बस्तर के इस गांव में आज भी मूलभूत सुविधा नहीं:सड़क नहीं इसलिए नहीं पहुंचती एंबुलेंस, साफ पानी भी नहीं मिलता; 100 से ज्यादा लोगों ने कमिश्नर को बताया अपना दुख

जगदलपुर2 महीने पहले
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बेलर गांव के 100 से ज्यादा ग्रामीणों ने बस्तर कमिश्नर से मुलाकात की। - Dainik Bhaskar
बेलर गांव के 100 से ज्यादा ग्रामीणों ने बस्तर कमिश्नर से मुलाकात की।

बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा ब्लॉक का बेलर ग्राम पंचायत में आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।। इस गांव में न तो पक्की सड़क है, न ही स्ट्रीट लाइट और न ही शुद्ध पेयजल की कोई खास व्यवस्था। इन्हीं मूलभूत समस्याओं को दूर करने के लिए शुक्रवार को इस गांव के 100 से ज्यादा ग्रामीणों ने बस्तर कमिश्नर से मुलाकात की। कमिश्नर को अपने गांव की सारी समस्याओं से अवगत करवाया।

मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर बस्तर कमिश्नर,जिला पंचायत CEO व ,लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया गया है।
मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर बस्तर कमिश्नर,जिला पंचायत CEO व ,लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया गया है।

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि, आजादी के बाद साल 1958 में बेलर गांव में स्कूल भवन का निर्माण हुआ था। लेकिन आज तक वहां पहुंचने पक्की सड़क नहीं बनी। गांव में भी पक्की सड़क नहीं होने की वजह से एंबुलेंस की सेवा से इलाके के लोग वंचित हो जाते हैं। यही वजह है कि हम खाट के सहारे मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाते है। साथ ही गांव में शुद्ध पेयजल का भी अभाव है। इन्हीं मांगों को लेकर बस्तर कमिश्नर जी आर चुरेन्द्र समेत जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों से समस्या का समाधान करने ग्रामीणों ने गुहार लगाई है।

ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधि केवल वोट मांगने आते हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधि केवल वोट मांगने आते हैं।

यह है ग्रामीणों की मुख्य मांग
ग्रामीणों ने बताया कि, बेलर ग्राम पंचायत को जोड़ने वाली पतली पगडंडी में सड़क निर्माण, पेयजल, मनरेंगा भुगतान, स्ट्रीट लाइट, पेंशन प्रकरण में लापरवाही, ब्लॉक में शव वाहन, ब्लड बैंक व मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर बस्तर कमिश्नर,जिला पंचायत CEO व ,लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया गया है।

ग्रामीणों ने कहा- जनप्रतिनिधि मांगते हैं वोट, जितने के बाद नहीं देते ध्यान
बेलर गांव के ग्रामीणों ने कहा कि, लोहंडीगुड़ा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले जनप्रतिनिधि चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं। गांव में विकास की बयार बहाने के विभिन्न वादे भी करते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद आज तक हमारे पास हमारी समस्या जानने नहीं पहुंचे हैं। जनप्रतिनिधियों तक हम खुद पहुंचे हैं और उनको भी समस्याओं से अवगत करवाया है। फिर भी हमारी समस्याओं का हल आज तक नहीं निकला है।

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