नक्सली दहशत में बंद कड़ियामेटा का बाजार खुला:5 जिलों की सरहद में हर शनिवार लगने वाला हाट सालों से नहीं लगा था, अब पुलिस पहरे में लगेगा बाजार

जगदलपुर/ नारायणपुर9 महीने पहले
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पहले दिन पहुंचे व्यापारियों ने सब्जी की दुकान भी लगाई। - Dainik Bhaskar
पहले दिन पहुंचे व्यापारियों ने सब्जी की दुकान भी लगाई।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अंदरूनी नक्सलगढ़ गांवों में पुलिस का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसका फायदा अब ग्रामीणों को मिल रहा है। 5 जिलों के सेंटर पॉइंट नक्सल प्रभावित गांव कड़ियामेटा का साप्ताहिक बाजार कई सालों से बंद पड़ा हुआ था। जिसे पुलिस ने वापस शुरू करवाया है। हालांकि बाजार खुलने के पहले दिन कुछ ही व्यापारी पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि अब हर शनिवार को भारी सुरक्षा के बीच कड़ियामेटा का साप्ताहिक बाजार भरेगा। जिसका फायदा इलाके के लोगों को मिलेगा।

अब ग्रामीणों और व्यापारियों को दूसरे गांव नहीं जाना पड़ेगा।
अब ग्रामीणों और व्यापारियों को दूसरे गांव नहीं जाना पड़ेगा।

दरअसल, कड़ियामेटा गांव दंतेवाडा, बीजापुर, कोण्डागांव, जगदलपुर और नारायणपुर जिले का बॉर्डर है। यह इलाका पूरी तरह से नक्सलियों का गढ़ है। आए दिन नक्सली इलाके में जमकर तांडव मचाया करते हैं। इलाके को नक्सल मुक्त करने के लिए यहां सुरक्षाबलों का कैंप भी स्थापित किया गया है। जिससे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इन इलाकों में अब सड़क निर्माण का काम भी किया जा रहा है। नारायणपुर SP गिरिजा शंकर जायसवाल ने बताया कि, ग्रामीणों का पुलिस पर विश्वास बढ़ा है।

पहले दिन पहुंचे थे कुछ व्यापारी।
पहले दिन पहुंचे थे कुछ व्यापारी।

इन इलाकों की बड़ी आबादी को मिलेगा फायदा
कड़ियामेटा में बाजार भरने से बेचा, ईरपानार, आदेर, किलम, टेटम सहित अबुझमाड़ (नारायणपुर) और दंतेवाडा, बीजापुर, कोण्डागांव व जगदलपुर जिला के लगभग 15 से अधिक गांव के हजारों लोगों फायदा मिलेगा। यहां बाजार नहीं लगने से इलाके के ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर दूसरे गांव या नजदीक के दूसरे जिले के गांव में जाना पड़ता था। ऐसे में ग्रामीणों को ज्यादा समय और पैसे लगते थे।

अब इसी जगह भरेगा बाजार।
अब इसी जगह भरेगा बाजार।

पहले भी बन चुकी है बाजार खोलने की कार्ययोजना
कड़ियामेटा गांव नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जहां पहले भी ग्रामीणों ने बाजार लगाने की कार्ययोजना बनाई थी। लेकिन नक्सलियों ने बाजार का विरोध कर दिया था। साल 2020 में ही यहां पुलिस कैंप स्थापित किया गया। जिसके बाद धीरे-धीरे जवान इलाके में अपनी पैठ जमाना शुरू कर दिए। ग्रामीणों ने पुलिस और जिला प्रशासन को बाजार खुलवाने के लिए आवेदन दिया था।