एक माह से धरना दे रहे ग्रामीणों से मिले MLA:मंडावी बोले- मांगों को सरकार तक पहुंचाएंगे, पुलिस कैंप खुलने का विरोध कर रहे हैं बेचापाल के लोग

जगदलपुर/बीजापुर8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बेचापाल में पुलिस कैंप के विरोध में बैठे ग्रामीणों से मुलाकात करने के लिए विधायक भी पहुंचे। - Dainik Bhaskar
बेचापाल में पुलिस कैंप के विरोध में बैठे ग्रामीणों से मुलाकात करने के लिए विधायक भी पहुंचे।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित बेचापाल में पिछले एक महीने से सैकड़ों ग्रामीण पुलिस कैंप और सड़क निर्माण के विरोध में बैठे हुए हैं। वहीं बुधवार को क्षेत्रीय विधायक विक्रम मंडावी भी ग्रामीणों से मुलाकात करने के लिए पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की सारी समस्याएं सुनी। आंदोलन में बैठे सभी ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी जितनी भी मांग है उसे बिंदुवार वे सरकार तक पहुंचाएंगे। इलाके के ग्रामीणों ने अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने विधायक को ज्ञापन भी सौंपा है।

दरअसल, जिले के धुर नक्सल प्रभावित इलाके बेचापला में सुरक्षाबलों का कैंप स्थापित किया जाना है। साथ ही इलाके में डामरीकृत पक्की सड़क भी बनाई जा रही है। इसी के विरोध में ग्रामीण 30 नंवबर से आंदोलन में बैठे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इलाके में पुलिस कैंप खुलता है तो उनकी मुश्किलें बढ़ जाएगी। वे जंगल में लकड़ी लेने या फिर जब शिकार पर जाएंगे तो पुलिस नक्सली बता कर उनका एनकाउंटर कर देगी या फिर फर्जी नक्सल प्रकरण में गिरफ्तार कर जेल में डाल देगी।

ग्रामीणों ने विधायक को ज्ञापन भी सौंपा है।
ग्रामीणों ने विधायक को ज्ञापन भी सौंपा है।

आंदोलन पर बैठे बेचापला, मिरतुर, फुलगट्टा, तिमेनार समेत अन्य गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने कहा कि, हमें अपने गांव में स्कूल, अस्पताल चाहिए लेकिन पुलिस कैंप और पक्की सड़क नहीं। यदि सड़क बनती है तो फोर्स गांवों में घुसेगी। यहां के लोगों को परेशान किया जाएगा। गांव का वातावरण अभी शांत है, कैंप खुलने से गांव का वातावरण खराब हो जाएगा।

पिछले एक महीने से सैकड़ों ग्रामीण आंदोलन में बैठे हैं।
पिछले एक महीने से सैकड़ों ग्रामीण आंदोलन में बैठे हैं।

यह है ग्रामीणों की मुख्य मांग
कैंप के विरोध में बैठे ग्रामीणों ने कहा कि, पुलिस फर्जी मुठभेड़ बंद करें। साथ ही उनके क्षेत्र में पुलिस कैंप न खोला जाए। फर्जी मुठभेड़ में मारे गए लोगों को 1-1 करोड़ रुपए और घायलों को 50 -50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। साथ ही निर्माण के दौरान काटे गए सभी पेड़ो के लिए भी सरकार ग्रामीणों को मुआवजा दें। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक ये सारी मांगें पूरी नहीं होती है तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

खबरें और भी हैं...