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कठिन है डगर:बाइक को कंधे पर लादकर कराते हैं नदी पार, पानी बढ़ने से 10 किमी का सफर हो जाता है 50 किमी का

कोयलीबेड़ा12 दिन पहले
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नदी तट में कीचड़ होने से वहां तक बाइक को चढ़ाना हो जाता है मुश्किल। - Dainik Bhaskar
नदी तट में कीचड़ होने से वहां तक बाइक को चढ़ाना हो जाता है मुश्किल।

कोयलीबेड़ा जिले का सबसे पिछड़ा विकासखंड है। आजादी के सात दशक बाद भी अभी तक यहां सड़कें तथा पुल नहीं बन पाए हैं। इसी की वजह से विकासखंड मुख्यालय कोयलीबेड़ा से चारगांव नदी के उस पार बसे 3 पंचायतों के 15 गांव बारिश में टापू बन जाते हैं। अभी नदी में पानी दो से ढाई फीट ही है इसलिए लोग विकासखंड मुख्यालय पहुंचने इस प्रकार बाइक को डंडे के सहारे कंधे पर लादकर नदी पार कराना पड़ता है।

पानी बढ़ा तो यह संभव नहीं होगा। तब इन 3 पंचायतों के 15 गांव के लोगों को अपने विकासखंड मुख्यालय कोयलीबेड़ा पहुंचने 10 किमी का सफर अंतागढ़ होकर 50 किमी का हो जाएगा। टैक्सी या बस आदि चलती नहीं।

जिनके पास बाइक है वह ऐसा कर लेता है, जिनके पास नहीं उनके सामने यह विकल्प भी नहीं। उन्हें नदी में पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है। कोयलीबेड़ा से चारगांव नदी उस पार चारगांव पंचायत की दूरी 10 किमी, छोटे बोदेली की दूरी 13 किमी तो अंतिम पंचायत पोरोंडी की दूरी 17 किमी है।

03 पंचायतों के 15 गांव बारिश के दिनों में नदी में पानी बढ़ने के कारण बन जाते हैं टापू

बाइक पार कराने ग्रामीण करते हैं सहयोग

जब बाइक को नदी पार कराना हो तो पहले गांव के लोगों से संपर्क कर सहयोग मांगना पड़ता है। यहां के लोग सहयोगी है, आसानी से मदद कर देते हैं। लौटने के दौरान भी खुशी-खुशी मदद करते हैं।

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