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नई पहल:अब 50% से अधिक किसान उपयोग करते हैं रासायनिक जैविक खाद

दुर्गूकोंदलएक महीने पहले
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  • 2017 में दुर्गूकोंदल को घोषित किया गया था जैविक ब्लॉक

शिवचरण सिन्हा | जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड को वर्ष 2017 में जैविक ब्लॉक घोषित किया गया। इसके बाद से यहां किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते केवल जैविक खाद से खेती करने प्रोत्साहित किया जा रहा है। तीन सालों में यहां के 50 प्रतिशत से अधिक किसान जैविक खाद से ही खेती करने लगे हैं। जैविक खेती की दिशा में ब्लॉक के 141 में से 20 गांवों में तो बहुत ही उल्लेखनीय कार्य हुआ है जहां किसान कीटप्रकोप होने पर भी रासायनिक दवाओं के बजाय देशी तरीके से उपचार कर रहे हैं। एक विसंगति यहां जरूर है कि जो छोटे किसान है वे तो तेजी से जैविक खेती को अपना रहे हैंं।
दुर्गूकोंदल विकासखंड में कुल 141 गांव है जिनमें से 20 गांव ऐसे हैं जहां के शत प्रतिशत किसान जैविक खाद का ही उपयोग कर रहे हैं तथा रासायनिक खाद का उपयोग पूरी तरह बंद कर चुके हैं। 50 गांव ऐसे हैं जहां के 70 प्रतिशत तक किसान जैविक खाद का उपयोग करते रासायनिक खाद डालना बंद कर चुके हैं। शेष 70 गांवों में अभी बहुत काम करने की जरूरत है क्योंकि अभी यहां के केवल 30 प्रतिशत ही किसान जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं जबकि 70 प्रतिशत किसान रासायनिक खाद का मोह नहीं छोड़ पाए हैं। गुडफेल, तराईघोटिया, घोटुलमुंडा, नलकसा बंगाचार, पाऊरखेड़ा, क्वाचीकटेल आदि एेसे गांव हैं जहां जैविक खेती की दिशा में बहुत उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। यहां के किसान अब धान के साथ कोदो, मडिय़ा, कुटकी एवं दलहनी फसलों में उड़द, कुल्थी की भी फसल लेने लगे हैं।

कीट की रोकथाम के लिए करते हैं देसी उपचार
यहां के किसान कीट बीमारियों की रोकथाम के लिए देसी उपचार को बढ़ावा देने लगे हैं जिसके अच्छे परिणाम भी आने लगे हैं। नीम की पत्तियों का रस निकाल महुआ खली, कर्रा पत्ता एवं सल्फी पत्ते को खेत में जगह जगह रखते हैं। किसान जैविक खाद अपने घर में ही बनाने लगे हैं।

तीसरे साल से दिखने लगता है फायदा
वैज्ञानिक बीरबल साहू के अनुसार जैविक खेती में चरणबद्ध तरीके से काम करना पड़ता है। पहले साल 50 प्रतिशत जैविक तथा 50 प्रतिशत रासायनिक खाद डालना होता है। दूसरे साल रासायनिक खाद की मात्रा घटाकर 25 प्रतिशत करना पड़ता है। इसके बाद तीसरे साल शत प्रतिशत जैविक खाद डाला जाता है। यही कारण है पहले दो साल जैविक फसल का उतना फायदा नहीं दिखता लेकिन तीसरे साल से असर दिखने लगता है।

अंदरूनी गांवों के किसानों का काम सबसे बेहतर
दुर्गूकोंदल के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी डीआर कोमरा के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक किसान जैविक खेती को पुरी तरह आत्मसात कर चुके हैं। खासकर अंदरूनी गांव के किसान बहुत उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। छोटे किसान तो जैविक खेती के महत्व को समझ रहे हैं लेकिन बड़े तथा साधन संपन्न किसान रासायनिक खेती का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं लेकिन जागरूकता धीरे धीरे आ रही है।

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