नक्सलगढ़ की महिलाओं ने सिले 12 करोड़ के कपड़े:बेंगलुरु, दिल्ली से लेकर देश के तमाम शहरों तक भेजे जा रहे डैनेक्स ब्रांड के शर्ट्स, दो और फैक्ट्री खोलने की तैयारी

जगदलपुर8 महीने पहले
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दंतेवाड़ा जिले की डैनेक्स नवा ग - Dainik Bhaskar
दंतेवाड़ा जिले की डैनेक्स नवा ग

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की डैनेक्स नवा गारमेंट फैक्ट्री की महिलाओं ने महज 6 महीने में ही 1.97 लाख से ज्यादा शर्ट्स सिले हैं। 12 करोड़ रुपए के इन कपड़ो को बेंगलुरु, दिल्ली सहित अन्य बड़े शहरों में भी भेजा जा चुका है। नक्सल प्रभावित इलाके की महिलाओं के सिले इन कपड़ों की डिमांड भी अब बढ़ने लगी है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक डैनेक्स के कपड़े भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं महिलाएं दंतेवाड़ा के DRG जवानों की वर्दी सिलने का भी काम कर रही हैं।

इन कपड़ो को बेंगलुरु, दिल्ली सहित अन्य बड़े शहरों में भी भेजा जा चुका है।
इन कपड़ो को बेंगलुरु, दिल्ली सहित अन्य बड़े शहरों में भी भेजा जा चुका है।

8 महीने पहले नक्सल प्रभावित इलाके की महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रशासन ने नवा गारमेंट फैक्ट्री की स्थापना की थी। यहां जिले के अलग-अलग इलाके की महिलाओं को सिलाई की ट्रेनिंग दी गई। जब महिलाएं इस काम मे माहिर हुईं तो प्रशासन ने ट्रायफेड के साथ MOU किया। साथ ही बेंगलुरु की एक अन्य कंपनी के साथ भी टाईअप किया गया है। पिछले 6 महीने में महिलाओं ने 6 बार कपड़ो का लॉट बेंगलुरु भेजा है।

बारसूर में खुली फैक्ट्री, अब कटेकल्याण में भी होगी शुरू
जनवरी माह में दंतेवाड़ा जिले के हारम ग्राम पंचायत में डैनेक्स नवा गारमेंट फैक्ट्री खोली गई थी। यहां लगभग 200 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दिया गया है। महिलाएं महीने का 8 से 9 हजार रुपए भी कमा रही हैं। बारसूर में भी प्रशासन ने फैक्ट्री खोल दी है। इस फैक्ट्री में भी नक्सलगढ़ इंद्रावती नदी पार के गांवों से भी महिलाएं पहुंच रही हैं। हालांकि अभी यहां 100 से ज्यादा महिलाओं को सिलाई में माहिर किया जा रहा है।

इधर जिले के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित कटेकल्याण इलाके में भी फैक्ट्री खोलने की प्रशासन तैयारी कर रहा है। कुछ दिनों में यहां भी फैक्ट्री खोल दी जाएगी। साथ ही बचेली में भी फैक्ट्री खोलने जगह का चयन किया जा चुका है। इन दोनों जगहों में 500 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा। कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि, दंतेवाड़ा को कपड़ा फैक्ट्री का हब बनाया जा रहा है। फैक्ट्री से गरीब व जरुतमंद परिवारों को लाभ मिल रहा है और अधिक परिवारों को रोजगार देकर उन्हें लाभान्वित करने का प्रयास किया जा रहा है।

महिलाएं बोलीं- बन रहे आत्मनिर्भर
डैनेक्स नवा गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाओं ने कहा कि, यहां बेहतर माहौल के बीच हम सभी काम कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। काफी अच्छा लग रहा। सबसे बड़ी खुशी तब है कि हमने जो कपड़े सिले हैं वो देशभर में भेजे जाते हैं। हम सभी सशक्त हैं।

इतने कपड़े भेजे गए हैं

  • 25 अप्रैल को 1.65 करोड़ के 27500 शर्ट्स की पहली खेप बेंगलुरु भेजी गई।
  • 25 मई को 1 करोड़ के 16500 रेडीमेड कपड़ों की खेप को बेंगलुरु भेजा गया।
  • 20 जून को 1 करोड़ की 20000 शर्ट्स को CM भूपेश बघेल ने हरी झंडी दिखाकर बेंगलुरु व दिल्ली लिए रवाना किया।
  • 26 जून को करीब 1 करोड़ की 13000 रेडीमेड कपड़ों को भेजा गया।
  • 3 करोड़ की 50000 शर्ट्स को 31 जुलाई को कलेक्टर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
  • 4 करोड़ रुपए के 70 हजार शर्ट को 15 सितंबर को बैंगलोर भेजा गया।
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