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किसी सीसी मेंबर के बेटे का पहला सरेंडर:नक्सली रंजीत का सरेंडर, पिता रमन्ना की मौत के बाद नक्सल संगठन में नहीं मिल रहा था सम्मान

जगदलपुर19 दिन पहले
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श्रीकांत उर्फ रंजीत।(फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
श्रीकांत उर्फ रंजीत।(फाइल फोटो)
  • नक्सली लीडर रमन्ना और सावित्री के बेटे रंजीत ने तेलंगाना में किया आत्मसमर्पण
  • रंजीत का पिता रमन्ना था नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का मेंबर, मां सावित्री अब भी संगठन में शामिल

नक्सलियों के सीसी मेंबर रमन्ना और किस्टारम एरिया कमेटी की प्रभारी सावित्री के बेटे रावुला रंजीत उर्फ श्रीकांत ने बुधवार को तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। सरेंडर के पीछे की वजह संगठन में उसे पर्याप्त सम्मान नहीं मिलने और पिता की मौत के बाद खुद को बड़ा पद दिए जाने की मांग को ठुकारये जाने को बताया जा रहा है।

खबर है कि सीसी मेंबर रमन्ना की मौत 2019 में हो गई थी। जब तक रमन्ना जिंदा था तब तक श्रीकांत की पकड़ नक्सल संगठन में मजबूत थी और कई हमलों में उससे रायशुमारी भी की जाती थी लेकिन पिता की मौत के बाद से उसे तव्वजो नहीं दी जा रही थी। उसकी मां किस्टारम एरिया कमेटी की प्रभारी सावित्री है उसका प्रमोशन भी संगठन में नहीं हो पाया।

बताया जा रहा है कि रंजीत चाहता था कि उसके पिता की मौत के बाद संगठन में उसे पिता की जगह दी जाए लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और उसने सरेंडर कर दिया है। रंजीत उर्फ श्रीकांत ने सरेंडर करने के दौरान माना कि वह खुद संगठन में आपमानित महसूस कर रहा था और तेलंगाना की सरेंडर नीति भी उसे प्रभावित कर रही थी। ऐसे में उसने सरेंडर कर दिया। उसने पुलिस को बताया कि संगठन वालों ने सरेंडर की अनुमति नहीं दी थी।

मां ने सरेंडर करने से मना कर दिया

इधर श्रीकांत की मां मादिवी सावित्री अभी नक्सलियों के साथ है और वहां किस्टारम एरिया कमेटी के प्रभारी की भूमिका निभा रही है। माना जा रहा है श्रीकांत ने सरेंडर से पहले अपनी मां को भी अपने साथ लाने के प्रयास किये थे लेकिन उसने मना कर दिया। ऐसे में श्रीकांत ने अकेले ही सरेंडर किया।

नक्सलियों के बीच 1998 में जन्म, जनताना स्कूल में की प्रारंभिक शिक्षा फिर निजामाबाद में 10वीं की पढ़ाई

रंजीत का जन्म वर्ष 1998 में बस्तर के जंगलों में हुआ। बचपन से ही बंदूक की बैरल से नई लोकतांत्रिक क्रांति (एनडीआर) की स्थापना के उद्देश्य से क्रांतिकारी विचारधारा और राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बारे में सिखाया गया था। उसने दक्षिण बस्तर के भाकपा (माओवादी) जनताना स्कूल में पहली से छठवीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद गुप्त रूप से उसका दाखिला निजामाबाद के काकतीय स्कूल में करा दिया, जहां उन्होंने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की। अप्रैल 2015 से नवंबर 2017 तक अपने पिता के साथ सीपीआई (माओवादी) की विचारधारा के प्रचार में लगा रहा। बटालियन में शामिल होने के लिए अपने पिता की सलाह पर वह नवंबर 2017 में भाकपा (माओवादी) बटालियन में शामिल हुआ और पार्टी सदस्य के रूप में पहली कंपनी की दूसरी प्लाटून में काम किया। नवंबर 2019 में पदोन्नत किया गया।

इन बड़े हमलों में शामिल रहा नक्सली रंजीत

2018 में कासाराम हमला जिसमें 9 सुरक्षाबल के जवान शहीद हुए, जब माओवादियों ने माइन-प्रूफ वाहन उड़ा दिया था। 2020 में एर्रम हमला, 2020 में मिनपा हमला जिसमें 23 सुरक्षाकर्मियों और 3 नक्सलियों की मौत हो गई। नक्सली 12 एके -47 और 2 इंसास राइफलें ले गए। अप्रैल 2021 में एक हमले में भाग लिया, जिसमें 26 जवान शहीद, 6 नक्सली मारे गए. नक्सली 14 हथियार ले गए थे।

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