तरक्की में मेकॉज / दिल में भरा था एक लीटर पानी, डाॅक्टरों ने निकाला

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  • संभाग के किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार हुआ ऐसा ऑपरेशन

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

जगदलपुर. मेडिकल कॉलेज ने दिल के इलाज के मामले में एक कदम और आगे बढ़ा लिया है। शनिवार को मेकॉज के मेडिसिन विभाग के डाॅक्टरों ने एक बड़ा ऑपरेशन कर एक मरीज की जान बचाई है। 
दरअसल मेकॉज के डाॅक्टरों की टीम ने एक आदिवासी युवक के दिल की झिल्ली में भरे पानी को सफलतापूर्वक निकाल लिया है। इस युवक के दिल की झिल्ली में करीब एक लीटर पानी भर गया था। डाॅक्टरों ने दिल की झिल्ली में भरे पानी को निकालने के लिए इको कार्डियोग्राफी मशीन का सहारा लिया और पहले मशीन से पानी भरने वाले स्थान को चिन्हांकित किया। इसके बाद निडिल की सहायता से पानी को बाहर खींचा गया यह पूरा प्रोसिजर बेहद खतरनाक होता है। इस तरह का ऑपरेशन इससे पहले संभाग के किसी भी सरकारी हॉस्पिटल में नहीं हुआ है और इस तरह के ऑपरेशन में निजी हॉस्पिटल में डेढ़ से दो लाख रुपए तक खर्च आता है।
अत्यधिक शराब पीने की वजह से होता है दिल में इंनफेक्शन, फिर झिल्ली में भर जाता है पानी
डाॅ. जॉन मसीह ने बताया कि दिल की झिल्ली में कई कारणों से पानी भरता है एक तरह से यह गंदा खून ही होता है जिसे सामान्य भाषा में पानी कहा जाता है। लेकिन बस्तर में जो मामले सामने आए हैं उनमें इसके पीछे का कारण शराब है। अभी तक जितने भी इस तरह के मामले आए हैं उनके पीछे का कारण अत्यधिक शराब सेवन की वजह से इन्फेक्शन होना रहा है। उन्होंने बताया कि शराब के सेवन से दिल का साइज बड़ा हो जाता है शराब सेवन की वजह से खान पान कम होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसके बाद दिल की झिल्ली में पानी भरने लगता है। शुरुआती चरण में गोलियों से इसे ठीक करने का प्रयास किया जाता है लेकिन जब गोलियों से काम नहीं बनता है तो इस तरह का ऑपेरशन करना पड़ता है। उन्हाेंने बताया कि इको कार्डियोग्राफी मशीन के आने के बाद इस तरह के ऑपरेशन संभव हुआ। मशीन से हार्ट का साइज, हार्ट का पंप कितना फंक्शन कर रहा है, हार्ट अटैक के बाद हार्ट कितना डैमेज है और दिल से संबंधित जन्मजात बीमारियों की जानकारियां भी पता लगाई जा सकती है।
मेडिसिन विभाग की टीम ने दिखाई हिम्मत
मेडिसिन डिपार्टमेंट में हाल ही में कई बदलाव हुए हैं। अब डॉ. जॉन मसीह को एचओडी बनाया गया है। इको कार्डियोग्राफी मशीन आकर पड़ी थी। डॉ. मसीह ने इस मशीन को आईसीयू में फिट करवाया और ट्रायल के तौर पर पहले दो मरीज जिनके दिल की झिल्ली में कम पानी था उसे निकलवाया। फिर शनिवार को 45 वर्षीय युवक आया जिसके दिल में एक लीटर पानी भरा था उसे भी निकाला गया। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार, सीनियर रेसीडेंट डाॅ. आरती भगत का भी विशेष योगदान रहा। 

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