लापरवाही:पाइप बनाने वाली कंपनी को बाईपास का काम तभी 2 साल की जगह 5 साल में भी सड़क अधूरी

कांकेर9 महीने पहले
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  • वर्तमान कंपनी को सड़क बनाने का अनुभव ही नहीं, दूसरी कंपनी के दस्तावेजों पर लिया है काम

कांकेर में सड़क निर्माण का काम भगवान भरोसे ही चल रहा है। जिस सड़क को अपने तय समय सीमा बन जानी था, वह दुगना समय गंवाने के बाद भी अधूरा है। बात कर रहे है कांकेर बाईपास रोड की हो रही है। दरअसल महज दो साल में बनकर तैयार होने वाली कांकेर बाईपास पांच सालों बाद भी अधूरी है। जिस गति से काम चल रहा है उसके अनुसार सब कुछ ठीक रहा तब भी कार्य पूरा होने में अभी कम से कम दो साल और लगेंगे।

भास्कर ने बाईपास निर्माण में हुए इतने ज्यादा विलंब को लेकर पड़ताल की तो जो तथ्य सामने आए वो बेहद चौंकाने वाले है। कांकेर बाईपास बना रही कंपनी को सड़क बनाने का पहले का कोई अनुभव है ही नहीं। यह कंपनी मूलत: एक फाइनेंस कंपनी की विंग है जो अब तक केवल पाइप बनाने का ही काम करती थी। सड़क बनाने का अनुभव नहीं होने के कारण इस कंपनी ने बाईपास बनाने का काम लेने के लिए मुंबई की एक सड़क बनाने वाली कंपनी के साथ करार किया। उसके दस्तावेजों के आधार उसके नाम काम लिया। अब सड़क बनाने में यही अनुभवहीनता भारी पड़ रही है।

बाद में पता चला पाइप बनाती है ये कंपनी
केंद्र सरकार के भूतल परिवहन विभाग ने रायपुर से जगदलपुर तक तीन पैच पहला धमतरी से नाथिया नवागांव, दूसरा माकड़ी से केशकाल तथा तीसरा बेड़मा से जगदलपुर तक सड़क व बाईपास बनाने टेंडर निकाला था। इसके लिए देश की नामीगिरामी कंपनियों ने टेंडर भरा। धमतरी से नाथिया नवांगांव व जगदलपुर से बेड़मा तक का काम बारबरिक कंस्ट्रक्शन कंपनी रायपुर को मिला जिसने निर्धारित समय में काम पूरा कर लिया। माकड़ी से केशकाल का काम वलेचा कंस्ट्रक्शन मुंबई को मिला। विभाग ने कंपनी के सड़क बनाने में अनुभव को देखते बिना किसी शंका उसे काम दे दिया। जब इस कंपनी को काम दे दिया गया और इस कंपनी ने काम शुरू किया तो बाद में पता चला कि यह काम वलेचा कंस्ट्रक्शन के नाम से पाइप बनाने, पाइप लाईन बिछाने तथा फाइनेंस सेक्टर में काम करने वाली श्रीराम इंजीनियरिंग प्राक्यूमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लिया है।

कंपनी को देख भाग रहे पेटी ठेकेदार
बाईपास निर्माण में देरी का दूसरा कारण कंस्ट्रक्शन कंपनी का रवैया है। विभाग किसी भी तरह काम पूरा कराने कंस्ट्रक्शन कंपनी के लिए पेटी ठेकेदार के रूप में काम करने सड़क तथा पुल बनाने में अनुभव रखने वाले ठेकेदारों का प्रबंध करता है। कंपनी द्वारा समय पर पैसा नहीं देने के कारण पेटी कांट्रेक्टर काम छोड़ भाग रहे हैं। दूध नदी में बनने वाले पुल के 28 पाइल तैयार हो जाते, लेकिन पैसे की वजह से नहीं हुआ।

308 में 104 करोड़ का हुआ काम
कुल 308 करोड़ रुपए के काम में अबतक 104 करोड़ का ही काम हो पाया है। इसमें से 83 करोड़ का भुगतान कंपनी को किया गया है। कंपनी के रवैये को देखते 4 करोड़ की पेनाल्टी लगाई जा चुकी है।

4 साल में 70 नोटिस व दो प्री टर्मिनेशन
कंपनी के अनुभवहीनता व काम करने के तरीके को इसी से समझा जा सकता है कि उसे पांच सालों में विभाग ने 70 से अधिक बार नोटिस और दो बार प्री टर्मिनेशन लेटर भी जारी किया जा चुका है। फिर भी कंपनी का रवैया नहीं बदला। कंपनी को टर्मिनेट कर नई कंपनी को ठेका देने विभाग को लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा जिसमें दो साल का समय लग जाएगा। नई कंपनी को काम शुरू करने में भी समय लगेगा।

बरसात के बाद होगा काम शुरू
नेशनल हाईवे प्राधिकारण विभाग के एसडीओ संतोष नेताम ने बताया कंपनी की निर्माण गति धीमी होने से सड़क व बाईपास निर्माण मं समय लग सकता है। बरसात के बाद कार्य करने को बैठक ली जा रही है।

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