मां दंतेश्वरी को मन्नत में 50 लाख के गहने अर्पित:धमतरी के पवार परिवार ने दंतेवाड़ा पहुंच मंदिर में चढ़ाए एक किलो सोने से अधिक के आभूषण और चांदी का छत्र; इन्हीं से हुआ माता का शृंगार

जगदलपुर/दंतेवाड़ा10 महीने पहले
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मां दंतेश्वरी को धमतरी के एक पवार परिवार ने लगभग 50 लाख रुपए के सोने के आभूषण चढ़ाए हैं। - Dainik Bhaskar
मां दंतेश्वरी को धमतरी के एक पवार परिवार ने लगभग 50 लाख रुपए के सोने के आभूषण चढ़ाए हैं।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी को धमतरी के एक परिवार ने 1003.350 ग्राम सोने के आभूषण चढ़ाए हैं। मन्नत पूरी होने पर परिवार की ओर से यह आभूषण मां को अर्पित किए गए हैं। चढ़ाए गए आभूषणों की कीमत करीब 50 लाख रुपए बताई जा रही है। मंदिर के प्रधान पुजारी हरेंद्रनाथ जिया ने बताया कि सोने के गहनों सहित एक चांदी का छत्र भी इसमें शामिल है।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि, मां दंतेश्वरी के प्रति उनकी आस्था है। परिवार की परेशानियों को दूर करने के लिए उन्होंने कुछ महीनों पहले मां दंतेश्वरी से मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने पर करीब 1 किलो सोने के आभूषण का चढ़ावा करने की बात कही थी। परिवार के सदस्यों ने कहा कि, मां दंतेश्वरी ने उनकी मनोकामना पूरी कर दी है। इसलिए मन्नत के अनुसार माता रानी को सोने के जेवर चढ़ा रहे हैं।

मां को अर्पित किए गए सोने के आभूषणों में मुकुट, चूड़ी, हार, झुमका, बाजूबंद, अंगूठी, नथ, बिंदिया, चेन और पायल शामिल है। इन सोने के आभूषण से मां दंतेश्वरी का श्रृंगार किया गया है। फिलहाल परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आ सकी है। मंदिर प्रबंधन की ओर से बताया गया है पवार परिवार धमतरी के कुरूद तहसील के ग्राम गाड़ाडिह का रहने वाला है।

विदेशों से भी चढ़ता है चढ़ावा

आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को चढ़ावा केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी चढ़ता है। हालांकि, विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु मां दंतेश्वरी को ऑनलाइन माध्यम से मन्नतों के अनुसार पैसे चढ़ाते हैं। कई श्रद्धालु मां दंतेश्वरी के मंदिर पहुंच कर सोने-चांदी के आभूषण भी चढ़ा चुके हैं। हर साल आराध्य देवी को लगभग 80 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक का चढ़ावा चढ़ता है।

देवी के 52 शक्तिपीठों में से एक हैं मां दंतेश्वरी का मंदिर

दंतेवाड़ा जिले में स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर के साथ मान्यता यह है कि यहां पर माता सती के दांत गिरे थे। इसी वजह से इस इलाके का नाम दंतेवाड़ा और देवी का नाम दंतेश्वरी देवी पड़ा। यह देवी के 52 शक्ति पीठों में से एक है। यह मंदिर 136 साल पुराना है और इसके अंदरूनी हिस्से में लगे स्तंभ सीमेंट या चूना पत्थर के नहीं बल्कि सागौन की लकड़ी के हैं, जिस पर ओडिशा के शिल्पकारों की बनाई नक्काशियां हैं। यहां विराजमान भगवान विष्णु की मूर्ति भी लकड़ी से निर्मित है। जबकि मां दंतेश्वरी की प्रतिमा संगमरमर से निर्मित है।