बारूद के ढेर पर हौसले की राह:18 किमी की सड़क पर डेढ़ सौ IED, 500 स्पाइक्स होल मिले, जवान ने शहादत दी; 14 साल बाद नक्सल मुक्त हुआ अरनपुर से जगरगुंडा का सफर

जगदलपुर/दंतेवाड़ाएक वर्ष पहले
माओवादियों की उपराजधानी कहे जाने वाले इलाके जगरगुंडा में सड़क निर्माण का काम चल रहा है। यह कोई आम सड़क नहीं बल्कि माओगढ़ में विकास की सड़क है।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों की राजधानी कहा जाने वाला जगरगुंडा इलाका। यहां दंतेवाड़ा सहित बीजापुर और सुकमा को जोड़ने वाला अरनपुर से जगरगुंडा मार्ग 14 साल बाद फिर सफर के लिए तैयार है। महज 18 किमी लंबी इस सड़क को बनाने के लिए 150 IED, 500 स्पाइक्स होल हटाए गए। सुरक्षाबलों के 4 कैंप लगे, CRPF 231वीं बटालियन के 500 जवानों ने सुरक्षा दी और एक जवान की शहादत हो गई। अब महज 5 किमी सड़क का निर्माण कार्य बाकी रह गया है। इसके बाद हौसले से बनी विकास की राह आसान होगी।

डॉग स्क्वायड की टीम के साथ रोजाना 500 से ज्यादा जवान सड़क निर्माण की सुरक्षा में निकलते हैं। यहां नक्सलियों के द्वारा लगाई IED की चपेट में आने से एक जवान शहीद व दो जवान घायल भी हुए है।
डॉग स्क्वायड की टीम के साथ रोजाना 500 से ज्यादा जवान सड़क निर्माण की सुरक्षा में निकलते हैं। यहां नक्सलियों के द्वारा लगाई IED की चपेट में आने से एक जवान शहीद व दो जवान घायल भी हुए है।

तीन जिलों का सेंटर पॉइंट है जगरगुंडा
जगरगुंडा दक्षिण बस्तर के तीन जिले दंतेवाड़ा, बीजापुर व सुकमा का सेंटर पॉइंट है। जगरगुंडा तक पहुंचने के लिए तीनों जिले से सड़कें बन रही हैं। सैकड़ों जवानों की तैनाती के बीच सड़क निर्माण का काम चल रहा। सड़क निर्माण का काम पूरा होने से ये तीनों जिले एक दूसरे से इस इलाके से जुड़ जाएंगे। अभी दंतेवाड़ा की ओर से कोंडासांवली व कमारगुड़ा के बीच सड़क निर्माण का काम चल रहा है। जगरगुंडा तक बन रही यह कोई आम सड़क नहीं, बल्कि माओवाद का सीना चीरती हुई विकास की सड़क है।

2 दशक पहले व्यापारियों का गढ़ था, लेकिन अब है माओगढ़
आज से लगभग 2 दशक पहले जगरगुंडा व्यापारियों से गुलजार हुआ करता था। इसे इमली व अमचूर का हब कहा जाता था। बड़े पैमाने पर व्यापारी यहां से इमली व आमचूर की खरीदी करते थे। इसलिए इस इलाके को व्यापारियों का गढ़ कहा जाता था। धीरे-धीरे माओवादियों ने इस इलाके में अपनी पैठ जमाई और इसे अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद से अब इस इलाके की पहचान माओगढ़ के रूप में होने लगी। इसे नक्सली कमांडर हिड़मा का इलाका भी कहा जाता है।

घने जंगल, 10 से ज्यादा मोड़ और लगभग 700 फीट नीचे पहाड़ को काटना पड़ा। तब कहीं जाकर यह सड़क बनी है।
घने जंगल, 10 से ज्यादा मोड़ और लगभग 700 फीट नीचे पहाड़ को काटना पड़ा। तब कहीं जाकर यह सड़क बनी है।

4 कैम्प व 500 से ज्यादा जवानों की सुरक्षा के बीच बन रही सड़क
दंतेवाड़ा से जगरगुंडा तक सड़क निर्माण का काम शुरू करवाने से पहले यहां CRPF 231 बटालियन का 4 कैम्प स्थापित किया गया और 500 से ज्यादा जवानों की तैनाती की गई थी। इन्हीं की सुरक्षा में सड़क कोंडासांवली तक बनी है और अब आगे भी बन रही है। यहां कोंडापारा से कोंडासांवली के बीच करीब 5 किमी सड़क बनाना सबसे ज्यादा चुनौती भरा था। क्योंकि ये पेच सबसे ज्यादा खतरनाक है। घने जंगल, 10 से से ज्यादा मोड़ और करीब 700 फीट नीचे तक पहाड़ को काटना पड़ा था।

150 IED व 500 से ज्यादा स्पाइक्स बरामद
इस इलाके में सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा बलों ने अब तक 150 से ज्यादा IED और 500 से ज्यादा स्पाइक्स भी बरामद किए हैं। साथ ही माओवादियों द्वारा लगाई गई IED की चपेट में आने से एक जवान शहीद व 2 जवान घायल भी हुए। इतना ही नहीं नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के कैंप पर कई बार हमला भी किया है। इसका जवानों ने मुंह तोड़ जवाब भी दिया।

अभी कोंडासांवली और कमारगुड़ा के बीच काम चल रहा है। जल्द ही सड़क निर्माण का काम पूरा कर लिया जाएगा। जिससे ग्रामीणों को राहत मिलेगी। इस सड़क के बनने से जगरगुंडा व दंतेवाड़ा जुड़ जाएगा।
अभी कोंडासांवली और कमारगुड़ा के बीच काम चल रहा है। जल्द ही सड़क निर्माण का काम पूरा कर लिया जाएगा। जिससे ग्रामीणों को राहत मिलेगी। इस सड़क के बनने से जगरगुंडा व दंतेवाड़ा जुड़ जाएगा।

अफसर बोले- होगा विकास
दंतेवाड़ा एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने कहा कि इस सड़क के बनने से जगरगुंडा व दंतेवाड़ा जुड़ जाएगा। इलाके का विकास होगा व नक्सलवाद का खात्मा भी करेंगे। CRPF 231 बटालियन के सीओ सुरेंदर सिंह ने कहा कि CRPF क्षेत्र के विकास व ग्रामीणों की मदद के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है। इस सड़क निर्माण में दखल देने, जवानों को नुकसान पहुंचाने की नक्सली कई बार कोशिश कर चुके हैं। लेकिन हमारे जवानों ने नक्सलियों के मंसूबों को नाकाम किया है और आगे भी करते रहेंगे। जगरगुंडा सीधे दंतेवाड़ा से जुड़ेगा।

चुनौती से कम नहीं इस सड़क का निर्माण कार्य
PWD के EE जोसेफ थॉमस कहते हैं कि अरनपुर से जगरगुंडा तक 18 किमी सड़क निर्माण करना किसी चुनौती से कम नहीं है। हालांकि अभी जगरगुंडा को जोड़ने 5 किमी की सड़क बनानी बची है। 2004 में प्रशासन ने अरनपुर से जगरगुंडा तक मुरुम की सड़क बनाई थी। इसी मार्ग से चुनाव के समय वाहनों की आवाजाही भी होती थी। लेकिन धीरे-धीरे इस इलाके को नक्सलियों ने अपने कब्जे में पूरी तरह ले लिया और सड़क को सैकड़ों जगहों से काट कर मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया था।

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