लॉकडाउन में नक्सल संगठन में बच्चों की भर्ती:बस्तर IG का चिंताजनक खुलासा- स्कूल, आश्रम और पोटाकेबिन के छात्र-छात्राओं पर नक्सलियों की नजर

जगदलपुर5 महीने पहले

छत्तीसगढ़ के बस्तर में साल 2021 में हुए लॉकडाउन का नक्सलियों ने फायदा उठा कर पार्टी विस्तार करने का काम किया है। माओवादियों ने ज्यादातर स्कूली छात्र-छात्राओं और युवाओं को संगठन में भर्ती करने की कोशिश की है। इस बात का खुलासा बस्तर के IG सुंदरराज पी ने किया है। कोरोना महामारी की वजह से संभाग के सभी स्कूल, आश्रम, पोटाकेबिन बंद थे। यहां रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चे जब घर गए तो माओवादियों ने अंदरूनी इलाकों के कई बच्चों को संगठन में शामिल करने का प्रयास किया था।

बस्तर IG सुंदरराज पी ने बताया कि माओवादियों ने बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटकाकर माओवाद संगठन में शामिल करने पर जोर दिया था। लेकिन वे अपनी इस प्लानिंग में कामयाब नहीं हो सके। स्कूल-कॉलेज खुलने के बाद अंदरूनी इलाके के जो भी बच्चे वापस आए, उनकी काउंसलिंग की गई थी। गांव के बच्चे पढ़ लिखकर अब अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। वे नक्सलियों के चंगुल में नहीं आएंगे। फिर भी पुलिस की नजर बनी हुई है।

गांव-गांव में पुलिस का नेटवर्क फैल चुका है। कई नक्सली एनकाउंटर में ढेर हुए हैं तो कइयों ने सरेंडर कर दिया है। साथ ही कई नक्सलियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जिससे नक्सली बौखलाए हुए हैं। इसलिए बच्चों का ध्यान भटकाकर उन्हें बाल संघम संगठन में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। IG ने कहा कि, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की ग्रामीणों को भी जानकारी दी जा रही है। जिसका उनको लाभ भी मिल रहा है।

पहले भी आ चुके हैं कई मामले
बस्तर में माओवादी बच्चों को ढाल बनाकर अपना काम निकलवाते हैं। कुछ साल पहले दंतेवाड़ा के कुआकोंडा इलाके में कुछ स्कूली बच्चों को पुलिस ने पकड़ा था। जो स्कूल के बैग में माओवादियों के लिए दवाइयां लेकर जा रहे थे। इसके अलावा बीजापुर की एक महिला माओवादी ने भी पुलिस के सामने अपने हथियार डाले थे।

जिसने यह खुलासा किया था कि पोटाकेबिन की कई बच्चियां माओवाद संगठन में शामिल हो चुकी हैं। सरेंडर करने वाली महिला माओवादी खुद भी जब पोटाकेबिन में पढ़ाई करती थी तो नक्सली इसे भी बहला-फुसला कर अपने साथ लेकर चले गए थे। महिला नक्सली के इस खुलासे के बाद जबरदस्त हड़कंप मच गया था।

नक्सली चलाते हैं जनताना स्कूल
बस्तर में माओवादी आज भी अपनी स्कूल चलाते हैं। नक्सलियों की इस स्कूल को जनताना स्कूल कहा जाता है। इस स्कूल में बच्चों को नक्सल संगठन के ही पढ़े-लिखे युवा पढ़ाते हैं। साथ ही माओवादी अपनी विचारधारा का पाठ भी बच्चों को पढ़ाते हैं।

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