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पति लेबनान में, पत्नी कांकेर में, मामला कोर्ट में:जज ने कहा- परिवार टूटना नहीं चाहिए, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दी समझाइश और परिवार जुड़ गया

कांकेर13 दिन पहलेलेखक: खालिद अख्तर खान
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दोनों पक्षकारों की बात सुनतीं जज। - Dainik Bhaskar
दोनों पक्षकारों की बात सुनतीं जज।
  • कांकेर में कोर्ट ने कहा- थोड़ी कोशिश से रिश्ते जुड़ जाएं, तो कोशिश जरूर करनी चाहिए

यूं तो यह मामला सामान्य है, लेकिन एक खुशखबर भी है। एक छोटी सी कोशिश से कैसे एक परिवार का पूरा संसार बच सकता है, ये उसका अच्छा उदाहरण है। बात इतनी सी थी कि कांकेर का एक व्यक्ति जो फौजी है, उसकी अपनी पत्नी से तकरार थी। तकरार इस बात पर थी कि पत्नी बाहर काम करना चाहती थी और पति और उसके परिवार चाहते थे कि पत्नी काम न करे। यह बात कोर्ट तक पहुंच गई।

दिक्कत ये हुई कि फौजी पति ट्रेनिंग के सिलसिले में लेबनान में हैं। ऐसे में सुनवाई कैसे हो। लिहाजा कोर्ट ने डिसाइड किया कि अगर वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर एक रिश्ते को भी बचाया जा सके, तो सार्थकता होगी। कांकेर की बबिता साहू ने सीजेएम कोर्ट में अपने फौजी पति चैतन्य साहू के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दायर कर दिया था। महिला के नौकरी करने को लेकर पति व उसका परिवार राजी नहीं था। इसी को लेकर पति-पत्नी को एक दूसरे से शिकायत थी। महिला ने कोर्ट में प्रताड़ना का मामला दर्ज करा दिया। पिछले कुछ महीने से मामले में सुनवाई चल रही थी।

इस मामले को निपटारे के लिए शनिवार को लोक अदालत में पेश किया गया, लेकिन जब कोर्ट में समझौते की बात आई तो पत्नी तो पहुंच गई, लेकिन पति ट्रेनिंग के लिए देश से बाहर लेबनान में था। वह नहीं आ सका। ऐसे में समस्या यह थी कि पति-पत्नी व जज आपस में कैसे बात करें। ऐसे में अदालत ने तय किया कि पति-पत्नी व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चित्रलेखा सोनवानी वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ेंगे और सुनवाई होगी। जज के सामने पति-पत्नी ने अपनी-अपनी बातें रखीं।

जज ने दोनों की बातें सुनने के बाद दोनों पक्ष को समझाइश दी। इस पर दोनों एक साथ रहने के लिए राजी हो गए और मामला यहीं खत्म हो गया। वरिष्ट व्यवहार न्यायाधीश डीके गिलहरे ने कहा कि कोर्ट हर स्तर पर परिवारों के बीच रिश्तों को जोड़ने की कोशिश करेगा। कोर्ट पति-पत्नी व परिवार के आपसी रिश्तों को टूटने से बचाने हर स्तर पर कोर्ट में आने से पहले व हर पेशी में समझाने का पूरा प्रयास करता है। गलतफहमियां दूर करता है। विवादों को लोक अदालत में खत्म किया जा सकता है। इसमें समय व पैसे दोनों की बचत होती है।

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