शिकायत-बेड पर सोए मिलते हैं कुत्ते:अस्पताल है पर सुविधा नहीं छह घंटे चक्काजाम किया

कांकेरएक महीने पहले
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आमोड़ा में वैसे तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है, लेकिन अव्यवस्था का आलम यह है कि शाम होते ही यहां कुत्ते-भालू घुस आते हैं, जो कई बार बेड पर सोए हुए भी मिलते हैं। वहीं आमोड़ा बीएमओ के साथ ही पूरा स्टाफ, सारे दस्तावेज व कंप्यूटर आदि भी नरहरपुर शिफ्ट हो गए। इतना ही नहीं एंबुलेंस भी नरहरपुर भेज दिया गया। स्वास्थ्य सेवाओं को पाने में हो रही परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने मंगलवार को कांकेर-नरहरपुर मार्ग में चक्काजाम कर दिया।

ग्रामीण सुबह से ही सड़क पर आ गए और वहीं पंडाल लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रशासन ने उनकी कुछ मांगों को मानते हुए जल्द पूरा कराने का आश्वासन दिया। इस पर ग्रामीणों ने सप्ताहभर का समय दिया और इस दरम्यान काम न होने पर दोबारा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी। प्रदर्शन कर रहे विजय नहाटा व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी रिकार्ड में शुरू से आमोड़ा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिला हुआ है। इसके साथ ही नरहरपुर विकासखंड का बीएमओ दफ्तर भी आमोड़ा में ही है, लेकिन पिछले पांच साल से आमोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति काफी खराब है। बीएमओ के साथ पूरा स्टाफ और अन्य सामान भी नरहरपुर भेज दिए गए। अस्पताल के सामने से बीएमओ व अस्पताल का बोर्ड भी हटवा दिया गया है।

वह भी बिना किसी आदेश के। बीएमओ दफ्तर नरहरपुर जाने के बाद से आमोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बद से बदतर हो गई है। यहां पांच डाक्टरों में से सिर्फ दो ही पदस्थ हैं। इसमें भी शाम के बाद वे नहीं मिलते। स्टाफ भी शाम के बाद अस्पताल से गायब रहते हैं। खानापूर्ति के लिए यहां एक नर्स की ड्यूटी लगा दी जाती है। रात में यदि सामान्य मरीज भी आते हैं तो उन्हें कांकेर जाना पड़ता है। समस्या को लेकर चक्काजाम करने वाले ग्रामीणों के पास मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जेएल उईके पहुंचे, लेकिन बात नहीं बनी। प्रशासन उन्हें मनाता रहा लेकिन वे अपनी मांग पर डटे रहे। दोपहर बाद कुछ मांगों को जल्द पूरा करने के आश्वासन पर चक्काजाम समाप्त हुआ। हालांकि एक सप्ताह का समय देते हुए काम न होने पर ग्रामीणों ने दोबारा आंदोलन की चेतावनी भी दी। प्रदर्शन में आमोड़ा के बनसागर, आमोड़ा, रिसेवाड़ा, साल्हेटोला, चंवर, मरकाटोला, उमरादाह, जुनवानी, ढेकुना समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आमोड़ा के अंतर्गत आने वाले आश्रित गांव के ग्रामीण शामिल थे।

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