बस्तर दशहरा में 6 अक्टूबर को काछनगादी विधान:13 साल की अनुराधा पूरी करेगी रस्म, व्रत रखना शुरू किया; समिति ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दिया निमंत्रण

जगदलपुर8 महीने पहले
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बस्तर दशहरा में शामिल होने दीपक बैज सहित मांझी व चालाकी ने CM भूपेश बघेल को आमंत्रण दिया है। - Dainik Bhaskar
बस्तर दशहरा में शामिल होने दीपक बैज सहित मांझी व चालाकी ने CM भूपेश बघेल को आमंत्रण दिया है।

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में शामिल होने सांसद व दशहरा समिति के अध्यक्ष दीपक बैज सहित मांझी व चालकी ने CM भूपेश बघेल को आमंत्रण दिया है। साथ ही 70 दिनों तक चलने वाले इस दशहरा में होने वाली सभी रस्मों के बारे में जानकारी भी दी है। सांसद दीपक बैज ने CM को बताया कि 6 से 19 अक्टूबर तक अब रोज कई तरह की रस्म अदा की जाएगी। सालों से चली आ रही परंपरा को करीब से देखने CM को बस्तर बुलाया गया है। वहीं CM ने भी समिति को आश्वासन दिया है कि वे रस्मों में जरूर शामिल होंगे।

इधर 6 अक्टूबर को काछनगादी की रस्म अदा की जाएगी। बताया जाता है कि बस्तर दशहरा की यह सबसे महत्वपूर्ण रस्म है। लगभग 600 सालों से मनाए जा रहे बस्तर दशहरा विधान में बड़े मारेंगा की रहने वाली 13 साल की अनुराधा छठवीं बार इस विधान को पूरा करेंगी। विधान को पूरा करने के लिए अनुराधा ने व्रत रखना शुरू कर दिया है। परंपरा अनुसार 6 अक्टूबर को बेल के कांटों पर झूला झूल कर दशहरा में रथ संचालन की अनुमति देंगी। इस विधान को पूरा करने के लिए अनुराधा को किसी तरह की कोई परेशानी न हो इसके लिए 2 गुरु माताएं उसे अभी से तैयार कर रही हैं।

इस बार 4 पहिए वाला रथ बनाने कारीगर जुट गए हैं।
इस बार 4 पहिए वाला रथ बनाने कारीगर जुट गए हैं।

इस बार बन रहा 4 पहिए वाला रथ
बस्तर दशहरा में हर साल अलग-अलग प्रकार से रथ का निर्माण किया जाता है। लगभग 600 सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार 4 और 8 पहिए वाला रथ बनाया जाता है। लेकिन इस बार 4 पहिए वाला रथ बनाने कारीगर जुट गए हैं। इनमें प्रत्येक पहिए की ऊंचाई 96 अंगुल होती है। रथ बनाने वाले कारीगर परंपरा अनुसार उंगलियों से नापकर पहिया बनाते हैं। पहिए के मध्य गुर्दा लगाने से पहले 14 अंगुल वृत्ताकार छेद किया जाता है। बाद में लोहे की गोल प्लेट को गर्म कर गुर्दा लगाया जाता है।

बस्तर दशहरा में हर साल अलग-अलग प्रकार से रथ का निर्माण किया जाता है।
बस्तर दशहरा में हर साल अलग-अलग प्रकार से रथ का निर्माण किया जाता है।

कोरोना के चलते इस बार भी नहीं जुटेगी भीड़
लगभग 70 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा को देखने केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश और विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए यह दूसरा साल है कि पर्यटकों को आने की अनुमति प्रशासन ने नहीं दी है। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए इस बार भी परंपरा अनुसार बस्तर दशहरा व मंदिर समिति, पुजारी व प्रशासन के द्वारा ही सारी परंपरा को पूरा किया जाएगा।

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