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अपनों को खोने का दर्द:नक्सलियों का कोर एरिया ढहाने की तैयारी, सिलगेर में कभी भी कैंप खोल सकती है फोर्स

जगदलपुर12 दिन पहले
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सोमवार को बीजापुर लाए गए जवानों के पार्थिव शरीरों को देखते ही उनके परिजन बिलख पड़े। मां, पत्नी के साथ अन्य महिलाओं की आंखों से आंसू बहने लगे। - Dainik Bhaskar
सोमवार को बीजापुर लाए गए जवानों के पार्थिव शरीरों को देखते ही उनके परिजन बिलख पड़े। मां, पत्नी के साथ अन्य महिलाओं की आंखों से आंसू बहने लगे।
  • सिलगेर में कैंप खुलते ही हिड़मा का गांव जद में आ जाएगा

टेकलगुड़ा नक्सली हमले के बाद अब फोर्स पूरी ताकत से नक्सलियों के गढ़ को ढहाने में लग गई है और नक्सलियों के किले को ढहाने के लिए पहला किला सिलगेर बैस कैंप के तौर पर ठोका जाएगा। बताया जा रहा है कि फोर्स कभी भी सिलगेर कैंप खोल सकती है।

इस कैंप के खुलते ही नक्सलियों का पूरा कोर एरिया फोर्स के लिए खुल जाएगा और इस कैंप से ही जवान नक्सलियों के कोर एरिया में ऑपरेशन लांच कर पायेंगे। अभी जवानों को कोर एरिया में ऑपरेशन लांच करने के लिए बीजापुर जिले के तर्रेम और सुकमा जिले के जगरगुंडा बेस कैंप का सहारा लेना पड़ता है और इन कैंपों से निकलने के बाद जवानों की मूवमेंट कोर एरिया तक पहुंचते-पहुंचते लीक हो जाती है।

विश्वस्त पुलिस सूत्रों ने बताया कि बीजापुर जिले के सिलगेर पुलिस कैंप पहले ही पास हो चुका था लेकिन इस आेर काम धीमी गति से चल रहा था अब जब तीन दिनों पहले टेकलगुड़ा में जवानों को ऑपरेशन के चलते बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है उसके बाद बताया जा रहा है कि सिलगेर कैंप को खोलने का काम दोगुनी तेजी से होगा। सूत्रों ने बताया कि इस कैंप का जिक्र रविवार की दोपहर सर्किट हाउस में हुई बैठक में किया गया है।

सिलगेर से पास हिड़मा का गृहग्राम पूवर्ती भी

अभी बीजापुर-सुकमा के सीमा के इलाके में तर्रेम कैंप खोला गया था। तर्रेम से फोर्स को कोर एरिया में घुसने के लिए करीब 9 किमी का सफर करना पड़ता है। सिलगेर में कैप खुलने से पहले सिलगेर और तर्रेम सड़क मार्ग से जुड़ जायेगा। सिलगेर से नक्सली लीड़र हिड़मा का गृहग्राम तर्रेम भी करीब 5 किमी की दूरी पर है इसके अलावा जोनागुड़ा, टेकलगुड़ा भी नक्सलियों के कब्जे वाला इलाका है और इन गांवों की दूरी भी पांच से सात किमी है।

शहीदों को सलामी देकर पार्थिव शरीर गृहग्राम भेजे

बीजापुर के तर्रेम के पास शनिवार को हुई मुठभेड़ में शहीद हुए सुरक्षा बलों के 14 जवानों के शवों को सोमवार की सुबह पुलिस लाइन में लाया गया और अंतिम सलामी दी गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक-एक कर सभी शवों पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इसके बाद पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। नागरिकों और विभिन्न समाज व संगठनों की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे थे। गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री बघेल आधे घंटे तक रहे और दूरी बनाए रखे लेकिन इस बीच सिर्फ एक बार ही कुछ बातचीत की।

जवानों का सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा: शाह

गृहमंत्री अमित शाह ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से कहा कि जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है जो व्यर्थ नहीं जाएगा। नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई और तेज की जाएगी। इसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। यह प्रधानमंत्री के प्राथमिकताओं में शामिल है, भारत सरकार और राज्य सरकार मिलकर कार्य करेगी।

नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाने के लिए शहीदों को देश हमेशा याद रखेगा। नक्सलियों के खिलाफ निर्णयक मोड़ पर पहुंच चुकी लड़ाई को इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने दो मुकाम और आगे पहुंचा दिया है। 5-6 साल में अंदर तक कैंप ले जाने में सफलता मिली है। इसी की झुंझलाहट में नक्सली इस तरह हमले कर रहे हैं।

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