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एलिफेंट रिटर्न:3 महीने बाद लौटे हाथी, पहली रात में ही खड़ी फसलों को रौंदा, पेड़ भी उखाड़े

कांकेर/नरहरपुरएक महीने पहले
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  • महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी के बाद हाथियों के नए कारीडोर में चौथे जिले के रूप में कांकेर शामिल, प्रभावित किसान मांग रहे हैं प्रशासन से मुआवजा

बार दल के हाथियों का झुुंड तीन महीने बाद फिर बुधवार रात दल प्रमुख चंदा के नेतृतव में कांकेर जिले के नरहरपुर इलाके में घुसा। इस बार इलाके में खड़ी फसल होने से नुकसान का दायरा बढ़ रहा है। रात में ग्राम मुरूमतरा में घुसे हाथियों ने जमकर उत्पात मचाते फसलों को रौंद दिया। कुछ पेड़ भी उखाड़ दिए। इलाके के किसानों में दहशत के साथ चिंता भी बढ़ गई है। बुधवार 16 सितंबर को धमतरी जिले के माडमसिल्ली गांव में मौजूद हाथियों का दल रात में भोजन की तलाश में नरहरपुर विकासखंड के ग्राम मुरूमतरा में घुस गया। माडमसिल्ली में ग्रामीण शोर कर हाथियों को खदेडऩे लगे तो हाथी रात में मुरूमतरा में पहुंच गए। यहां कई किसानों के खेतों में खड़ी धान फसल को रौंदते तहस नहस कर दिया। भोजन की तलाश में भटकते हुए जंगल में कुछ पेड़ भी उखाड़ दिए। रात भर मुरूमतरा में उत्पात मचाने के बाद हाथी सुबह वापस बस्ती से दूर धमतरी जिले के पहाड़ीकोना क्षेत्र चले गए। हाथी के कांकेर जिले के आसपास होने की सूचना के चलते कांकेर वनविभाग अमला रात में गांव में सुरक्षा में डटा रहा। गुरूवार दिन भर हाथी दल ने मुरूमतरा जंगल व पहाड़ी कोना में डेरा डाला हुआ था। किसान हिंसाराम मंडावी, रामधीन, रामाधार जुर्री, रोहित कुमार, आत्माराम गोविंद, रामचंद्र कुमार, कमल बारसादी, हीरा सिंह, सुखदेव, कीर्तनराम, राम कुमार, भगोलीराम नेताम, कमलूराम ने बताया उनकी कई एकड़ फसल को हाथियों ने रौंद दिया जिससे काफी नुकसान हुआ। वनविभाग मुआवजा दे।

20 जून को आखिरी बार दिखे थे हाथी
जिले में 7 जून को यही हाथियों का दल नरहरपुर इलाके में पहुंचा था। अंतिम बार 20 जून को ग्राम पंचायत मारवाड़ी में देखा गया था। इस दौरान बागडोंगरी, मुरूमतरा, कहियापाहड़, मारवाड़ी, बतबनी, किशनपुरी जंगल में घुमाते रहे।

एक साल पहले आए थे ‘राम-बलराम’
एक साल पहले मई में आए दो टस्कर हाथी राम बलराम पहुंचे थे। इनके आने का रास्ता भी यही था। राम बलराम वापस नहीं जाकर कुलगांव, मलांजकुड़ूम, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा होते हुए महाराष्ट्र की ओर चले गए थे।

हाथियों का नया ठिकाना हो सकता है कांकेर
हाथियों के वापस आने से संभावना है हाथियों का नया ठिकाना कांकेर के जंगल हो सकते हैं। जिस इलाके में हाथी है उन इलाकों में बांध का पानी होने के साथ हाथियों के लिए जंगल में भरपूर भोजन है। हाथियों को दलदल वाले इलाके पंसद आते हैं जो बड़े बांध के किनारे कांकेर जिले में हैं।

हाथियों के नए कॉरीडोर में कांकेर भी शामिल​​​​​​​
वन विभाग के अनुसार प्रदेश में हाथी चार जिलों में ही पिछले कई दिनों से घूम रहे हंै। कांकेर, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद जिला हाथियों का नया कॉरीडोर बन गया है। हाथी महासमुंद के बागबहरा से गरियाबंद के छुरा व धमतरी जिले से होते कांकेर के नरहरपुर डुबान क्षेत्र तक आते हैं।​​​​​​​

ग्रामीणों को खेत में सोने मनाही, विभाग तैनात
नरहरपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी कैलाश ठाकुर ने बताया वर्तमान में हाथियों के लौटने से किसानों को फसल की रक्षा करने खेत की लारी में सोने मना किया गया है। हाथियों व ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए अमला तैनात है। फसल का जो नुकसान हुआ है उसके मुआवजे के लिए पटवारी से आंकलन कराया जा रहा है।​​​​​​​

एक हाथी की मौत के बाद भी फिर से तादाद हुई 22
पिछले बार 21 हाथियों का दल कांकेर पहुंचा था। धमतरी के उरपूटी गांव में एक छोटे हाथी की दलदल में फंसने से मौत हो गई थी। इसके बाद 20 हाथी इस दल में थे। जून के अंत में हाथियों का दल धमतरी होते गरियाबंद की ओर चला गया था। वहां से वापस आने के बाद इस बार दल में 22 हाथी हैं। नेतृत्व चंदा हथिनी ही कर रही है। बताया जा रहा है कि सुरक्षा के लिए आगे पीछे दो टस्कर हाथी चल रहे हैं। दल में बच्चों की संख्या बढ़ी है।​​​​​​​

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