बस्तर दशहरा:डेरी गड़ाई की रस्म हुई पूरी, अब रथ बनाना शुरू

जगदलपुर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
सिरहासार भवन में डेरी गड़ाई विधान के दौरान मौजूद जनप्रतिनिधि। - Dainik Bhaskar
सिरहासार भवन में डेरी गड़ाई विधान के दौरान मौजूद जनप्रतिनिधि।
  • समिति के अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि और सदस्य रहे शामिल, बिरिंगपाल से लाई गई लकड़ियां

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की दूसरी और बेहद अहम मानी जाने वाली रस्म डेरी गड़ाई रविवार को सिरहासार भवन में पूरी की गई। इस दौरान माईं दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी सहित अन्य ने विधि-विधान के साथ पूजा विधान संपन्न करवाया।

रस्म को पूरा करने के लिए बिरिंगपाल से साल की टहनियां लाईं गईं। इसे सिरहासार भवन में खड़े बस्तर दशहरा के रथ निर्माण करने वाले कारीगरों के लिए आवास स्थल बनाया जाएगा। इसके साथ ही अब जंगलों से लकड़ियां लाने का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। इस दौरान बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष व सांसद दीपक बैज, क्षेत्रीय विधायक रेखचंद जैन, पूर्व बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव सहित मांझी-चालकी मौजूद थे।

ऐसे होती है बस्तर दशहरा में डेरी गड़ाई की रस्म

बस्तर दशहरा के तहत डेरी गड़ाई की रस्म पूरी करने साल की दो शाखायुक्त डेरी, यानि स्तंभनुमा लकड़ी, जो करीब 10 फीट ऊंची होती है इसे सिरहासार भवन में स्थापित किया जाता है। डेरी लाने का काम बिरिंगपाल के ग्रामीणों का होता है। इसके लिए दो गड्‌ढे किए जाते हैं, जहां जनप्रतिनिधि और दशहरा समिति के सदस्यों की मौजूदगी में पुजारी डेरी में हल्दी-कुमकुम, चंदन का लेप लगाकर दो सफेद कपड़ों से इसे बांधते हैं। बस्तर दशहरा पर्व निर्विघ्न रूप से संपन्न हो, यही कामना की जाती है।

खबरें और भी हैं...