बीजापुर में पुलिस कैंप और सड़क का विरोध:गंगालूर में दर्जनों गांव के सैकड़ों ग्रामीण जुटे, एडसमेटा कांड के दोषियों को सजा और मृतक आश्रितों को एक करोड़ देने की मांग

जगदलपुर4 महीने पहले
गंगालूर में पुलिस कैंप के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे हैं।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सड़क और पुलिस कैंप का विरोध करने सैकड़ों गांव के ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। इसके अलावा एडसमेटा कांड की न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे परिजन के सामने बताने व दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया। पिछले 2 दिनों से जिले के धुर नक्सल प्रभावित इलाके गंगालूर में ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि, एडसमेटा सहित बस्तर में हुए सभी नरसंहारों में मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ व घायलों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा सरकार दें, नहीं तो हम इसी तरह आंदोलन करते रहेंगे।

ग्रामीणों ने कहा है कि पुसनार, मनकेली में सुरक्षाबलों का कैंप व सीसी सड़क प्रस्तावित है। यदि यहां कैंप खुलता है और सड़क बनती है तो पुलिस गांव-गांव में घुसेगी। ग्रामीणों को परेशान करेगी। निर्दोष ग्रामीणों को नक्सली बता कर या तो उनकी हत्या करेगी या फिर गिरफ्तारी कर जेल में डाल देगी। ग्रामीणों ने कहा कि, हमें इलाके में सड़क व पुलिस कैंप दोनों नहीं चाहिए। यहां पुलिस कैंप व सड़क नहीं बनाने के लिए कई बार जिला प्रशासन से भी मांग की है, लेकिन हमारी कोई सुनवाई अब तक नहीं हुई है। ग्रामीणों ने अब छत्तीसगढ़ की राज्यपाल को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा है।

ग्रामीणों ने कहा कि हमें इलाके में सड़क व पुलिस कैंप दोनों नहीं चाहिए।
ग्रामीणों ने कहा कि हमें इलाके में सड़क व पुलिस कैंप दोनों नहीं चाहिए।

राशन व बर्तन लेकर पहुंचे हैं ग्रामीण
गंगालूर में आंदोलन में शामिल होने के लिए पुसनार, मनकेली, गांगलूर सहित आस-पास के दर्जनों गांव के सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे हैं। इन्होंने नारेबाजी के साथ रैली भी निकाली है। ग्रामीण अपने साथ राशन सामग्री और बर्तन भी लेकर आए हैं। बताया जा रहा है कि, सिलगेर की तरह अब गांगलूर में भी ग्रामीण मांगे पूरी नहीं होने तक डेरा डालने के इरादे में हैं। रविवार को भी ग्रामीणों का आंदोलन जारी है।

पुसनार, मनकेली, गांगलूर सहित आस-पास के दर्जनों गांव के सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे हैं।
पुसनार, मनकेली, गांगलूर सहित आस-पास के दर्जनों गांव के सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे हैं।

यह है ग्रामीणों की मांग

  • जिले के पुसनार में नया पुलिस कैंप खोलना प्रस्तावित है, इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए।
  • बैलाडीला की खदान लूटने पुसनार में सीसी सड़क का निर्माण करवाया जा रहा है जिसे तुरंत बंद किया जाए।
  • आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन को हड़पना बंद करें।
  • निर्दोष आदिवासी, बुजुर्गों महिलाओं व छात्र-छात्राओं को अत्याचार मारपीट कर जेल में डालना व उनकी हत्या करना बंद करें।
  • पुसनार में काराम जीलो की बहन को पुलिस ने जबरदस्ती गांगलूर से बीजापुर अस्पताल भेजकर काराम मंगली को टीआई पवन वर्मा के द्वारा जहर का इंजेक्शन लगाकर हत्या किया गया है। इसकी तुरंत न्यायिक जांच की जाए।
  • चेरपाल के पोटाकेबिन में पढ़ने वाले छात्रों को नक्सली बताकर पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

एडसमेटा कांड क्या है?
वाक्या साल 2013 का है। बस्तर के नक्सल प्रभावित एडसमेटा गांव के पास सुरक्षा बलों की गोलीबारी में तीन बच्चों और सहित 11 ग्रामीणों की जान चली गई थी। CRPF कोबरा बटालियन का एक जवान भी शहीद हुआ। पुलिस ने इसे नक्सली मुठभेड़ बताया। ग्रामीणों का आरोप था, वे गांव की देवगुडी में बीज पंडुम मनाने के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान फोर्स वहां पहुंची और गोली चला दी। तत्कालीन सरकार ने इसकी जांच लिए न्यायिक आयोग का गठन किया। जांच प्रक्रिया 6 महीने में पूरी होनी थी, लेकिन इसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा। बाद में इसकी CBI जांच भी हुई।

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