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कोविड से परिवार में तीसरी मौत से बिफरे परिजन:बेटी चिल्लाती रही- ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है देखिए, पर नहीं आए डाॅक्टर, पिता की हुई मौत

जगदलपुर25 दिन पहले
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अधीक्षक और कोविड प्रभारी सहित मेडिकल स्टाफ परपा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा। - Dainik Bhaskar
अधीक्षक और कोविड प्रभारी सहित मेडिकल स्टाफ परपा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा।
  • डॉक्टरों ने मारपीट का लगाया आरोप, 4 पर केस
  • मां-दादी की मौत के बाद रविवार सुबह पिता ने तोड़ा दम

शहर के ठाकुर रोड में टेलरिंग की दुकान चलाने वाले 42 वर्षीय नागेंद्र देवांगन की मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। कोरोना संक्रमित होने के बाद 28 मई को भर्ती कराया गया था। मौत के बाद उनकी देख रेख कर रहे भाई-बहन बिफर पड़े और उन्होंने डॉक्टर और नर्सों से अभद्र व्यवहार कर दिया। आज जिनकी मौत हुई इससे पहले 16 मई को उनकी पत्नी और 19 मई को उनकी माताजी की मौत भी कोरोना से हुई है। मृतक की बेटी का कहना है कि वह सुबह से ही ऑक्सीजन लेवल कम होने की बात कहते हुए ड्यूटी कर रही नर्स को बार बार बुला रही थी लेकिन वह नहीं आई।

डॉक्टरों का आरोप है कि मरीज की मौत के बाद उनके परिजनों ने गाली दी, हंगामा किया और वार्ड ब्वाय को चप्पल से मारा। इसके बाद कोविड वार्ड में तैनात डॉक्टर और नर्स ड्यूटी ऑफ होने के बाद परपा थाना पहुंचे और चार लोगों के खिलाफ मारपीट गाली देने की शिकायत की। स्टाफ के साथ कोविड वार्ड प्रभारी डॉ. नवीन दुल्हानी और हास्पिटल के अधीक्षक डॉ. केएल आजाद भी पहुंचे हुए थे।

जानिए... परिजनों ने मेडिकल स्टाफ पर ये आरोप लगाए
मृतक की बेटी ने बताया कि उसके पिता 28 मई से कोविड वार्ड में भर्ती थे, सुबह 4 बजे उनका ऑक्सीजन लेबल 56 हो गया था तब से वह लगातार नर्स के पास जाकर एक बार देखने का अनुरोध कर रही थी लेकिन बार बार बुलाने के बाद भी कोई नहीं आया, अंतत: उसके पिता ने सुबह 6 बजे के आसपास दम तोड़ दिया। इससे पहले मां की मौत 16 मई को और दादी की मौत भी 19 मई को हो चुकी है। मानसिक तौर पर काफी दुखी होने के बाद संभव है कि वहां मौजूद डॉक्टर और नर्स पर अपना गुस्सा उतारा लेकिन मारपीट से उन्होंने इंकार किया।

यह भी गलत है: कोविड स्टाफ प्रोटोकॉल तोड़ समूह में थाने गया
कॉलेज में गंभीर मरीजों के साथ एक सहायक को अनुमति दी जाती है, लेकिन यहां कोविड वार्ड में मरीजों के सहायक हास्पिटल से बाहर भी आना-जाना करते रहते हैं। संक्रमण का खतरा रहता है। इतना ही नहीं कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे मेडिकल स्टाफ भी हंगामे के बाद एक साथ झुंड में परपा थाना पहुंचे, जबकि कोविड वार्ड से बाहर निकलने के लिए कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए था। आरोपियों और मेडिकल स्टाफ के थाना पहुंचने के बाद थाना को भी सेनेटाइज नहीं किया गया। हालांकि एएसपी ओपी शर्मा ने बताया कि जब भी इस तरह की भीड़ आती है तो थाने को सैनिटाइज किया जाता है।

एफआईआर में यह कहा
मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड स्टाफ नर्स इंचार्ज लीना प्रकाश के लिखित आवेदन के साथ डॉ. अभिनव तिर्की, डॉ मोनिका ठाकुर, डॉ नीतू, स्टाफ नर्स कामिनी, अंजली, वसुंधरा, हेमलता आदि थाना पहुंचे। शि कायत पर परपा पुलिस ने एक ही परिवार के चार लोगों के खिलाफ भादवि की धारा 294, 323, 506, 269 और 270 के तहत अपराध दर्ज किया। एफआईआर में कहा गया है कि 30 मई को वे सभी ड्यूटी कर रहे थे इस दौरान नागेंद्र देवांगन को बहुत ही सीरियस हालत में कोविड वार्ड में लाया गया था। ऑक्सीजन लेबल 56 होने से मरीज को वेंटिलेटर में रखने की सलाह दी गई, लेकिन परिजन ने लिखित में वेंटिलेटर में नहीं रखना चाहते कहा गया था। मरीज की मृत्यु होने के बाद परिजनों ने मारपीट और गाली देते हुए चप्पल से मारे।गंदी गालियां दे रहे थे। वार्डब्वाय को दो चप्पल भी मारा। एक महिला परिजन द्वारा जान से मारने की धमकी के साथ ही सिस्टर्स को बार बार नौकरी खा जाने की बात भी कह रहे थे।

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