• Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Raipur
  • Jagdalpur
  • Naxalite, Who Once Taught The Lessons Of Maoism To Children By Living In A Naxalite Organization, After Surrender, The Future Of The Children Is Preserved, Every Day Takes 2 Hours Of Class

एक टीचर ऐसा भी:कभी नक्सल संगठन में रह कर बच्चों को माओवाद का पाठ पढ़ाने वाला नक्सली, सरेंडर के बाद बच्चों का संवार रहा भविष्य; हर रोज 2 घंटे लेता है क्लास

जगदलपुर/दंतेवाड़ा4 महीने पहलेलेखक: लोकेश शर्मा
  • कॉपी लिंक
हार्डकोर नक्सली दुर्गेश अब सरेंडर करने के बाद समर्पण कर चुके नक्सलियों के बच्चों को पढ़ाता है। - Dainik Bhaskar
हार्डकोर नक्सली दुर्गेश अब सरेंडर करने के बाद समर्पण कर चुके नक्सलियों के बच्चों को पढ़ाता है।

बस्तर के माओवाद संगठन में रह कर कभी मासूमों को नक्सलवाद का पाठ पढ़ाने वाला नक्सली अब सरेंडर के बाद बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहा है। सरेंडर नक्सली दुर्गेश दंतेवाड़ा के शांति कुंज में रहने वाले 10 बच्चों की रोज शाम 2 घंटे क्लास लेता है। उन्हें अ से अनार से लेकर ABCD लिखना और पढ़ना सिखाता है। कभी संगठन में रहकर बच्चों को हथियार चलाने से लेकर एंबुश में जवानों को फंसाने की शिक्षा देने वाला हार्डकोर नक्सली दुर्गेश अब सरेंडर के बाद बच्चों का भविष्य संवारने का काम कर रहा है।

सरेंडर नक्सली अब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहा है।
सरेंडर नक्सली अब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहा है।

दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन में स्थित शांति कुंज में एक दर्जन से ज्यादा सरेंडर नक्सलियों का परिवार निवासरत है। वहीं सरेंडर नक्सलियों के बच्चे पास के ही स्कूल में पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। इधर, दुर्गेश सरेंडर करने के बाद DRG में भी शामिल हो गया है। दिनभर ड्यूटी के बाद जब शाम को घर लौटता है तो बच्चों को पढ़ाता है। शांति कुंज के हॉल में ही बच्चों की 2 घंटे क्लास लेता है। दुर्गेश ने कहा कि, मैं देश के भविष्य की नींव तैयार कर रहा हूं। एक अच्छे समाज के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। इन बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर से लेकर बड़ा अफसर बनते हुए देखना चाहता हूं।

दंतेवाड़ा के शांति कुंज में रहने वाले 10 बच्चों की रोज शाम 2 घंटे क्लास लगती है।
दंतेवाड़ा के शांति कुंज में रहने वाले 10 बच्चों की रोज शाम 2 घंटे क्लास लगती है।

8 लाख रुपए का था इनाम
दरअसल, गांगलूर इलाके के हिरमामुंडा गांव का रहने वाला दुर्गेश नक्सलियों का एरिया कमेटी मेंबर (ACM) था। इस पर छत्तीसगढ़ शासन की ओर से 8 लाख रुपए का इनाम भी घोषित था। दंतेवाड़ा पुलिस के द्वारा चलाए जा रहे लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर दुर्गेश ने साल 2020 में हिंसा का रास्ता छोड़ दिया और दंतेवाड़ा पुलिस के आमने आकर सरेंडर कर दिया। दुर्गेश ने खुद 8वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है। इसके फुर्तीले शरीर को देखकर नक्सली इसे साल 2007 में अपने साथ लेकर गए थे। संगठन में शामिल कर हाथों में हथियार थमा दिया था।

अ से अनार से लेकर ABCD लिखना और पढ़ना सिखाता है सरेंडर नक्सली।
अ से अनार से लेकर ABCD लिखना और पढ़ना सिखाता है सरेंडर नक्सली।

शारीरिक रूप से कमजोर हुआ तो नक्सलियों ने स्कूल चलाने को कहा

दुर्गेश, तड़केर की मुठभेड़ में घायल हो गया था। इसके पैर में गोली लगी थी। साथी नक्सली इसे घटना स्थल से उठाकर ले गए थे, फिर किसी तरह से इसका हैदराबाद में इलाज करवाया था। जहां बेहतर इलाज न मिलने की वजह से इसे फिर भद्राचलम लाया गया। यहां इसका इलाज चला। पैर में गोली लगने के बाद दुर्गेश की फुर्ती थोड़ी कम हो गई थी, वह शारीरिक रूप से कमजोर हो गया था। जिसके बाद नक्सलियों ने इसे एक गांव में ही बैठा दिया था। जहां ये नक्सलियों की स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का काम किया करता था।

दिनभर ड्यूटी के बाद जब शाम को घर लौटता है तो बच्चों को पढ़ाता है।
दिनभर ड्यूटी के बाद जब शाम को घर लौटता है तो बच्चों को पढ़ाता है।

नक्सली चलाते हैं जनताना स्कूल, गुंडाधुर आश्रम में बच्चों को पढ़ाता था दुर्गेश
बस्तर में नक्सली खुद का स्कूल भी चलाते हैं, जिसे जनताना स्कूल कहा जाता है। गांव-गांव से बच्चों को लेकर आते हैं और इन्हीं स्कूलों में उन्हें माओवाद का पाठ पढ़ाते हैं। वहीं एनकाउंटर में जब दुर्गेश घायल हुआ और शारीरिक रूप से कमजोर हुआ तो नक्सलियों ने उसे अपने गुंडाधुर आश्रम में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी। साल 2010 से 2016 तक वह इसी आश्रम में रहकर लगभग 50 बच्चों को पढ़ाता था। जिन्हें लकड़ी का हथियार बना कर चलाने की ट्रेनिंग देता था। साथ ही सरकार के खिलाफ बच्चों का ब्रेनवाश किया जाता था। जिससे ये बड़े होकर संगठन को मजबूती देने का काम करें।

मिस्ड कॉल वाले गुरुजी:सूरजपुर के इस स्कूल कैंपस में मवेशी बांधे जाते थे, नशेड़ियों का अड्डा था, गौतम की जिद ने बनाया स्मार्ट स्कूल; यहां बच्चे अब चलाते हैं मिनी बैंक

बस्तर में नक्सली खुद का स्कूल भी चलाते हैं, जिसे जनताना स्कूल कहा जाता है।
बस्तर में नक्सली खुद का स्कूल भी चलाते हैं, जिसे जनताना स्कूल कहा जाता है।

18 जवानों की हत्या में था शामिल
दुर्गेश ने बताया कि, नक्सल संगठन में रहते हुए 3 बड़ी नक्सल घटनाओं में वह शामिल था। जिनमें सबसे पहले 2007 में पामुलवाया की घटना को अंजाम दिया था। यहां मुठभेड़ में कुल 11 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद साल 2008 में तड़केर की पुलिस नक्सली मुठभेड़ में भी शामिल था जिसमें 6 जवानों की शहादत हुई थी। इसके अलावा 2 जवानों को बंदी बना कर ले गया था। जिसमें एक जी हत्या कर दी थी तो वहीं दूसरे को छोड़ दिया गया था।

बिलासपुर के मुरितराम का जज्बा:6 साल की उम्र में चेचक ने छीन ली दोनों आंखें, दृष्टिहीन होकर भी सवार रहे बच्चों का भविष्य; दे रहे निशुल्क शिक्षा

खबरें और भी हैं...