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ये कैसी सेवा:कोरोनाकाल में 13 पार्षदों ने ही निधि से की लोगों की मदद

जगदलपुरएक महीने पहले
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  • महापौर समेत 35 पार्षदों ने नहीं निकाली रकम, लोगों ने कहा- ऐसे हालात में पार्षदों को मदद के लिए आगे जाना चाहिए

कोरोना की दूसरी लहर को लेकर लॉकडाउन के दौरान काम न मिलने से मजदूरों व रिक्शा, ठेला चलाने वालों की आर्थिक हालत काफी खराब हो गई है। ऐसे में वार्ड पार्षदों व अन्य जनप्रतिनिधियों के दायित्व भी अब बढ़ गए हैं। अपनी समस्या का समाधान के लिए हर दिन दर्जनों जरूरतमंद लोग अनाज व आर्थिक मदद की गुहार लगा रहे हैं।

लेकिन उनकी मदद करने के लिए शहर के 48 वार्डों में से केवल 13 वार्ड के पार्षद ही आगे आए हैं। कोरोना की दूसरी लहर में लॉकडाउन को करीब 24 दिन हो गए हैं लेकिन अब तक न तो महापौर सफीरा साहू और न ही निगम अध्यक्ष ने अपनी पार्षद निधि के एक रुपए इन गरीब परिवारों पर खर्च किए हैं। हालत यह है कि पिछले साल लोगों की मदद करने के लिए सबसे पहले आगे आए नगर निगम नेता प्रतिपक्ष संजय पांडे भी इस काम में अब तक पीछे हैं। जनप्रतिनिधियों की इस अनदेखी को लेकर वार्ड के लोग नाराज हैं। लोगों का कहना है कि पार्षदों का यह राशि उनके वार्ड में विकास के काम के लिए मिलती है। लेकिन इस समय इस पैसे का उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों के लिए करने के लिए कहा गया है। लेकिन पार्षद हमारी मदद करने के बजाय इस पैसे को बचाकर बाद मे इसका उपयोग करने के लिए योजना बना रहे हैं। जिसका खामियाजा उन्हें आने वाले चुनाव मे भुगतना पड़ेगा।

पार्षद दयावती देवांगन ने सबसे अधिक मदद की
वार्ड 6 की पार्षद दयावती देवांगन गरीब व जरूरतमंद लोगों तक राशन, मास्क, सैनिटाइजर एवं अन्य खाद्य सामग्रियां जरूरतमंद और गरीब परिवारांे तक पहुंचा रही हैं। लॉकडाउन के कारण गरीब व जरूरतमंद परिवारों को इससे बड़ी राहत मिली। निगम से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक मदद करने वाले पार्षदों में दयावती ने सबसे अधिक 3 लाख 30 हजार रुपए खर्च कर दिए हैं। वे अपने वार्ड में नियमित रूप से सैनिटाइजेशन और कोरोना जागरूकता अभियान में प्रयासरत है।

हर साल इतनी होती है पार्षद और महापौर निधि
इस साल महापौर पार्षद और एल्डरमेन के लिए 1 करोड़ 50 लाख रुपए शासन से आए है। निगम ने 50% के हिसाब से हर पार्षद को 2 लाख रुपए स्वीकृत किया है। एल्डरमैन को 1 लाख 50 हजार और शेष रकम 45 लाख महापौर निधि के रुप में स्वीकृत है।

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