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शिक्षा विभाग में स्थानांतरण और अटैचमेंट का खेल:पहले दिया आदेश फिर किया निरस्त और दूसरे की कर दी पोस्टिंग, तुरंत आदेश बदलने पर लगे लेनदेन के आरोप

जगदलपुर19 दिन पहले
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संयुक्त संचालक लोक शिक्षण और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में स्थानांतरण और अटैचमेंट का खेल की लंबी शिकायतें मिली है। पखवाड़ेभर पूर्व तक संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी के तौर पर पदस्थ एक ही अफसर पर संलग्नीकरण के इस खेल में बड़े पैमाने पर लेनदेन का आरोप भी लोगों ने लगाया है। बताया जाता है कि पिछले दिनों कई शिक्षकों का स्थानांतरण और अटैचमेंट पैसे लेकर कर दिया गया है।

कोंडागांव जिले के मयूरडोंगर की व्याख्याता को जहां बस्तर ब्लॉक में स्थानांतरित कर दिया गया है, वहीं एक मामले में पहले कांकेर जिले के एक मिडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षक को दूसरी जगह पर भेज दिया गया और उनकी जगह पर दूसरे शिक्षक को वहां भेजने के बाद पहले पदस्थ किए गए शिक्षक को हटा दिया गया। मामला जब हाईकोर्ट के पास पहुंचा तो पहले पदस्थ किए गए शिक्षक को वापस उसी संस्था में भेज दिया गया।

इसके अलावा एक दूसरे मामले में एक शिक्षक को फायदा पहुंचाने के लिए दूसरे शिक्षक का पदस्थापना आदेश ही निरस्त कर दिया गया। इसी तरह दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा के खुंटेपाल स्कूल से एक शिक्षक एलबी को शैक्षणिक व्यवस्था के तहत बस्तर जिले के मिडिल स्कूल धरमपुरा नं 1 में पदस्थ कर दिया गया है।

स्थानांतरण का अधिकार नहीं, फिर भी शिक्षिका को कोंडागांव जिले से भेज दिया बस्तर जिला
संयुक्त संचालक लोक शिक्षण को शिक्षकों के तबादले का कोई अधिकार नहीं है। बावजूद संयुक्त संचालक ने कोंडागांव के मयूरडोंगर स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में जीव विज्ञान की व्याख्याता सुभद्रा दास को बस्तर के कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल में तबादला कर दिया है। संयुक्त संचालक को स्थानांतरण का अधिकार नहीं होने के चलते आदेश में आगामी आदेश तक अध्यापन हेतु अस्थायी रूप से पदस्थापित करने की बात कही गई है।

हालांकि संयुक्त संचालक के पद पर हेमंत उपाध्याय की पदस्थापना के बाद अब स्थानांतरण व अटैचमेंट के खेल पर फिलहाल रोक लगी है और पूर्व में कए गए सभी मामलों की छानबीन की जा रही है। संयुक्त संचालक हेमंत उपाध्याय ने बताया कि शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी यदि नियमविरुद्ध संलग्नीकरण या स्थानांतरण किए गए हैं तो वे निरस्त होंगे।

प्रधानाध्यापक को हटाकर दूसरे को कर दिया पदस्थ
27 मई को जारी आदेश में यूडीटी यानि अपर ग्रेड टीचर के पद से प्रधानाध्यापक पर पदोन्नति का आदेश जारी किया, जिसमें 592 लोगों की सूची थी। सूची में शामिल नेतराम साहू ने पहले फरसगांव ब्लॉक के लिए आवेदन किया था। उन्हें पिपरोद में पदस्थ किया। पिपरोद में जब नेतराम ने ड्यूटी ज्वाइन कर ली तो 10 दिन बाद आदेश निरस्त कर दिया। इसकी शिकायत नेतराम ने संभागायुक्त से की। संभागायुक्त ने डीईओ को जमकर फटकार लगाई तो उन्होंने दोनों के आदेश निरस्त कर दिए और नेतराम को पिपरोद में ही पदस्थ कर दिया।

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