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अव्यवस्था:गोठान नहीं, 27 हजार पशु पालकों में से 4050 ही बेच रहे गोबर

कांकेर6 दिन पहले
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  • गोठान ग्राम से अन्य गांवों को भी जोड़ा गया है लेकिन दूरी अधिक होने से पशुपालक गोबर बेचने वहां तक नहीं पहुंच पा रहे

जिले में सिर्फ गोठान वाले गांव में ही गोधन न्याय योजना संचालित हो रही है। इसमें गोबर की खरीदी हो रही है। अन्य दूसरे गांव में गोबर की खरीदी ही नहीं हो रही है। जहां पर कई पशु पालक हैं। इन गांवों को दूसरे गांवों में जोड़ा गया है, लेकिन ये गांव वाले दूसरे गांव में गोबर की बिक्री करने के लिए नहीं जा पा रहे हैं। गोठान के अंतर्गत जिले भर में 27 हजार पशु पालक हैं, जिसमें से सिर्फ 4050 पशुपालक ही गोबर की बिक्री कर रहे हैं। 20 जुलाई को गोधन न्याय योजना संचालित हो रही है। इसमें 203 जगह पर गोबर की खरीदी की जा रही है। इसमें जिलेभर में 457 ग्राम पंचायत है और 1069 गांव है, जिसमें सिर्फ 197 ग्राम पंचायत में ही गोबर की खरीदी 2 रुपए किलो में की जाती है। इसके अलावा कांकेर नगरपालिका के साथ नगर पंचायत नरहरपुर, चारामा, पखांजूर, कोयलीबेड़ा व अंतागढ़ में गोबर खरीदी के लिए सेंटर बनाया गया है। अभी तक की स्थिति में 42, 857 क्विंटल गोबर की खरीदी हुई है। इसमें 85 लाख 71 हजार रुपए पशु पालकों को वितरण हुआ है। काफी सारे पशु पालक गोबर की बिक्री ही नही कर रहे हैं।

जिन गांवों में गोठान नहीं वहां के लोगों को 2 से 3 किमी तक का करना पड़ता है सफर
ग्राम ठेलकाबोड़ में 100 से ज्यादा पशु पालक हैं, लेकिन गोठान गांव में नहीं है, जिससे पशु पालक गोबर की बिक्री नहीं कर पा रहे हंै। ऐसे यहां के पशु पालक ग्राम कोड़ेजुगा के गोठान में जाकर बिक्री कर सकते हैं, लेकिन गांव से 3 किमी की दूरी की वजह से दूसरे गांव में बिक्री करने के लिए पशु पालक नहीं जा पा रहे हैं। पशुपालक ज्ञानेश मटियारा, गोपाल साहू व राजेश मटियारा ने कहा शासन की योजना तो अच्छी है, लेकिन उनके गांव में गोठान नहीं होने से योजना का फायदा नही मिल पा रहा है। उपसरपंच दोलेश जैन ने कहा ग्राम ठेलकाबोड़ में गोठान नहीं है। ग्राम ठेलकाबोड़ के पशु पालकों को गांव कोड़ेजुंगा में जाकर गोबर की बिक्री करने के लिए कहा गया है, लेकिन दूरी की वजह से नहीं जा पा रहे हैं। ग्राम दसपुर में 70 पशु पालक है। यहां के लोगों को 2 किमी दूर ग्राम बेवरती में जाकर गोबर की बिक्री करने के लिए कहा गया है, दूरी की वजह से जाते। उपसरपंच सालिक साहू ने कहा कि लोग दूसरे गांव के गोठान में दूरी की वजह से कोई जाना नहीं चाहते। ग्राम पंडरीपानी में भी गोठान नहीं है और पंडरीपानी के पशु पालकों को ग्राम पंचायत डुमाली में जाकर गोबर की खरीदी करने के लिए कहा गया है। गांव में 20 पशु पालक हंै, जिसमें से सिर्फ एक ही पशु पालक जिसकी डेयरी है। वह गोबर की बिक्री करने के लिए जाता है। गांव पंडरीपानी के डेयरी व्यावसायी शेष नारायण मिश्रा ने कहा कि डुमाली का गोठान ज्यादा दूरी में होने से कोई नहीं जाना चाहता है। सिर्फ वे अकेले ही गोबर की बिक्री करने के लिए जा रहे हैं, क्योंकि उनके पास काफी ज्यादा गोबर निकलता है।

सभी गांवों में गोठान शुरू होंगे: नरेंद्र नागेश
कांकेर कृषि उपसंचालक नरेंद्र नागेश ने कहा जिस ग्राम पंचायत में गोठान है। वहीं गोबर खरीदी करना है। शहर में जरूर गोबर खरीदी के लिए सेंटर बनाया गया है। जहां गोबर की बिक्री कर सकते है। सभी ग्राम पंचायत में गोबर की खरीदी हो। इसके लिए शासन बाद में क्रमानुसार गोठान खोलने की शुरूआत करेगी। कई पशु पालक अपने खेतों में खाद डालते हैं। इस कारण खाद बनाने के लिए गोबर की बिक्री नहीं कर रहे हैं।

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