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ठगी व जालसाजी का मामला:मुआवजा देने से बचने फर्जी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए, धोखाधड़ी का केस

कांकेर2 महीने पहले
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सिकसोड़ थाना में युवक के खिलाफ ठगी व जालसाजी का अपराध पंजीबद्ध किया गया है। युवक द्वारा सड़क हादसे में मृत व्यक्ति का मुआवजा देने से बचने बीमा के फर्जी दस्तावेज बना कोर्ट में ही पेश कर दिया गया। कोर्ट ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने कहा। बीमा कंपनी ने जब इसकी जांच पड़ताल की तो पता चला यह फर्जी दस्तावेज है। युवक ने केशकाल के जिस बीमा केंद्र से बीमा कराने की बात कही पुलिस ने उसे पूरे कोंडागांव जिले में तलाश किया लेकिन वह केंद्र नहीं मिला। इस पता नाम का पूरे जिले में केंद्र नहीं है।

सिकसोड़ थानांतर्गत जनवरी 2019 में बाइक सवार युवक ने एक ग्रामीण काे टक्कर मार दी थी। हादसे में ग्रामीण की मौके पर मौत हो गई थी। बाइक चालक भिकेश उर्फ राहुल उर्फ विक्की सोनवानी 30 वर्ष पिता ललित निवासी मरकाटोला कोरर है। पुलिस ने मामला कोर्ट में पेश किया। मृतक को मुआवजा देने से बचने आरोपी युवक भिकेश कुमार ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के नाम बीमा के फर्जी दस्तावेज बना उसे पुलिस को सौंप दिया। कोर्ट ने कंपनी को मृतक को राहत राशि का भुगतान करने कहा। कंपनी ने बताया उनके यहां चालक के वाहन का कोई भी इंश्योरेंस जारी नहीं किया गया है। पुलिस ने जांच में पाया युवक ने फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार किए हैं।

17 जून को युवक के खिलाफ धारा धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। शिकायत पर जब पुलिस ने जांच करते आरोपी का बयान लिया तो उसने बताया कि रतना फ्यूल में काम करने के दौरान पेट्रोल पंप के बाजू में रह रहे आदमी माधव ध्रुव को अपनी बाइक क्र.सीजी 19 बीई 4737 का बीमा कराने पुराना बीमा एवं पैसा दिया था। किन्जल मोबाइल एवं च्वाइस सेंटर केशकाल से बनाकर लाया था। पुलिस ने जांच की तो पूरे कोंडागांव में यह सेंटर नहीं मिला। आरोपी ने बीमा कराने जिस व्यक्ति का नाम लिया उसकी मौत हो चुकी है।

ऐसे तैयार किया फर्जी दस्तावेज, पॉलिसी नंबर से खुला राज
घटना के बाद युवक ने अपने बीमा के पुराने दस्तावेज में छेड़छाड़ कर नकली नया बीमा दस्तावेज बनाया। पुराने पालिसी नंबर में ही 2016 के स्थान पर 2018 लिखने के साथ ही अपना नाम मिकेश की जगह भिकेश लिखा। दस्तावेज का कवर नंबर पुराना ही लिखा लेकिन पालिसी अवधि वर्ष 2016 को हटाकर 2018 तथा वाहन निर्माण का साल भी 2016 के स्थान पर 2018 कर दिया। इसे जारी करने की तारीख भी मार्च 2016 के स्थान पर मार्च 2018 की। लेकिन जो पालिसी नंबर लिखा था उसकी जांच करने पर पूरा मामला खुल गया। पालिसी नंबर 2018 में राजनांदगांव के एक ट्रक के बीमा का नंबर था।

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