किसानों की परेशानी / बांध क्षतिग्रस्त, 2 हजार हेक्टेयर में सिंचाई नहीं हुई

Dam damaged, no irrigation in 2 thousand hectares
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Dam damaged, no irrigation in 2 thousand hectares

  • 19 योजनाओं के लिए मिली है प्रशासकीय स्वीकृति लेकिन काम केवल दो पर ही हो रहा

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

कांकेर. जिले में सिंचाई बांधों व तालाबों की स्थिति अच्छी नहीं होने से सिंचाई का रकबा हर साल घटता जा रहा है। जल संसाधन विभाग हर साल रबी व खरीफ फसल में सिंचाई के लिए पानी देने का लक्ष्य रखता है, लेकिन लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है। 2019-20 में भी क्षतिग्रस्त व जीर्ण-शीर्ण नहरों के चलते किसानों को लक्ष्य के अनुरूप पानी नहीं मिल पाया। 
विभाग भी सिंचाई में कमी का मुख्य कारण नहरों के जीर्णशीर्ण व क्षतिग्रस्त होने को मान रहा है। सिंचाई की कमी की पूर्ति के लिए विभाग को 19 योजनाओं के जीर्णोद्धार व नहर लाइनिंग कार्य के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। वर्तमान में 6 योजना पर ही कार्य चल रहा है। 13 योजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। विभाग ने 50 कार्यों का प्राक्कलन मनरेगा के तहत कराने प्रशासकीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा है। फिलहाल लक्षित 16 हजार 510 हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले केवल 14 हजार 462 हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई हो पाई है। 
जिले में जल संसाधन विभाग के दो मध्यम सिंचाई परियोजना व 98 लघु सिंचाई परियोजना हैं। इस साल मयाना तालाब से रबी फसल के लिए सिंचाई के लिए पानी ही नहीं दिया गया। वहीं परलकोट जलाशय से 1570 हेक्टेयर में ही सिंचाई के लिए पानी दिया गया।

कोड़ेजुंगा सिंचाई तालाब की स्थिति खराब
ग्राम कोड़ेजुंगा में सिंचाई बांध 20 साल पहले 7 एकड़ में बना है। 2016 में 48.33 लाख की लागत से मनरेगा से इसकी मरम्मत भी कराई गई। पानी का रिसाव होने से सितंबर-अक्टूबर तक तालाब में पानी कम हो जाता है। किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस साल सिर्फ  6 किसानों को ही पानी मिल पाया। 

मरम्मत के लिए राशि की मांग की जा रही 
कांकेर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता आरआर वैष्णव ने कहा कि कई सिंचाई तालाब की स्थिति अच्छी नहीं है। जिन सिंचाई तालाब की स्थिति अच्छी नहीं है वहां मरम्मत के लिए प्रयास किया जा रहा है। शासन से बजट की मांग की जा रही है। कई सिंचाई योजनाओं के लिए शासन से स्वीकृति मिल भी रही है।

22 एकड़ में फैला तालाब सिर्फ निस्तारी के आ रहा काम
ग्राम माटवाड़ा मोदी में भी 22 एकड़ में सिंचाई तालाब का निर्माण किया गया है। गर्मी के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाता। तालाब में थोड़ा पानी होने से सिर्फ यह लोगों के निस्तारी के लिए उपयोगी है। तालाब में नाली से पानी देने लगाई मशीन भी गायब हो गई है। 

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