बस्तर दशहरा:जोगी उठाई और मावली परघाव में उमड़े लोग, माईजी का हुआ स्वागत

जगदलपुरएक महीने पहले
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गुरुवार को पूजा विधान पूरा करने के दौरान मौजूद भीड़। - Dainik Bhaskar
गुरुवार को पूजा विधान पूरा करने के दौरान मौजूद भीड़।
  • शाम को हुए दोनों पूजा विधान, दंतेवाड़ा से पहुंची माईजी की डोली, गीदम रोड से दंतेश्वरी मंदिर तक लगी रही लोगों की भीड़

बस्तर दशहरा का सबसे महत्वपूर्ण रस्म मावली परघाव पूजा विधान गुरुवार को पूरा हुआ। दंतेवाड़ा से माता की डोली बुधवार की मध्यरात्रि जगदलपुर स्थित जियाडेरा पहुंचीं। इसके बाद गुरुवार को मावली परघाव पूजा विधान के लिए शाम को जियाडेरा से डोली को दंतेश्वरी मंदिर के लिए निकाली गई।

रात में जैसे ही माता की डोली ने शहर में प्रवेश किया तो इसका भव्य स्वागत किया गया। दंतेवाड़ा से आई मांईजी की डोली को पैलेस रोड स्थित कुटरुबाड़ा के पास लाकर मावली परघाव की रस्म पूरी की गई। जगह-जगह डोली पर फूल बरसाए गए। हर समाज के लोग पहुंचे थे। इससे पहले गुरुवार शाम को सिरहासार भवन में जोगी उठाई की रस्म पूरी की गई जिसमें 9 दिनों से निराहार रहकर तपस्या कर रहे जोगी को उठाकर माता को परघाने लाया गया।

आज होगी भीतर रैनी, विजय रथ भी चलेगा
बस्तर दशहरा की एक महत्वपूर्ण रस्म शुक्रवार को भी पूरी की जाएगी। इस रस्म को भीतर रैनी रस्म कहा जाता है। इस रस्म में आठ पहियों वाले विजय रथ की परिक्रमा संपन्न करवाई जाएगी।

100 से अधिक देवी-देवता भी पहुंचे
मावली परघाव में बस्तर के संभाग 100 से अधिक देवी-देवता भी पहुंचे थे। हजारों लोगों की भीड़ भी यहां माता के स्वागत के लिए पहुंची। माता का परघाने दंतेश्वरी माई के प्रधान पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी, राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंज देव, राजगुरू नवीन ठाकु, जनप्रतिनिधी, बस्तर दशहरा कमेटी के पदाधिकारी पहुंचे थे। कुटरुबाड़ा के सामने अस्थायी मंच पर माता को परघाते स्वागत किया। माता की डोली जैसे ही पैलेस रोड पहुंची, फूलों की बारिश की गई। फूलों की बारिश और आतिशबाजी के साथ माता की डोली का स्वागत किया।

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