रैली, धरना प्रदर्शन पर लगी पाबंदियों पर बोले माओवादी:यह गैर संवैधानिक फैसला, बेचापाल, पुसनार और किसान आंदोलन का करें समर्थन

जगदलपुर7 महीने पहले
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नक्सलियों के प्रवक्ता विकल्प ने प्रेस नोट जारी किया है। - Dainik Bhaskar
नक्सलियों के प्रवक्ता विकल्प ने प्रेस नोट जारी किया है।

छत्तीसगढ़ में रैली, आंदोलन, जनसभा, जुलूस जैसे कार्यक्रमों में लगी पाबंदियों का अब नक्सलियों ने भी विरोध शुरू कर दिया है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के प्रवक्ता और खूंखार माओवादी विकल्प ने प्रेस नोट जारी कर सरकार के इस फैसले को गैर संवैधानिक बताया है। विकल्प ने कहा कि, पिछले तीन महीने से नवा रायपुर में चल रहे किसान आंदोलन पर लाठी चार्ज की गई है।

बस्तर के बीजापुर जिले के बेचापाल और पुसनार गांव में ग्रामीण पुलिस कैंप को हटाने और अब तक बस्तर में जितने भी नरसंहार हुए हैं उसके विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन में बैठे हुए थे। उन्हें भी हटा दिया गया है। विकल्प ने कहा कि आंदोलनरत ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि सरकार तक उनकी बात पहुंचाई गई है। जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। लेकिन, निर्णय लेने की बजाय उन्हें आंदोलन स्थल से ही भगा दिया गया। माओवादियों ने लोगों से इन आंदोलनों का समर्थन करने अपील की है।

विकल्प ने कहा कि कोरोना काल मे कोरोना प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए चुनाव सभाएं, कुंभ मेला आयोजित करने वाली भाजपा और कांग्रेस पार्टी की सरकारें जनता के अधिकारों का हनन कर रही हैं। जिनका हर तरफ से कड़ा विरोध किया जाना चाहिए। सरकारों की जनविरोधी नीतियों के प्रति अपना विरोध दर्ज करना, अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करना संवैधानिक अधिकारी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। बैठक करने एवं शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करने का मूलभूत अधिकार है। जिनसे लोगों को वंचित करने की कोशिश की जा रही है।