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गोधन न्याय योजना:12 महीने में ही बेचे 5 लाख के गोबर से बनी जैविक और सुपर कंपोस्ट खाद, ​​​​​​​ एसएलआरएम सेंटर में काम करने वाली महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

जगदलपुर3 दिन पहले
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बस्तर जिले के शहरी क्षेत्र के गोठानों में काम करने वाली महिलाओं को अब पैसे कमाने के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। यह सब कुछ संभव हुआ गोधन न्याय योजना के तहत एसएलआरएम सेंटर में बनाई जाने वाली जैविक खाद से। योजना का संचालन सही ढंग से होने से चार गोठान में काम करने वाले समूह ने पिछले एक साल में 5 लाख 50 रुपए की जैविक और कंपोस्ट खाद बेच दी है। इसके अलावा आने वाल दिनों में 2 हजार क्विंटल खाद बनाने की तैयारी में जुट गई है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों सें जैविक खाद का महत्व काफी बढ़ गया है। किसानों के साथ ही अब कई शहरवासी अपनी बागावानी में इस खाद का उपयोग कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक कचरे से खाद बनाने में इस समय करीब 300 महिलाएं इस काम में जुटी हुई है। नगर निगम आयुक्त प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि गोबर से गोकाष्ठ के साथ ही जैविक और सुपर कपोस्ट खाद बनाया जाता है। इसके लिए चारों गोठानों में मशीन भी नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराई गई है। गोबर उत्पाद के विक्रय से समूह को फायदा मिल रहा है।

चार गोठानों में बना रहे जैविक खाद, नगर गुड़ी और डोर टू डोर भी बेच रहे हैं इस खाद को : गोधन न्याय योजना के अंतर्गत जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के चार गोठानों में पशुपालकों से 31 अगस्त तक इन महिलाओं ने गोधन न्याय योजना के तहत 24 लाख रुपए का गोबर खरीद लिया है। जिसका उपयोग वर्मी व सुपर कम्पोस्ट खाद उत्पादन के साथ-साथ गोकाष्ठ और अन्य सामग्री बनाने में कर रही हैं। इस योजना का संचालन शहर के बोधघाट, प्रवीर वार्ड और लालबाग पार्क के साथ ही कांगोली में नरवा, गरवा, घुरवा योजना के तहत बनाए गए गोठानों में किया जा रहा है। इन गोठानों में खरीदे गए गोबर में 80 फीसदी गोबर का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट और बाकी का सुपर कम्पोस्ट उत्पादन में किया जा रहा है।

महिलाओं के आय में हुई बढ़ोतरी

समूह की महिलाओं ने बताया कि उनके माध्यम से गोठान में केंचुआ खाद तैयार कर विक्रय किया जा रहा है। इससे उनकी आय बढ़ी है। इसके अलावा कई महिलाओं को स्वरोजगार भी मिला। उन्होंने बताया कि इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने एक्सटेंशन रिफॉर्म्स आत्मा योजना के तहत प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया गया। इससे उन्हें नई जानकारी, मानसिक संबलता और कार्यक्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। महिला समूहों के केंचुआ खाद बनाने से उनकी आय में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। उनकी आय में बढ़ोतरी होने से उनके जीवन शैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है।

पर्यावरण के नजर से लाभदायक केंचुआ खाद पर्यावरण की दृष्टि से लाभदायक है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार, भूमिगत जल स्तर में बढ़ोतरी, भूमि में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं में बढ़ोतरी होती है। इस कारण यह पर्यावरण के अनुकूल और किसान मित्र है।

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