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ब्लैक फंगस से पहली मौत के बाद अलर्ट:ब्लैक फंगस की जांच करने मशीन नहीं, राशि जारी पर सप्लायर नहीं मिला

जगदलपुर9 दिन पहले
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  • मेकॉज में दिन में चार बार जांच रहे शुगर लेवल, पोस्ट कोविड ओपीडी में मरीजों की हो रही जांच, इधर महिला के शव का किया अंतिम संस्कार

शहर के परपा नाका इलाके की एक कोविड पॉजिटिव महिला ब्लैक फंगस का शिकार हो गई थी। महिला ने इलाज के दौरान रायपुर में शनिवार को दम तोड़ दिया था। महिला के शव को सुरक्षित तरीके से रविवार को जगदलपुर लाया गया और पूरी सुरक्षा के साथ अंतिम संस्कार स्थानीय करकापाल कब्रस्तन में किया गया। इधर चिंता की बात है कि संभाग में ब्लैक फंगस की जांच के लिए कोई मशीन ही नहीं है। मेडिकल कॉलेज में भी इसकी जांच की अधिकृत सुविधा नहीं है।

यहां डाॅक्टर लक्षण के हिसाब से ही जांच कर रहे हैं। हॉस्पिटल सूत्रों की मानें तो कुछ दिनों पहले ही ब्लैक फंगस की जांच के लिए न्यूजल एंडोस्कॉपी मशीन की दरकार डाॅक्टरों ने बताई थी। इसके बाद इसकी खरीदी के लिए कलेक्टर रजत बंसल ने अनुमति भी दे दी थी और करीब 18 लाख का बजट भी स्वीकृत कर दिया था, लेकिन इस मशीन की सप्लाई के लिए कोई वेंडर ही नहीं मिल रहा है। अभी यह मशीन सप्लाई के लिए ऐसी कोई एंजेसी ही सामने नहीं आई है जिसे ऑर्डर दिया जा सके। ऐसे में अभी ब्लैक फंगस की जांच सिर्फ लक्षणों के आधार पर हो रही है। डाॅक्टरों ने बताया कि जैसे एंडोस्काॅपी मशीन काम करती है उसी तर्ज पर यह न्यूजन एंडोस्कोप नाक में फंगस को ट्रेस करती है। यह मशीन बेहद कारगर है।

मेकॉज में अलर्ट जारी, कोविड वार्ड में भर्ती डायबिटीज के संक्रमित मरीजों की निगरानी भी बढ़ाई गई
इधर बस्तर की महिला की ब्लैक फंगस से मौत के बाद मेकॉज में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। यहां कोविड वार्ड में भर्ती ऐसे मरीज जो डायबिटिज पीड़ित हैं उन्हें तत्काल इंसुलिन पर ले लिया गया है। शुगर पीड़ित मरीजों का दिन में 4 बार शुगर चेक किया जा रहा है। इसके अलावा अभी कोविड मरीजों को दिए जाने वाले स्टेराइड को कम कर दिया गया है। बेहद जरूरी होने पर ही मरीजों को यह दिया जा रहा है। इसके अलावा कोविड मरीजों के लिए सभी हायर एंटीबाइटिक डोज को भी बैन कर दिया गया है। कोविड प्रभारी डाॅ नवीन दुल्हानी ने बताया कि हम कोशिश कर रहे है कि मरीजों को ब्लैक फंगस से दूर रखें। अभी दवाओं के डोज में कमी के साथ-साथ हमने सभी ऐसे मरीज जिन्हें ऑक्सीजन लग रहा है उनके आॅक्सीजन के फ्लो-मीटर में डिस्टिल्ड वाटर डलवा रहे हैं। ब्लैक फंगस के फैलने का सबसे बड़ा एक कारण ऑक्सीजन के फ्लो-मीटर में सादे पानी का इस्तेमाल किया जाना भी है। ऐेसे में हम सादे पानी की जगह डिस्टिल्ड वाटर का उपयोग कर रहे हैं। सभी मरीजों की बारीकी से जांच की जा रही है।

जानिए... ये हैं ब्लैक फंगस के लक्षण, ऐसा कुछ हो तो तत्काल डाॅक्टर से मिलें
ब्लैक फंगस के सबसे आम लक्षणों में चेहरे का आकार बदलना, काली पपड़ी का बनना, आंशिक पक्षाघात, सूजन, लगातार सिरदर्द और बदतर मामलों में, जबड़े की हड्डी का नुकसान आदि शामिल है। इसमें सबसे ज्यादा दर्द आंखों में होता है। नाक और मुंह से अटैक तक ब्लैक फंगस आंखों तक बहुत जल्द पहुंचता है। सबसे ज्यादा दर्द आंखों में होता है। नाक और मुंह से अटैक तक ब्लैक फंगस आंखों तक बहुत जल्द पहुंचता है। फंगस नाक के जरिए मुंह और जबड़े पर भी हमला करता है। कई मरीजों में देखा गया है कि उनका चेहरा सुन्न हो जाता है। हाथ-पैर सुन्न होना आम बात है लेकिन चेहरा दुर्लभ है।

फंगस नाक में जाता है इसलिए नेजल के आस-पास आपको काले रंग के धब्बे दिखें तो अलर्ट हो जाना चाहिए। इस तरह के निशान ही म्यूकर माइकोसिस के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। आमतौर पर नाक तब बंद होती है जब आपको सर्दी खांसी-जुकाम हो जाता है। लेकिन कोविड रिकवरी के बाद आपका सब कुछ सही है फिर भी नाक अचानक से ब्लॉक हो जाती है तो समझिए ब्लैक फंगस ने आपको गिरफ्त में ले लिया है। नाक बंद होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। चेहरे के किसी एक हिस्से में सूजन दिख सकती है। वैसे चेहरे पर सूजन की कई वजह होती हैं जैसे रात में ठीक से नींद ना ले पाना या फिर ज्यादा देर तक सोना, मसूड़ों से जुड़ी समस्या के चलते भी फेस पर सूजन आ जाती है। लेकिन अगर आपको ऐसी कोई समस्या नहीं फिर भी सूजन है तो ये ब्लैक फंगस का सिम्टम्स है। ऐसे में आपको सावधानी बरतने की जरूरत है। बेवजह दांतों में दर्द, मसूड़ों में सूजन भी ब्लैक फंगस का लक्षण हो सकता है।

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