मास्क है जरूरी:कोरोना बम बनकर घूम रहे संक्रमित, ये गलती तो पूरे जिले को ले डूबेगी

कांकेर6 महीने पहले
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कांकेर। जांच केंद्र से निकल घर न जाकर भीड़ में खड़ा होकर दवा खरीदता वही पाॅजिटिव मरीज। - Dainik Bhaskar
कांकेर। जांच केंद्र से निकल घर न जाकर भीड़ में खड़ा होकर दवा खरीदता वही पाॅजिटिव मरीज।
  • जांच के बाद दवा व सामान खरीद लोगों से मिलने के बाद हो रहे होम आइसोलेट
  • भास्कर की टीम ने 3 दिन तक जिला अस्पताल जांच केंद्र से निकलने वाले पॉजिटिव मरीजों पर रखी नजर

जिले में कोरोना संक्रमण को लेकर हर स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। जांच केंद्र से निकलने के बाद पॉजिटिव मरीज कोरोना बम बन घूम रहे हैं। एंटीजन रिपोर्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद गाइड लाइन का पालन नहीं करते लोग। स्वयं दवा लेने मेडिकल पहुंच रहे हैं। ठेलों से सामान व फल खरीद रहे हैं। इसके बाद रास्ते में लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। पॉजिटिव मरीजों की यही लापरवाही भारी पड़ रही है तथा लगातार जिले में कोरोना मरीजों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

जिला अस्पताल में संचालित कोरोना जांच केंद्र में रोज लंबी लाइन लग रही है। भीड़ में पॉजिटिव व सामान्य मरीज एक दूसरे के इतने करीब खड़े होते हैं की यहां से ही संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। भास्कर टीम पिछले तीन दिनों से जिला अस्पताल जांच केंद्र से बाहर निकलने वाले पॉजिटिव मरीजों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसमें जो हकीकत बाहर आई वह चौंकाने वाली है। 27 अप्रैल को यहां से बाहर निकलने के बाद एक मरीज पॉजिटिव आने के बाद अस्पताल के निकट खड़ी वाहन से टिक कुछ देर खड़ा रहा।

इसके बाद कुछ दूर खड़ी अपनी बाइक को उठा नए बसस्टेंड की ओर गया। 27 अप्रैल को ही एक महिला अपने पुरूष रिश्तेदार के साथ जांच कराने पहुंची। महिला पॉजिटिव आई तो दुकान के बाहर खड़ी रही लेकिन पूरे समय उसके संपर्क में रहा रिश्तेदार दुकान में सोशल डिस्टेसिंग रखे बिना दवा खरीदता रहा। इसके पहले भी रिश्तेदार अस्पताल में घूमता रहा। 28 अप्रैल को भी एसी ही स्थिति एक बालक व उसकी मां के साथ दिखी। पॉजिटिव आया बालक मास्क निकाल जांच केंद्र के आसपास घूमता रहा। टोकने पर मास्क पहना।

28 अप्रैल को जांच केंद्र से बाहर निकली पॉजिटिव महिला अपने साथ आए पुरूष के साथ पहले दवा दुकान पहुंची फिर यहां से फल ठेले पहुंचे। 29 अप्रैल को पुरूष पॉजिटिव आने के बाद वह दवा दुकान में भीड़ में करीब 20 मिनट पर्ची लिए खड़ा रहा। इसी दिन एक युवक केंद्र से निकल बाहर खड़े लोगों से बात करने लगा। इसके बाद अपना वाहन उठा वहां से चला गया।

नियमों को नजर अंदाज करने से परिवार भी संक्रमित

पॉजिटिव पाए जाने के बाद सामान्य मरीज से होम आइसोलेशन में जाने एक फार्म भराया जा रहा है की उनके घर में अलग शौचालय व बाथरूम है या नहीं। मरीज घर में अलग सुविधा होने झूठी जानकारी दे रहे हैं। होम आइसोलेशन में रहने वाले कोविड-19 के मानक का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे पूरा परिवार संक्रमित हो रहा है। जिले में 4 हजार से अधिक पॉजिटिव मरीज होम आइसोलेशन में हैं। 29 अप्रैल को होम आइसोलेशन वालों संख्या 4415 पर थी।

मरीजों की सही हिस्ट्री ही नहीं आ रही सामने

जो पॉजिटिव पाए जा रहे हैं उनकी हिस्ट्री भी सामने नहीं आ रही है।अधिकांश मरीज कहां से संक्रमित हुए इसकी जानकारी नहीं है। वे अपनी भी जानकारी सही तरीके से नहीं दे रहे हैं।

जब तक हाथ में आती है पर्ची, हो जाती है देर

तीनों दिनों में ऐसे कई पॉजिटिव मरीज दिखे जो जांच केंद्र से निकलने के बाद सीधे निकट दवा दुकान पहुंच भीड़ में खड़े हो गए। दुकानदार व आसपास लोगों को जानकारी तब हुई जब पर्ची देखी। इसके बाद पॉजिटिव मरीजों को अलग दूर खड़ा होने कह गया। तब तक भीड़ में पहुंचने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया। कई लोगों को तो जानकारी नहीं है कि उनके करीब कोरोना पॉजिटिव मरीज खड़ा है।

जो मरीज काे ला रहे वे भी शहर में बेरोकटोक घूम रहे

जिन घरों में पॉजिटिव मरीज हैं उनकी तीमारदारी करने वाले परिजन बिना रोक टोक शहर में घूम रहे हैं। जांच के लिए मरीजों को अस्पताल लाने वालों को बाहर घूमते देखा जा सकता है। जबकि उन्हें भी कुछ दिन होम क्वारिन्टाइन में रहना है।

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