अभियान:आंगनबाड़ी केंद्रों में आने लगे 70 फीसदी से अधिक बच्चे, गर्म भोजन दे रहे पर अंडा-दूध नहीं मिल रहा

जगदलपुर3 महीने पहले
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जगदलपुर। आंगनबाड़ी केंद्र में गर्म खाना खाती गर्भवती महिलाएं। - Dainik Bhaskar
जगदलपुर। आंगनबाड़ी केंद्र में गर्म खाना खाती गर्भवती महिलाएं।
  • 1981 आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंच रहे 50 हजार से अधिक बच्चे, गर्म भोजन मिल रहा

कोरोना संक्रमण के बीच मरीजांे की संख्या के कम होने का असर इन दिनों आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन पर भी दिखाई दे रहा है। जहां कुछ दिन पहले केंद्रों कें पहुंचने वाले बच्चों की संख्या काफी कम थी तो वहीं इन दिनों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की मेहनत से करीब 70 फीसदी बच्चे केंद्र में पहुंच रहे हैं। यहां पर वे पढ़ाई करने के साथ ही गर्म भोजन खा रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और सहायिकाएं खुद काेरोना की जांच कराकर केंद्राें का संचालन कर रही हैं।

जानकारी के मुताबिक बस्तर जिले में 1981 आंगनबाड़ी केंद्रों हैं। जहां पर करीब 80 हजार बच्चे आते थे। काेरोना के कारण ये केंद्र बंद पड़े थे। लेकिन 23 जुलाई से इन केंद्रों का संचालन शुरू कर दिया गया है। जिसमेें अधिकतर केंद्राें में दर्ज संख्या करीब 65-70 फीसदी बच्चे आ रहे हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी अवनि बिश्वाल ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में हर दिन बच्चों की संख्या बढ़ रही है। इस समय करीब 70 फीसदी बच्चे केंद्रों में आ रहे हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को इन केंद्रों में भोजन खिलाया जा रहा है। बच्चों के पालक जागरूकता का परिचय देते हुए अपने बच्चें को आंगनबाड़ी केंद्रों में भेज रहे हैं। जिसका फायदा महिला बाल विकास विभाग और बच्चों का हो रहा है।

अधिकतर कार्यकर्ताओं की ड्यूटी टीकाकरण में
आंगनबाड़ी केंद्राें के संचालन में कार्यकर्ता और सहायिका का सबसे अधिक योगदान है। लेकिन इस समय अधिकतर केंद्राें की कार्यकर्ताओं की ड्यूटी कोरोना टीकाकरण अभियान में लगी हुई है। जिसके चलते सहायिकाओं को केंद्रों के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। इसके बावजूद बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुचारू रूप से गर्म भोजन खिलाया जा रहा है।

वजन त्योहार के आंकड़े अब तक जारी नहीं
कुपोषित बच्चों की सही संख्या का पता लगाने के लिए महिला बाल विकास विभाग ने 7 जुलाई से 16 जुलाई तक वजन त्यौहार मनाया गया था। लेकिन अब तक इस त्यौहार को लेकर आंकड़े विभाग इकट्ठा नहीं कर पाया है। इस काम में हो रही देरी को लेकर जब कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर में कुछ तकनीकी खराबी के चलते यह काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

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