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परेशानी:7 साल में कंपोजिट बिल्डिंग में नहीं बनी लिफ्ट रैंप भी नहीं, दिव्यांग-बुजुर्गों को हो रही दिक्कत

जगदलपुर12 दिन पहले
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  • साढ़े 10 करोड़ की लागत से कलेक्टोरेट परिसर में बनी है कंपोजिट बिल्डिंग

कलेक्टोरेट में करोड़ों की लागत से बनी कंपोजिट बिल्डिंग में 7 साल बाद भी दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है। बताया जाता है कि यहां दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए लिफ्ट लगाई जानी थी, लेकिन अब तक इसे लेकर कोई भी पहल नहीं की जा सकी है। ऐसे में यहां दिव्यांगों और बुजुर्गों की सुविधा की अनदेखी की जा रही है। बताया जाता है कि जब से कंपोजिट बिल्डिंग का लोकार्पण हुआ हे, तब से ही दिव्यांगों के लिए यहां कोई व्यवस्था ही नहीं की गई है। ऐसे में उन्हें सीढ़ियों पर से ही होकर चढ़ना-उतरना पड़ रहा है। करीब साढ़े 10 करोड़ रूपए की लागत से बने इस भवन का निर्माण सिर्फ इसलिए किया गया था, ताकि तकरीबन सारे महकमों को एक ही जगह से चलाया जा सके और लोगों को भटकना न पड़े, लेकिन दिव्यांग और बुजुर्गों को सीढ़ियों से चढ़ने-उतरने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोक निर्माण विभाग के ईई राजीव बत्रा बताते हैं कि लिफ्ट को लेकर शुरूआत में योजना तो थी, लेकिन इस पर काम नहीं हो सका। दोबारा नए सिरे से निर्माण की पूरी फाइल को देखकर ही कुछ कहा जा सकता है।

2014 में शुरू हुई थी कंपोजिट बिल्डिंग, सीढ़ियों से ही चढ़ने-उतरने मजबूर दिव्यांग-बुजुर्ग
मालूम हो कि 30 नवंबर 2014 को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कंपोजिट बिल्डिंग का लोकार्पण तो कर दिया, लेकिन यहां दिव्यांगों और बुजुर्गों की सुविधा का ध्यान ही नहीं रखा गया। रोजाना हजारों की संख्या में यहां लोग पहुंचते हैं, जिनमें दिव्यांगों की संख्या भी कम नहीं होती। किसी न किसी काम से वे यहां पहुंचते हैं, बावजूद उन्हें पहली और दूसरी मंजिल पर बने कार्यालयों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का ही सहारा लेना पड़ता है और बड़ी मुश्किल से वे चढ़ना-उतरना करते हैं।

लोगों से जुड़े विभागों के दफ्तर पहली और दूसरी मंजिल में
सीधे आमजनों से जुड़ने वाले यहां कई विभाग स्थापित हैं, लेकिन इन विभागों को पहली और दूसरी मंजिल में चलाया जा रहा है। इसमें महिला एवं बाल विकास, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, टाऊन एंड कंट्री प्लािनंग, खनिज विभाग, भू-पंजीयक, श्रम पदाधिकारी सहित अन्य विभाग शामिल हैं। इन विभागों में पहंुचने दिव्यांगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए कोई पहल ही नहीं हो सकी है।

लिफ्ट लगाने की योजना तो थी, इसलिए रैंप भी नहीं
लोक निर्माण विभाग द्वारा यहां कंपोजिट बिल्डिंग में लिफ्ट लगाने भवन के निर्माण के समय से ही तैयारी की गई थी, लेकिन लिफ्ट के लिए बनाए गए चैंबर महज प्लाई से ढंक दिए गए हैं। यही कारण था कि यहां रैंप का निर्माण नहीं किया गया। भवन के पूरे होने के बाद ही यहां लिफ्ट लगाई जानी थी, लेकिन न तो इस पर लोक निर्माण विभाग ने ध्यान दिया और न ही इस पर प्रशासन की तरफ से ही कोई पहल हुई।

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