, SP बोले- हम पढ़ाएंगे

जगदलपुर/नारायणपुर3 महीने पहले
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नारायणपुर जिले में ३ नाबालिग युवतियां नक्सलियों के चंगुल से आजाद होकर पुलिस के पास पहुंची है।(फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
नारायणपुर जिले में ३ नाबालिग युवतियां नक्सलियों के चंगुल से आजाद होकर पुलिस के पास पहुंची है।(फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में 3 नाबालिग बालिकाएं नक्सलियों के चंगुल से भाग कर पुलिस के पास पहुंची हैं। इनमे 1 की उम्र महज 16 साल तो वहीं अन्य 2 बालिकाओं की उम्र 17 साल है। नारायणपुर इलाके के नक्सलियों के बड़े लीडर 2 साल पहले इन तीनों बालिकाओं को घर से उठा कर ले गए थे। जिन्हें संगठन में शामिल किया गया था। नक्सली इनसे संतरी ड्यूटी से लेकर खाना बनवाने तक का काम करवाया करते थे। इतना ही नहीं एक गोपनीय सैनिक की हत्या करने को भी कहा था।

युवतियां बोलीं - हमें पढ़ाई कर अफसर बनना है
गुरुवार को नक्सल संगठन से भाग कर तीन बालिकाएं जब नारायणपुर SP उदय किरण के पास पहुंची, तो इन्होंने कहा कि सहाब हमें नक्सली नहीं बल्कि अफसर बनना है। हाथों में हथियार की जगह शिक्षा के लिए हमें कलम पकड़नी है। नक्सली परेशान करते हैं। इधर SP ने भी इन तीनों बालिकाओं की पढ़ाई की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि अब सरकार की मदद से पुलिस इनकी पढ़ाई करवाएगी।

सालभर पहले भी भागी थी, गांव वापस लौटी तो नक्सलियों ने दी थी सजा
नक्सलियों के चंगुल से आजाद होकर सालभर पहले तीनों में से एक नाबालिग बालिका गीदम आई थी। यहां मजदूरी का काम कर रही थी। कुछ समय गीदम में रहने के बाद वापस अपने गांव नारायणपुर जिले में गई तो नक्सलियों को इसके वापस आने की खबर मिली। बालिका को फिर से इसके घर से उठा लिया था। पुलिस के पास जाने का आरोप लगाते हुए सजा देने नाबालिग के हाथ पैर रस्सियों से बांध दिए थे और दिनभर चिलचिलाती धूप में मुर्गा बना कर रखा था।

गोपनीय सैनिक की हत्या की दी थी जिम्मेदारी
इन तीनों बालिकाओं ने पुलिस को बताया कि, नक्सली कमांडर दीपक ने इन्हें संगठन में शामिल किया था। नक्सली इनसे सकड़ काटने, बैनर पोस्टर लगाने, बड़े नक्सली लीडरों के लिए खाना बनाने, इलाके में किसी अंजान को देखने के बाद उनसे पूछताछ करने व संतरी ड्यूटी जैसे काम करवाया करते थे। यही नहीं इन तीनों को नारायणपुर के एक गोपनीय सैनिक की हत्या करने की जिम्मेदारी भी दे रखी थी।

नक्सली कर रहे अन्तर्राष्ट्रीय कन्वेंशन का घोर उल्लंघन - SP
नारायणपुर SP उदर किरण ने कहा कि, जेनेवा कन्वेंशन 1977 सशस्त्र संघर्ष में बच्चों की भागीदारी पर वैकल्पिक प्रोटोकाल (OPAL 2000) और बाल श्रम के सबसे बुरे रूप पर सम्मेलन 1999 के तहत सभी राज्य व गैर राज्य अभिकर्ताओं द्वारा सशस्त्र संघर्ष में नाबालिग बच्चों को शामिल करना युद्ध अपराध के रूप में माना जाता है। इसके अनुसार नाबालिग बच्चों को फाईटर्स, स्पॉटर, मेसेन्जर आदि के रूप में काम नहीं करवाया जा सकता है। लेकिन नक्सली इस तरह का घिनोना कृत्य कर रहे हैं। बच्चों को संगठन में शामिल कर हथियार चलाना, हत्या करवाना सीखा रहे हैं।

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