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मनमानी:प्राइवेट छात्र नहीं लेते कॉलेज की सुविधाएं फिर भी दे रहे जनभागीदारी शुल्क

जगदलपुर6 दिन पहले
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  • छात्र संगठन कह रहे-जब प्राइवेट परीक्षा देने वाले छात्र कॉलेज के सामानों का उपयोग ही नहीं करते तो फिर क्यों लिया जा रहा जनभागीदारी शुल्क

संभागभर के 30 से ज्यादा सरकारी और निजी कॉलेजों में परीक्षा देने वाले 25 हजार प्राइवेट परीक्षार्थियों से जनभागीदारी समिति के शुल्क के तौर पर 250 रुपए की वसूली की जा रही है। छात्रों से लिए जाने वाले इस शुल्क को वसूली इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि प्राइवेट परीक्षार्थियों का तर्क है कि वे सालभर न तो कॉलेज आते हैं और न ही कॉलेज की किसी संपत्ति जैसे, बेंच, क्लास रूम, लैब, कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं। वे सिर्फ परीक्षा दौरान परीक्षा देने आते हैं और इस परीक्षा की बाकायदा वह शुल्क भी दे रहे हैं। ऐसे में उनसे जबरन जनभागीदारी शुल्क के नाम पर 250 रुपए लिए जा रहे हैं वह वसूली की श्रेणी में आता है। इस मामले में एनएसयूआई और अभाविप जैसे छात्र संगठन भी प्राइवेट परीक्षार्थियों के साथ हैं और वे अब इस मामले में आंदोलन की तैयारी में हैं।

एनएसयूआई के लोकसभा प्रभारी आदित्य सिंह बिसेन कहते हैं कि हम 3 दिन से संभाग के पीजी कॉलेज प्रबंधन से मांग कर रहे हैं कि वे हमें प्राइवेट परीक्षार्थियों से जनभागीदारी शुल्क वसूलने संबंधी आदेश दिखा दें लेकिन अब तक प्रबंधन आदेश नहीं दिखा पाया है। आदित्य बताते हैं कि सरकार या शासन की ओर से अब तक ऐसा कोई आदेश ही जारी नहीं हुआ है जिसमें प्राइवेट छात्रों से पैसे लिए जाएं।

कोई आदेश नहीं, नियम समिति बनाती है नियम
इधर सरकारी कॉलेजों में प्राइवेट परीक्षार्थियों से जनभागीदारी शुल्क के तौर पर पैसों की वसूली संबंधी कोई सरकारी आदेश किसी के पास नहीं है। करीब-करीब सभी कॉलेजों में सालों पहले जनभागीदारी समिति के सदस्यों ने आपसी सहमति से कॉलेज विकास के लिए पैसे लेने का निर्णय लिया और इस निर्णय के आधार पर सालों से पैसे लिए जा रहे हैं। हर सरकारी कॉलेज में जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष व सदस्य की नियुक्ति सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं के इच्छा के अनुसार होती है।

एनएसयूआई के बाद अब एबीवीपी भी विरोध में उतरी, समिति के अध्यक्ष से की मांग
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मांग की है कि प्राइवेट परीक्षार्थियों से इस वर्ष जनभागीदारी शुल्क व प्रायोगिक शुल्क न लिया जाए इस मांग को लेकर शनिवार को जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन व महाविद्यालय प्राचार्य से मिलकर ज्ञापन सौंपा। अभाविप नगर मंत्री अतुल राव ने बताया कि इस वर्ष कोई भी कक्षा ऑफलाइन नहीं लगी है और सभी परीक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से होनी है ऐसे में प्राइवेट परीक्षार्थियों से जनभागीदारी शुल्क व प्रायोगिक शुल्क लेना समझ से बाहर है। कोरोनाकाल को देखते हुए इस वर्ष प्राइवेट परीक्षार्थियों से जनभागीदारी शुल्क व प्रायोगिक शुल्क छात्रों से न लिया जाए या तो कम किया जाए। विद्यार्थी परिषद ने विधायक व प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा है, अगर परिषद की मांग पूरी नहीं होती है तो छात्रों के हित में महाविद्यालय में आंदोलन करेगी। इस दौरान नगर सहमंत्री गजेंद्र बघेल, कार्तिक जैन, विकास पांडे, विपुल मंडल, ऋषि राज उपस्थित थे।

25 हजार छात्रों से बिना वजह वसूल रहे 62.50 लाख
बस्तर यूनिवर्सिटी से हर साल नियमित और प्राइवेट परीक्षार्थियों के तौर पर करीब 50 हजार छात्र पर्चे देते हैं। इन पचास हजार छात्रों में करीब 25 हजार छात्र ऐसे होते हैं जो प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर परीक्षा में शामिल होते हैं। कॉलेज इन छात्रों से 250 रुपए प्रति छात्र के तौर पर जनभागीदारी शुल्क वसूलते हैं। हर साल यदि औसत 25 हजार छात्र भी पर्चे देते हैं तो छात्रों से बिना वजह ही कॉलेज करीब 62.50 लाख रुपए से ज्यादा की वसूली कर रहे हैं। हालांकि इन पैसों का उपयोग कॉलेज के विकास के लिए होता है लेकिन छात्रों का कहना है कि जब वे कॉलेज आते ही नहीं हैं तो विकास के लिए क्यों पैसे दें।

यह कॉलेजों और उच्च शिक्षा विभाग का मामला
​​​​​​​इधर बस्तर यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कॉलेजों को चलाने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग की है। ऐसे में जनभागीदारी शुल्क लेना या नहीं लेना यह यूनिवर्सिटी के हाथों में नहीं है। इस पर कॉलेज या फिर उच्च शिक्षा विभाग ही निर्णय ले सकता है। इस मामले में यूनिवर्सिटी सीधे तौर पर कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

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