CG-तेलंगाना बॉर्डर से ड्रोन हमले की ग्राउंड रिपोर्ट:ग्रामीण बोले- फोर्स ने बम गिराए, पर माना 2 दिन पहले वहां नक्सली थे

जगदलपुर/बीजापुर7 महीने पहले
ग्रामीण लगातार फोर्स पर आरोप लगा रहे हैं।

छत्तीसगढ़-तेलंगाना राज्य की सीमा पर स्थित छत्तीसगढ़ के गांवों में पुलिस ने ड्रोन से हवाई हमला किया है। यह आरोप ग्रामीणों ने लगाए हैं। ग्रामीणों ने ड्रोन बम के फटने के बाद उसके कुछ अवशेष भी इकट्ठा कर रखे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आधी रात करीब 40 से 50 बम आसमान से गिराए गए। बम फटने की आवाज इतनी तेज थी कि कान के पर्दे फट जाएं।

हालांकि ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जिन जगहों पर आसमान से बमबारी हुई है वहां 2-3 दिन पहले नक्सली मौजूद थे, लेकिन वे चले गए थे। फोर्स पर लगे इन आरोपों को बस्तर IG सुंदरराज पी ने गलत बताया है।

इस मामले की जानकारी मिलते ही दैनिक भास्कर की टीम मामले की हकीकत जानने के लिए इन्हीं गांवों में पहुंची। पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट.......

ग्रामीणों ने यह सामान भी दिखाया, दावा है कि यह बम के अवशेष हैं।
ग्रामीणों ने यह सामान भी दिखाया, दावा है कि यह बम के अवशेष हैं।

हम संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से करीब 250 किमी दूर बीजापुर जिले के पामेड़ इलाके के मेटागुड़म और बोतेतोम गांव पहुंचे। यह इलाका पूरी तहत से नक्सलियों का गढ़ है। जब इन गांवों में पहुंचे तो यहां सैकड़ों ग्रामीण पहले से ही मौजूद थे। जो अपने साथ बम फटने के बाद उसके कुछ अवशेष रखे हुए थे।

ग्रामीण हमें गांव के ही नजदीक जंगल में लेकर गए, जमीन में कुछ गड्ढे और पेड़ों में छेद के निशान दिखाए। ग्रामीणों ने कहा कि यह वही जगह है जहां 14-15 अप्रैल की देर रात ड्रोन से बम गिराए गए थे। बम फटने के बाद यह निशान पड़े हैं। एकाएक बमबारी की गई है। हालांकि वहां उस समय कोई भी ग्रामीण या फिर मवेशी नहीं थे।

2-3 दिन पहले नक्सली थे मौजूद
ग्रामीणों ने बताया कि जंगल में नक्सली भी मौजूद थे, लेकिन जिस जगह पर बम गिराया गया था वहां से 2-3 दिन पहले वे चले गए थे। अभी महुआ का सीजन चल रहा है। इसलिए इन्हीं जंगलों में ग्रामीण भारी संख्या में महुआ बीनने के लिए इकट्ठा होते हैं। यदि दिन के समय हमला होता तो कई ग्रामीणों और मवेशियों को नुकसान हो जाता।

इलाके के ग्रामीणों ने इस बमबारी का जमकर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अब तक हम विदेशों में युद्ध के दौरान आसमान से बम गिराया गया यह देखते थे। अब भारत में हमारे ऊपर ही बम गिराया जा रहा है, जिसका विरोध करते हैं।

जमीन में कुछ गढ्ढे दिखाए।
जमीन में कुछ गढ्ढे दिखाए।

तेलंगाना पुलिस पर भी संदेह
इन गांवों के ग्रामीण तेलंगाना में मजदूरी करने जाते हैं। मजदूरी करने गए कुछ ग्रामीणों ने गांव के ही अपने साथियों को बताया कि जब हमने छत्तीसगढ़ बॉर्डर को पार कर तेलंगाना की सीमा में प्रवेश किया तो वहां पुलिस ने ड्रोन बम के बारे में पूछा। इस बम से कितने लोग मरे? कितने घायल हुए? इस तरह की जानकारी भी ग्रामीणों से पूछी गई।

इसलिए ग्रामीण अब तेलंगाना पुलिस पर भी इस ड्रोन बमबारी का संदेह कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हमारा गांव तेलंगाना से नजदीक है, इसलिए हमें तेलंगाना पुलिस पर भी ड्रोन से हमला करने का संदेह है।

नक्सलियों ने जारी किया था प्रेस नोट
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता और खूंखार माओवादी विकल्प ने कुछ दिन पहले प्रेस नोट जारी कर तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की फोर्स पर ड्रोन हमला का आरोप लगाया था। विकल्प ने कहा था कि बस्तर के अलग-अलग जंगल में फोर्स ने ड्रोन से हमला किया है।

करीब 50 से ज्यादा बम गिराए गए हैं। लेकिन, इनसे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है। बोट्टेम, रासम, साकिलेर, कन्नेमरका, मड़पा समेत कई गांवों में रात में बमबारी की गई। इसमें PLGA को कोई नुकसान नहीं हुआ।

माओवादियों ने सबूत के तौर पर कुछ तस्वीरें भी जारी की थी, जिसमें ब्लास्ट के बाद के बम के अवशेष और पेड़ों में हुए निशान की तस्वीरें हैं।

ग्रामीण अपने पास ये अवशेष रखे हैं।
ग्रामीण अपने पास ये अवशेष रखे हैं।

बस्तर IG बोले- फोर्स को बदनाम कर रहे नक्सली
इस मामले में बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि माओवादी फोर्स को बदनाम कर रहे हैं। फोर्स ने किसी भी तरह की कोई बमबारी गांव में नहीं की है। यह सारे आरोप बेबुनियाद हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से अंदरुनी इलाके की जनता भी माओवादियों को किसी तरह से कोई समर्थन नहीं दे रही है, इसलिए नक्सली बौखलाए हुए हैं और किसी न किसी तरह से वे फोर्स को बदनाम करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

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