बस्तर के 58 गांव के लोगों का रायपुर पैदल मार्च:नारायणपुर में शामिल होना चाहते हैं, अभी कांकेर जिले का हिस्सा, उसका मुख्यालय 150 KM दूर

जगदलपुर8 महीने पहले
ग्रामीणों ने अब तक 150 किमी का सफर तय कर लिया है।

छत्तीसगढ़ में कांकेर जिले के ग्रामीण पदयात्रा कर राजधानी रायपुर जा रहे हैं। 13 ग्राम पंचायत के 58 गांव के ग्रामीण अपने गांवों को नारायणपुर जिले में शामिल करने की मांग को पूरा करने राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात करेंगे। 3 दिन पहले नक्सलगढ़ कोलर से चले ग्रामीण 150 किमी की पदयात्रा कर रविवार को धमतरी पहुंच गए हैं। यहां से 80 से 90 किमी की दूरी और तय कर 2-3 दिन में रायपुर पहुंचेंगे। बताया जा रहा है कि पदयात्रा में शामिल हुए लगभग 300 ग्रामीण थक हारकर वापस भी लौट गए हैं।

कोलर इलाके में आराम करते ग्रामीण।
कोलर इलाके में आराम करते ग्रामीण।

पदयात्रा शुरू करने से पहले ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर 45 दिनों तक रावघाट मंदिर के पास धरने पर भी बैठे थे। लेकिन इनकी समस्याएं जानने के लिए कोई भी जिम्मेदार इन तक नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने कहा कि, सरकार हमारी नहीं सुन रही। इसलिए अपना दर्द अब राज्यपाल को बताएंगे। हाथों में तिरंगा, महात्मा गांधी की तस्वीर व लाठी लेकर ढाई हजार से ज्यादा ग्रामीण पदयात्रा जारी रखे हुए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि, जिस तरह से महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा निकाली थी। हम भी उसी तरह से शांतिपूर्वक रायपुर यात्रा निकाल रहे हैं। हमें उम्मीद है कि राज्यपाल हमारी जरूर सुनेंगी।

रविवार को धमतरी पहुंचे हैं ग्रामीण।
रविवार को धमतरी पहुंचे हैं ग्रामीण।

इस रूट से होकर पहुंचे धमतरी
कांकेर जिले के कोलर इलाके से चले ग्रामीण 30 किमी का सफर तय कर पहले अंतागढ़ पहुंचे। फिर यहां से 35 किमी का सफर तय कर भानुप्रतापपुर, कोरर, चारामा फिर यहां से 40 किलोमीटर का सफर तय कर धमतरी पहुंच गए हैं। सभी ग्रामीण लगभग 150 किमी की दूरी तय कर चुके हैं। पदयात्रा में निकले ग्रामीण अपने साथ राशन लेकर चल रहे हैं। जहां जगह मिल रही है वहां खाना बनाकर रात्रि विश्राम भी कर रहे हैं। ग्रामीणों को रोकने के लिए कांकेर के कलेक्टर चंदन कुमार व SP शलभ सिन्हा भी पहुंचे थे। ग्रामीणों ने किसी की नहीं सुनी और आगे बढ़ते गए।

ग्रामीण राशन साथ लेकर चल रहे हैं, जहां आराम कर रहे वहीं खाना बना रहे
ग्रामीण राशन साथ लेकर चल रहे हैं, जहां आराम कर रहे वहीं खाना बना रहे

150 किमी का करना पड़ता है सफर तय
58 गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि, हमें शासकीय कामों के लिए 150 किलोमीटर का सफर तय कर कांकेर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। आने-जाने में 1 से 2 दिन का समय लगता है। इस इलाके में पक्की सड़कें भी नहीं हैं। ऐसे में कई किमी पैदल सफर तय करते हैं। जबकि नारायणपुर जिला मुख्यालय की दूरी महज 20 किमी ही है। स्वास्थ्य सुविधाएं हो या फिर शिक्षा, नारायणपुर जिले से ही लेते हैं। लेकिन शासकीय कार्यों के लिए मजबूरन कांकेर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। यही वजह है कि 58 गांवों को नारायणपुर में शामिल करने की मांग की जा रही है।