शबाब पर 'चित्रकोट':ड्रोन कैम से देखिए विश्व प्रसिद्ध वाटर फॉल चित्रकोट का नजारा, इसे ऐसे ही एशिया का नियाग्रा नहीं कहा जाता

जगदलपुर5 महीने पहले
एशिया का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात की खूबसूरती बारिश के दिनों में और बढ़ गई है।

बारिश शुरू होने के साथ पूरी दुनिया में मशहूर चित्रकोट जल प्रपात की खूबसूरती बढ़ गई है। इसे एशिया का 'नियाग्रा फॉल' कहा जाता है। प्रकृति के अनुपम उपहार को निहारने के लिए अगस्त का महीना आते ही यहां पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी से बने जल प्रपात का नजारा देखने के लिए विदेशों से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। दैनिक भास्कर ने चित्रकोट जल प्रपात की सुंदरता को ड्रोन से शूट किया, ताकि पाठक यहां जाए बिना ही इसका आनंद ले सकें।

गर्मी के दिनों में पानी की सबसे कम लगभग 3 धाराएं तो बारिश के दिनों में 7 से ज्यादा धाराएं नीचे गिरती हैं।
गर्मी के दिनों में पानी की सबसे कम लगभग 3 धाराएं तो बारिश के दिनों में 7 से ज्यादा धाराएं नीचे गिरती हैं।

90 फीट की ऊंचाई से गिरता है पानी
जगदलपुर संभागीय मुख्यालय से महज 39 किमी की दूरी पर चित्रकोट जल प्रपात स्थित है। जानकार बताते हैं कि इस जल प्रपात का आकार घोड़े की नाल की तरह है। यहां इंद्रावती नदी का पानी 90 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। गर्मी के दिनों में पानी की सबसे कम लगभग 3 धाराएं और बारिश के दिनों में 7 से ज्यादा धाराएं नीचे गिरती हैं। अभी बारिश में पानी का रंग मटमैला हो गया है। यदि अन्य मौसम में देखें तो सफेद मोतियों की तरह पानी की बूंदें नीचे गिरती हुई नजर आती हैं।

जुलाई के अंतिम सप्ताह से पर्यटक यहां आने लगते हैं। जल प्रपात के आसपास गार्डन भी बनाया गया है।
जुलाई के अंतिम सप्ताह से पर्यटक यहां आने लगते हैं। जल प्रपात के आसपास गार्डन भी बनाया गया है।

पूरे साल शिवलिंग का होता है जलाभिषेक

चित्रकोट वाटर फॉल के नीचे एक छोटी सी गुफा में चट्टानों के बीच शिवलिंग स्थित है। जल प्रपात से नीचे गिरने वाले पानी से सालभर शिवलिंग का जलाभिषेक होता है। कहा जाता है कि नाविक यहां भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हैं। हालांकि, बारिश के दिनों में शिवलिंग तक पहुंचा नहीं जा सकता। गर्मियों में पर्यटकों के कहने पर ही नाविक शिवलिंग तक पर्यटकों को लेकर जाते हैं। इस जल प्रपात के नीचे शिवलिंग किसने और कब रखा इसकी अब तक किसी को कोई जानकारी नहीं है।

बारिश में पानी का रंग मटमैला तो सामान्य दिनों में सफेद दिखता है।
बारिश में पानी का रंग मटमैला तो सामान्य दिनों में सफेद दिखता है।

ऐसे पहुंच सकते हैं पर्यटक
चित्रकोट वाटर फॉल तक पहुंचना पर्यटकों के लिए काफी आसान है। राजधानी रायपुर से जगदलपुर व हैदराबाद से जगदलपुर तक हवाई सेवा भी शुरू हो चुकी है। इसके अलावा किरंदुल-विशाखापटनम रेल मार्ग से भी पर्यटक पहुंच सकते हैं। चित्रकोट वाटर फॉल तक सड़कों का भी जाल बिछा हुआ है। रायपुर, ओड़िशा, आंध्रप्रदेश से लेकर देश के किसी भी कोने से पर्यटक पहुंच सकते हैं। इन तीनों सेवाओं का लाभ लेने वाले पर्यटकों को पहले जगदलपुर संभागीय मुख्यालय आना पड़ता है, फिर वहां से सड़क मार्ग से होते हुए 39 किमी दूर स्थित जल प्रपात तक पहुंचा जा सकता है।

विशाखापट्टनम से युवाओं की 10 बाइक राइडर्स की टीम भी पहुंची। उन्होंने कहा कि अब तक केवल तस्वीरों में ही हमने जल प्रपात देखा था।
विशाखापट्टनम से युवाओं की 10 बाइक राइडर्स की टीम भी पहुंची। उन्होंने कहा कि अब तक केवल तस्वीरों में ही हमने जल प्रपात देखा था।

विदेशी पर्यटक बोले- अमेजिंग वाटर फॉल
एशिया का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट की खूबसूरती का आनंद लेने के लिए केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। बस्तर की हसीन वादियों का आनंद लेने विदेशी पर्यटक भी पहुंचे। उन्होंने चित्रकोट जल प्रपात की खूबसूरती देखते ही कहा- अमेजिंग वाटर फॉल। विशाखापट्टनम से 10 बाइक राइडर्स की टीम भी पहुंची। उन्होंने कहा कि अब तक केवल तस्वीरों में ही हमने जल प्रपात देखा था। आज सामने से देखने का मौका। बहुत खूबसूरत जल प्रपात है।

इस जलप्रपात की लोकप्रियता और यहां आने वाले पर्यटकों को देखते हुए प्रशासन ने इसके आसपास सौंदर्यीकरण भी कराया है।
इस जलप्रपात की लोकप्रियता और यहां आने वाले पर्यटकों को देखते हुए प्रशासन ने इसके आसपास सौंदर्यीकरण भी कराया है।

अगस्त से अक्टूबर तक रहती है पर्यटकों की भीड़
चित्रकोट जल प्रपात का आनंद लेने के लिए अगस्त से लेकर अक्टूबर तक का महीना काफी अच्छा होता है। बारिश के इसी महीने में जल प्रपात अपनी अलौकिक छटा बिखेरता हुआ नजर आता है। जुलाई के अंतिम सप्ताह से पर्यटक यहां आना शुरू हो जाते हैं। अभी अगस्त की शुरुआत हुई है कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी है। दूरदराज से पर्यटक पहुंच रहे हैं। कोरोना महामारी को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी यहां वालियंटर्स तैयार किए हैं। वालियंटर्स लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने व मास्क पहनने की समझाइश दे रहे हैं। जवानों की भी तैनाती की गई है।

बस्तर में आस्था का प्रतीक है इंद्रावती नदी
जिस इंद्रावती नदी का यह जलप्रपात है वह पूरे बस्तर के लिए श्रद्धा और आस्था का विषय है। ओडिशा के कालाहांडी से निकलने वाली यह नदी छत्तीसगढ़ के बस्तर में करीब 240 किलोमीटर तक बहती है। इसके बाद यह गोदावरी नदी में मिल जाती है। इंद्रावती के कारण ही बस्तर के सभी प्रमुख जिलों को पानी, सिंचाई की सुविधा मिलती है। इसका पौराणिक महत्व भी है और ऐसा कहा जाता है कि श्रीराम ने अपने वनवास के दिनों में इस नदी के किनारे समय बिताया था।

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