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मौसम का हाल:इस माह डेढ़ गुना ज्यादा बारिश, इसके बाद भी 35 प्रतिशत कम बरसे बादल, नहीं भरे नदी-जलाशय

कांकेर5 दिन पहले
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सितंबर में अच्छी बारिश के बावजूद शहर की दूधनदी में पानी नहीं भर पाया है। इसीलिए नजर आ रही है नदी के किनारे झाड़ियां। - Dainik Bhaskar
सितंबर में अच्छी बारिश के बावजूद शहर की दूधनदी में पानी नहीं भर पाया है। इसीलिए नजर आ रही है नदी के किनारे झाड़ियां।
  • छोटे जलाशय सिर्फ 40 प्रतिशत ही भर पाए, जिले में अब तक औसत से सिर्फ 65% बारिश
  • अब भी दुर्गूकोंदल के तेंदुनदी और कोयलीबेड़ा के जलाशय में भराव शून्य

इस साल जून के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश के बाद बादल जो रूठे तो जुलाई-अगस्त के महीनों में बरसे ही नहीं। सितंबर में जिले में जमकर बारिश हो रही है। इस महीने अब तक औसत के मुकाबले 148 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। पूरे बारिश सीजन यानी 1 जून से लेकर अब तक की बात करें तो जिले में अभी भी केवल 65 प्रतिशत ही बारिश हुई है यानी 35 प्रतिशत कम। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई-अगस्त महीनों में कमजोर बारिश से जो फसलें बर्बाद हो चुकी हैं उनको तो इस बारिश से कोई फायदा नहीं लेकिन जिनकी फसल बच गई उनके लिए यह अमृत का काम कर रही है। सितंबर माह में झमाझम बारिश के बावजूद जलाशयों, नदी नालों में अपेक्षाकृत पानी नहीं भर पाया है।

मौसम विभाग ने 14 सितंबर को कांकेर जिले में भारी बारिश की संभावना जताई थी। 13 सितंबर की रात जिले में जमकर बारिश हुई, 14 सितंबर को दिन में बारिश रुक रुक कर होती रही। 14 सितंबर को जिले में सर्वाधिक 36.6 मिमी बारिश दुर्गूकोंदल तथा 36.3 मिमी नरहरपुर तहसील में हुई। कांकेर में 22.9, भानुप्रतापपुर में 32.5, चारामा में 19.3, अंतागढ़ में 27.4 तथा सबसे कम पखांजूर में 17.5 मिमी बारिश हुई। जुलाई-अगस्त महीने में जिले में सूखे के चलते कृषि विभाग ने फसलों को नुकसान का आंकलन खेतों तक पहुंच किया था। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कांकेर तहसील में फसलों को सर्वाधिक 50 से 60 प्रतिशत, अंतागढ़ में 48 तो शेष चारों विकासखंडों चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर तथा कोयलीबेड़ा में 25 से 35 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान हुआ था। कृषि विशेषज्ञ सूरज पंसारी के अनुसार जिन फसलों को नुकसान हो चुका है तथा जो बर्बाद हो चुकी हैं उसको सितंबर में हो रही बारिश से कोई विशेष फायदा नहीं लेकिन बची हुई फसलों के लिए यह बारिश अमृत है।

शहर की दूधनदी अब तक पड़ी है सूखी : अगस्त तथा सितंबर के महीनों में कांकेर शहर की दूधनदी में अच्छा खासा पानी रहता है। नदी के शहर वाले हिस्से में जो झाड़ियां उग जाती है वह बारिश के पानी के साथ साफ हो जाती थी। इस साल अभी तक दूधनदी में एक बार भी पानी नहीं भरा है। यही कारण है दूधनदी में अभी भी झाड़ियां नजर आ रहीं है तथा पानी भी पूरी नदी से होकर नहीं बह रहा है।

सिंचाई जलाशयों में औसतन 40 प्रतिशत ही हो पाया भराव

दो मध्यम सिंचाई जलाशय मयाना तथा परलकोट हैं। मयाना में मात्र 36 तो परलकोट में 46% ही जल भरा हो पाया है। जिले में 75 लघु सिंचाई जलाशय हैं जिनमें अब तक की स्थिति में पिछले साल 72 प्रतिशत जलभराव हो चुका था लेकिन इस साल अभी तक मात्र 40% ही जलभराव हो पाया है। 75 में से केवल 12 जलाशयों में 100 प्रतिशत जलभराव हो पाया है।

नरहरपुर में सर्वाधिक तो दुर्गकोंदल में कम बारिश

तहसील बारिश औसत से प्रतिशत
कांकेर - 659.3 - 58.8
भानुप्रतापपुर - 1086.3 - 65.5
दुर्गूकोंदल - 807.8 - 50.5
चारामा - 742.6 - 67.1
अंतागढ़ - 927.5 - 61.9
पखांजूर - 1315.2 - 76.2
नरहरपुर - 925.3 - 78.8

इस बारिश से जलाशयों की स्थिति सुधर रही

कांकेर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता आरआर वैष्णव ने कहा जुलाई अगस्त में बारिश कमजोर होने से जलाशयों में पानी कम भरा। सितंबर में बारिश होने से जलाशयों में जलाभराव की स्थिति सुधर रही है।

महीना बारिश हुई होनी थी औसत के
औसत बारिश मुकाबले %

जुन - 218.54 - 275.9 - 79.2
जुलाई - 258.87 - 466.2 - 55.5
अगस्त - 224.68 - 521.7 - 43.0
14 सितंबर तक - 221.31 - 148.7 - 148.8
अब तक कुल - 923.4 - 1412.5 - 65.4

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