लापरवाही / प्लास्टिक कचरा नष्ट करने निगम के पास कोई योजना ही नहीं

Corporation has no plan to eliminate plastic waste
X
Corporation has no plan to eliminate plastic waste

  • फाइव स्टार रेटिंग का दावा करने वाला नगर निगम की मेहनत पर प्लास्टिक कचरे ने ही पानी फेरा, पर तैयार नहीं की

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

जगदलपुर. शहर में धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे पॉलीथिन की वजह से न केवल स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि नाले से तालाब तक को पॉलीथिन कचरे ने बर्बाद कर दिया है। इससे निपटने में नगर निगम पूरी तरह से लाचार दिखता है। 
जिस पॉलीथिन के कचरे के कारण इस साल नगर निगम को स्टार रेटिंग में जगह नहीं मिली उसी कचरे की समस्या से निपटने के लिए निगम के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक कोई योजना नहीं बना सका है। लापरवाही के चलते शहर की छोटी से लेकर बड़ी नालियां जहां इस कचरे के चलते जाम पड़ी हैं तो वहीं दूसरी ओर तालाब में भी इस कचरे को फेंका जा रहा है। ज्ञात हो कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017-18 में पूरे राज्य में पॉलीथिन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया था। सरकारी आदेश निकलने के बाद कुछ दिन तक तो छापामार-कार्रवाई चलती रही लेकिन फिर पुराने ढर्रे पर पॉलीथिन का प्रयोग खुलेआम होने लगा। निगम द्वारा कार्रवाई नहीं होने से न दुकानदारों में खौफ है और न लोग ही मान रहे हैं।
नई महापौर को कामकाज की जानकारी ही नहीं: नेता प्रतिपक्ष 
स्टार रेटिंग में कोई अंक नगर निगम को नहीं मिलने से नाराज निगम नेता प्रतिपक्ष संजय पांडे ने कहा कि पुराने महापौर जोड़ तोड़ में माहिर थे। जिसके चलते निगम को पिछले साल कामयाबी मिली थी लेकिन नई महापौर को निगम के कामकाज की जानकारी ही नहीं हैं। जिसका खामियाजा इस साल नगर निगम को भुगतना पड़ रहा है। विकास को लेकर कोई काम इन दिनों नहीं हो रहा है। प्लास्टिक के कचरे को नष्ट करने के लिए कई योजनाएं बनाई गईं जो केवल कागजों में ही सिमटकर रह गई है। अब तक न तो पूरे एसआरएलएम सेंटर बने हैं और न ही प्लास्टिक कचरे को नष्ट करने के लिए कोई उचित व्यवस्था की गई है।
प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन की मांग कम नहीं हर महीने 3 लाख से ज्यादा की पॉलीथिन बिकती है
कुम्हारपारा रोड स्थित कई दुकानदारों ने बताया कि भले ही पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगा हो, लेकिन इसकी खपत में कोई कमी नहीं आई है। लोग थैला लेकर नहीं आते। कई बार ग्राहकों को लौटाना पड़ता है, लेकिन व्यवसाय चलाने की मजबूरी में पॉलीथिन देना पड़ता है। हर माह करीब 3 लाख रुपए से अधिक पॉलीथिन की खपत है। गंगानगर वार्ड में रहने वाले लोगों ने बताया कि गर्मी के चलते तालाब में पानी कम हो रहा है। लोग घरों से निकलने वाले प्लास्टिक और अन्य कचरे को तालाब में डाल रहे हैं। तालाब का पानी गंदा होने और उसमें बदबू आने से निस्तार करने वाले लोगों की संख्या में कमी हो रही है। 40 माइक्रॉन से कम मोटाई की पॉलीथिन के उपयोग को प्रदूषण बोर्ड ने पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया है। कई जगहों पर डस्टबिन न होने के कारण लोग घर के कचरे को पॉलीथिन में भरकर नाली में डाल देते हैं जिससे कई जगह नालियां जाम हो गई हैं। 

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना