उत्तर बस्तर की एक लाख महिलाएं आत्मनिर्भर:कोरोना काल में व्यापारियों ने हाथ खड़े किए तो गांव-गांव में वनोपज खरीदने से लेकर इन्हीं महिलाओं ने मास्क तक बनाए

कांकेर9 महीने पहले
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  • यहां अपना काम शुरू करने 8 साल से दिया जा रहा लोन, गोठानों का काम भी महिलाओं ने संभाल लिया

आज महिला दिवस पर हम बात कर रहे हैं उत्तर बस्तर यानी कांकेर जिले की महिलाओं के बारे में। यहां महिलाओं को आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाने शासन ने बिहान कार्यक्रम शुरू किया। इसमें महिलाओं का समूह बना लोन दिया जाता है जिससे वे व्यापार या गृह उद्योग शुरू कर सकें। शुरू में लगा अंदरूनी गांव की चूल्हा चक्की तक सीमित रहने वाली महिलाएं कैसे व्यापार कर पाएंगी। पहले साल बिहान से नरहरपुर ब्लॉक की ही महिलाएं जुड़ीं। इसके बाद कारवां बढ़ने लगा। आठ सालों की यात्रा में महिलाओं ने साबित कर दिया कि वे उन्हें अवसर मिले तो वे हर काम कर सकती हैं। कोरोना काल में इन्ही महिलाओं ने संकट के समय मास्क बनाए, व्यापारियों ने हाथ खड़े किए तो गांव गांव में वनोपज खरीदी की। गोठानों का काम भी महिलाओं ने संभाल लिया है। आठ सालों में बिहान कार्यक्रम से 9497 समूहों की एक लाख पांच हजार दो सौ इकत्तीस महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। हर माह ये महिलाएं अपनी मेहनत से 8 से 10 हजार तक कमा परिवार चलाने में सहयोग कर रही हैं। बिहान कार्यक्रम 2012-13 में जब शुरू हुआ तब से महिलाएं इससे जुड़कर व्यापार तथा गृह उद्योग चला रही हैं।

उमराह क्लस्टर सबसे सफल : उमरादाह क्लस्टर जिले में सबसे सफल है। यहां 405 समूहों से 25 गांव की 5902 महिलाएं जुड़ी है। इसी क्लस्टर से जुड़ी महिलाएं श्रीगुहान गोठान में वर्मी खाद, सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, बतख पालन, मशरूम उत्पादन कर रही हैं।

हर अवसर को भुनाया : कोरोना काल में मास्क की मांग बढ़ने से कालाबाजारी शुरू हो गई थी। ऐसे समय में बिहान से जुड़ीं 35 समूह की महिलाओं ने रात दिन मास्क बनाया जो हाथों हाथ बिके। 35 समूहों की महिलाओं ने एक करोड़ के मास्क बेचे जिससे 5 लाख की शुद्घ आमदनी हुई।

गांव की महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर : जिला पंचायत सीईओ डा संजय कन्नौजे ने कहा बिहान कार्यक्रम से जुड़न से गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं। वे अपने परिवार को भी मदद कर रही हैं। इससे महिलाओं के सामाजिक जीवन में काफी बदलाव आया है।

ऐसे बढ़ती गईं सफलता के मार्ग पर
धनेलीकन्हार की 35 वर्षीय सुनीता सलाम जय लक्ष्मी समूह सदस्य है। यह समूह पहले सिर्फ बचत तक सीमित था। सुनीता ने साबुन बनाने प्रशिक्षण लिया और अपने समूह की 9 महिलाओं को भी प्रेरित करते इस काम से जोड़ा। इनके बनाए साबुन गांव के अलावा बिहान बाजार में हाथों हाथ बिकने लगे। कोरोना काल में सैनिटाइजर, काढ़ा बनाकर बेचा। समूह की महिलाएं हर माह 7 से 8 हजार तक कमा रही हैं।

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