BSP-BSF के अस्पताल में डॉक्टर नहीं:5 साल बाद भी नहीं हुई नियुक्ति, अंतागढ़ अस्पताल से मिलने वाली पैरासिटामॉल के भरोसे ANM करती हैं इलाज

कांकेर7 महीने पहले
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22 गांव के ग्रामीणों को सुविधा देने के लिए खोला गया था अस्पताल। - Dainik Bhaskar
22 गांव के ग्रामीणों को सुविधा देने के लिए खोला गया था अस्पताल।

छत्तीसगढ़ के कांकेर में अंतागढ़‎ रावघाट प्रोजेक्ट के तहत स्वास्थ्य सुविधा मुहैया‎ कराने के लिए BSP ने अस्पताल तो खोल दिया, लेकिन 5 साल बाद भी सुविधाएं मुहैया नहीं करा सके हैं। अस्पताल में न तो डॉक्टर हैं और न ही जरूरी स्टाफ। दवाओं की सप्लाई भी बंद है। हालत यह है कि सिर्फ पैरासिटामॉल और एमोक्सिलिन के भरोसे मरीजों का इलाज हो रहा है। यह दवाएं भी अंतागढ़ सरकारी अस्पताल से मिल रही है। जिसे यहां पदस्थ ANM बांटती है।

दरअसल, रावघाट प्रोजेक्ट के तहत इलाके के माइंस प्रभावित 22 गांव के‎ ग्रामीणों को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा‎ देने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि बार-बार मांग करते रहे। ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। इस पर साल 2015 में BSP ने दंडकवन BSF कैंप के बाहर 10 बेड का अस्पताल खोल दिया। संचालन की जिम्मेदारी BSF 139 बटालियन को दी गई। इसके बाद अस्पताल शुरू हो गया, लेकिन स्टाफ के नाम पर 2016 में पंचायत की ओर से दो ANM की भर्ती कर दी गई।

दंडकवन में बना अस्पताल सिर्फ दो ANM के भरोसे हो रहा संचालित।
दंडकवन में बना अस्पताल सिर्फ दो ANM के भरोसे हो रहा संचालित।

डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक की जिम्मेदारी संभालती हैं ANM
अब यही ANM अस्पताल में डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक की जिम्मेदारी संभालती हैं। इस अव्यवस्था को लेकर न तो BSP और न ही BSF के अफसर बोलने को तैयार हैं। दैनिक भास्कर के प्रतिनिधि कैंप में मिलने पहुंचे तो सवाल सुनकर खामोशी छा गई। वह डेढ़ घंटे‎ तक गेट पर डटे रहे, लेकिन उन्हें कोई‎ जवाब देने तैयार नहीं था। BSP ने जब यहां अस्पताल‎ खोला तो इसके लिए BSF ने टीन शेड‎ भवन बना दिया, जो कैंप के‎ ठीक सामने है।

BSF के दो डॉक्टर थे, लेकिन फिर हटा लिए गए
बताया जा रहा है कि जब कैंप शुरू हुआ तो यहां पर BSF के डॉक्टर ही देखभाल‎ करते थे, लेकिन सालभर बाद स्थिति देख‎ यहां दो ANM को पंचायत स्तर पर रखा गया। ANM को यह‎ भी पता नहीं है कि वे BSF के कर्मचारी हैं या BSP के।‎ उनका वेतन BSP पहले ‎BSF को भेजती है। इसके‎ बाद BSF वेतन को चेक के‎ रूप में ANM को देती है। ऐसे में अगर ये BSP के कर्मचारी हैं तो फिर इन्हें ही सीधे तौर पर वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा है।

BSP की ओर से दंडकवन में बनाया गया अस्पताल।
BSP की ओर से दंडकवन में बनाया गया अस्पताल।

दवाओं की‎ एक्सपायरी डेट‎ तक करीब‎
शुरू के सालों में बीएसपी यहां‎ साल में एक बार दवाइयों की‎ खेप भेजती थी। कई प्रकार की‎ ब्रांडेड दवाइयां होती थी लेकिन‎ उनकी एक्सपायरी डेट काफी‎ करीब होती थी। 3 से 6 माह‎ के बाद वे इस्तेमाल से बाहर हो‎ जाती। एक दवा की संख्या‎ पांच हजार तक होती थी जिसे‎ एक से दो माह में खपाने का कहा‎ जाता था। अधिकांश दवाइयां‎ कम समय की होने के कारण‎ उपयोग से बाहर हो जाती थी।‎ इसके बाद उन्हें वहीं नष्ट कर‎ दिया जाता था। पिछले दो साल‎ से बीएसपी यहां दवाइयां नहीं‎ भेज रही है।‎

पांच साल पहले 36 करोड़ रुपए‎ जमा, सुविधा अब तक नहीं‎
रावघाट प्रोजेक्ट के तहत इलाके में जंगल कटाई करने व‎ काम करने ईको डेवलपमेंट के तहत बीएसपी ने 36‎ करोड़ रुपए साल 2016 में जमा कराए थे। इसमें 10‎ करोड़ रुपए में अस्पताल, 5 करोड़ रुपए में स्कूल तथा‎ शेष रकम से अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया करानी है।‎ आज तक ये सुविधा मुहैया कराने पर कोई काम नहीं‎ हो पाया है। टीन के शेड में बिना डॉक्टर के अस्पताल‎ संचालित हो रहा है।‎

हर 6 माह में आधा ट्रक दवाई, फिर भी अस्पताल नहीं पहुंचती
अस्पताल संचालन में कई गड़बड़ी दिखाई दे रही है। BSP ने जो जवाब‎ दिया है, उससे ही कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बीएसपी के अनुसार‎ दंडकवन में हर 6 माह में आधा ट्रक दवाई भेजी जाती है। महज 10‎ बिस्तर वाले अस्पताल के लिए इतने बड़े पैमाने पर आई दवाएं आखिर‎ जाती कहां है? इलाके में मोबाइल स्वास्थ्य सुविधा है तो इलाज के लिए‎ ग्रामीण क्यों भटक रहे हैं? डिस्पेंसरी है तो बिस्तर क्यों लगाया गया है?‎

अफसर बोले- सिर्फ डिस्पेंसरी, बेड की सुविधा यहां आने वालों के लिए
BSP के GM विशेष‎ समीर कहते हैं कि दंडकवन में‎ अस्पताल नहीं है, वहां सिर्फ डिस्पेंसरी है। इसका संचालन बीएसएफ‎ कर रही है। बीएसपी सिर्फ‎ नर्स के वेतन का भुगतान व दवाओं की‎ सप्लाई करती है। हर छह माह‎ में आधा ट्रक दवाएं सप्लाई की‎ जाती है। वहां बिस्तर आने‎-जाने वालों के लिए लगाया‎ गया है। इलाके में स्वास्थ्य‎ सुविधा मुहैया कराने बीएसपी‎ 22 गांव में रामकृष्ण मिशन‎ के साथ मिलकर मोबाइल‎ हास्पिटल सेवा चला रही है‎, जिससे ग्रामीणों का इलाज‎ कराया जा रहा है।‎